मंत्रालय: 
विधि एवं न्याय

संविधान में यह प्रावधान है कि लोकसभा में राज्यों को उनकी जनसंख्या के अनुपात में सीटें आवंटित की जानी चाहिए।[1] इसके अलावा प्रत्येक राज्य के निर्वाचन क्षेत्रों की जनसंख्या लगभग समान होनी चाहिए। इसमें यह भी अनिवार्य है कि प्रत्येक जनगणना के बाद निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण (जिसे परिसीमन भी कहा जाता है) किया जाए। राज्य विधानसभाओं के लिए भी इसी प्रकार के प्रावधान लागू होते हैं। 1976 में 42वें संवैधानिक संशोधन के माध्यम से, लोकसभा में प्रत्येक राज्य की कुल सीटों की संख्या और राज्य विधानसभाओं में कुल सीटों की संख्या 1971 की जनगणना के आधार पर फ्रीज यानी स्थिर कर दी गई थी। यह रोक शुरू में 2000 के बाद पहली जनगणना के प्रकाशन तक लागू थी। 2001 में 84वें संवैधानिक संशोधन ने इस रोक को 2026 के बाद पहली जनगणना के प्रकाशन तक बढ़ा दिया। यह राज्यों को प्रोत्साहित करने का एक कदम था ताकि वे जनसंख्या को स्थिर करने के अपने एजेंडा को प्रभावी तरीके से आगे बढ़ा सकें।[2]   

2023 में 106वां संविधान संशोधन पारित किया गया और उसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित की गईं। यह आरक्षण 2023 के कानून के लागू होने के बाद होने वाली पहली जनगणना पर आधारित होगा। वर्तमान में चल रही जनगणना के लिए संदर्भ तिथि 1 मार्च, 2027 तय की गई है।[3] चूंकि अगले लोकसभा चुनाव 2029 में होंगे, इसलिए यह संभावना कम ही है कि 2027 की जनगणना के आधार पर परिसीमन प्रक्रिया 2029 के चुनावों से पहले पूरी हो पाएगी। इसका अर्थ यह होगा कि 2029 के लोकसभा चुनावों में महिलाओं के लिए आरक्षण लागू नहीं होगा। पिछला परