मंत्रालय: 
वाणिज्य एवं उद्योग
  • जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) बिल, 2026 को 27 मार्च, 2026 को लोकसभा में पेश किया गया। इसका उद्देश्य 80 केंद्रीय कानूनों में संशोधन करके अपराधों और दंड को डीक्रिमिनलाइज करना या उन्हें युक्तिसंगत बनाना है। यह बिल 18 अगस्त, 2025 को पेश किए गए जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) बिल, 2025 के स्थान पर लाया गया है। 2025 के बिल में 17 केंद्रीय कानूनों में संशोधन का प्रस्ताव था और इसे लोकसभा की एक सिलेक्ट कमिटी (चेयर: श्री तेजस्वी सूर्या) को भेजा गया था। कमिटी ने 13 मार्च, 2026 को अपनी रिपोर्ट पेश की और 17 कानूनों में और बदलावों का सुझाव दिया, साथ ही 65 अन्य कानूनों में संशोधन का भी सुझाव दिया। 2025 का बिल 17 मार्च, 2026 को वापस ले लिया गया था।
  • अपराधों को डीक्रिमिनलाइज करना: इस बिल में कई अपराधों को डीक्रिमिनलाइज करके उनके लिए दीवानी दंड (सिविल पैनेल्टी) का प्रावधान किया गया है। उदाहरण के लिए ड्रग और कॉस्टमैटिक्स एक्ट, 1940 के तहत, कानून का उल्लंघन करते हुए सौंदर्य प्रसाधनों का निर्माण और बिक्री करना एक वर्ष तक के कारावास, 20,000 रुपए तक के जुर्माने या दोनों से दंडनीय है। बिल में इसके बजाय एक लाख रुपए या जब्त किए गए सौंदर्य प्रसाधनों के मूल्य के तीन गुना, जो भी अधिक हो, के दीवानी दंड का प्रावधान है। इसी प्रकार, राष्ट्रीय राजमार्ग एक्ट, 1956 के तहत, राजमार्ग को दुर्गम या कम सुरक्षित बनाना पांच वर्ष तक के कारावास, जुर्माने या दोनों से दंडनीय है। बिल में इसके बजाय 10 लाख रुपए से एक करोड़ रुपए तक के दीवानी दंड का प्रावधान है।

  • कारावास की सजा हटाना: कुछ मामलों में बिल किसी अपराध के लिए कारावास की अवधि को हटाता है। उदाहरण के लिए, भारतीय उत्तराधिकार एक्ट, 1925 के तहत, रद्द किए गए प्रोबेट या प्रशासन पत्रों को वापस न सौंपने पर तीन महीने तक का कारावास, जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। बिजली एक्ट, 2003 के तहत, किसी आदेश या निर्देश का पालन न करने पर तीन महीने तक का कारावास, जुर्माना या दोनों का दंड दिया जा सकता है। बिल में केवल जुर्माना लगाने का प्रावधान है और जुर्माने की अधिकतम राशि भी बढ़ा दी गई है।

  • अपराधों को हटाना: इस बिल में कई अपराधों को हटाया गया है। इनमें निम्नलिखित अपराध शामिल हैं: (i) दिल्ली पुलिस एक्ट, 1978 के तहत आग लगने की झूठी सूचना देना, (ii) दिल्ली नगर निगम एक्ट, 1957 के तहत जन्म और मृत्यु की सूचना न देना, और (iii) कॉपीराइट एक्ट, 1957 के तहत कॉपीराइट रजिस्टर में गलत प्रविष्टियां करना।

  • जुर्माने और आर्थिक दंड में संशोधन: बिल अनेक अपराधों के लिए जुर्माने और आर्थिक दंड के मौद्रिक मूल्य में संशोधन करता है। साथ ही यह प्रावधान करता है कि इसमें निर्दिष्ट जुर्माने और आर्थिक दंड में प्रत्येक तीन वर्ष में संबंधित न्यूनतम राशि की 10% वृद्धि होगी।

  • पहले और दूसरे अपराध पर चेतावनी: बिल कुछ कानूनों में संशोधन करता है ताकि अपराध के पहले या दूसरे मामले में केवल एडवाइजरी या चेतावनी जारी की जा सके। उदाहरण के लिए, एप्रेंटिस एक्ट, 1961 के तहत, जुर्माने से दंडनीय अपराधों में जानकारी देने से इनकार करना औऱ किसी एप्रेंटिस से निर्धारित समय से अधिक काम कराना शामिल है। बिल में प्रावधान है कि पहले उल्लंघन के लिए एडवाइजरी जारी की जाएगी और दूसरे उल्लंघन के लिए चेतावनी जारी की जाएगी। इसके बाद के उल्लंघनों के लिए दीवानी दंड लगाया जाएगा।

  • सुधार का नोटिस: बिल में लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट, 2009 के तहत सुधार नोटिस जारी करने का प्रावधान है। इस एक्ट के तहत, गैर-मानक बाट और माप का निर्माण, उपयोग या बिक्री जैसे कई अपराध जुर्माने से दंडनीय हैं। बिल में इसके विपरीत यह प्रावधान है कि पहले अपराध के मामले में सुधार नोटिस जारी किया जा सकता है। ऐसे नोटिस में एक निर्दिष्ट समय के भीतर नियमों के उल्लंघन को ठीक करना अनिवार्य है। कुछ मामलों में, दूसरे अपराध के लिए दीवानी दंड लगाया जाएगा, और उसके बाद के अपराधों के लिए आपराधिक जुर्माना (क्रिमिनल फाइन) लगाया जाएगा।

  • दंड का निर्धारण: बिल कुछ कानूनों में निर्णायक अधिकारियों की नियुक्ति का प्रावधान करने के लिए संशोधन करता है जो जांच करेंगे और दंड का निर्धारण करेंगे। बिल निर्णायक अधिकारियों के निर्णयों के खिलाफ अपील की सुनवाई के लिए अपीलीय अधिकारियों की नियुक्ति का भी प्रावधान करता है।

  • नई दिल्ली नगर निगम क्षेत्र में संपत्ति कर और विज्ञापन कर: यह बिल नई दिल्ली नगर पालिका परिषद एक्ट, 1994 में संशोधन करता है। इस कानून में संपत्ति कर लगाने से संबंधित प्रावधान हैं। बिल में निर्दिष्ट किया गया है कि संपत्ति कर में भवन कर और रिक्त भूमि कर शामिल होंगे। यह रिक्त भूमि और भवनों के लिए आधार मूल्य की अनुशंसा करने और संपत्ति कर के निर्धारण एवं संशोधन के तरीके पर विचार करने के लिए एक नगर निगम मूल्यांकन समिति की स्थापना करता है। बिल संपत्ति कर संबंधी शिकायतों के निवारण के लिए एक कठिनाई एवं विसंगति समिति (हार्डशिप एंड अनामली कमिटी) का गठन करता है। बिल विज्ञापन कर लगाने से संबंधित प्रावधानों को भी हटाता है।

  • जन विश्वास एक्ट, 2023 के अंतर्गत जुर्माने और दंड में संशोधन का तरीका: जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) एक्ट, 2023 में निर्दिष्ट जुर्माने और दंड में संशोधन का प्रावधान प्रत्येक तीन वर्ष में किया गया है। बिल में यह भी कहा गया है कि अगर किसी कानून में पहले से ही संशोधन की अपनी विधि निर्धारित है, तो उस कानून में दी गई विधि ही लागू होगी।

 

 

 

डिस्क्लेमर: प्रस्तुत रिपोर्ट आपके समक्ष सूचना प्रदान करने के लिए प्रस्तुत की गई है। पीआरएस लेजिसलेटिव रिसर्च (पीआरएस) के नाम उल्लेख के साथ इस रिपोर्ट का पूर्ण रूपेण या आंशिक रूप से गैर व्यावसायिक उद्देश्य के लिए पुनःप्रयोग या पुनर्वितरण किया जा सकता है। रिपोर्ट में प्रस्तुत विचार के लिए अंततः लेखक या लेखिका उत्तरदायी हैं। यद्यपि पीआरएस विश्वसनीय और व्यापक सूचना का प्रयोग करने का हर संभव प्रयास करता है किंतु पीआरएस दावा नहीं करता कि प्रस्तुत रिपोर्ट की सामग्री सही या पूर्ण है। पीआरएस एक स्वतंत्र, अलाभकारी समूह है। रिपोर्ट को इसे प्राप्त करने वाले व्यक्तियों के उद्देश्यों अथवा विचारों से निरपेक्ष होकर तैयार किया गया है। यह सारांश मूल रूप से अंग्रेजी में तैयार किया गया था। हिंदी रूपांतरण में किसी भी प्रकार की अस्पष्टता की स्थिति में अंग्रेजी के मूल सारांश से इसकी पुष्टि की जा सकती है।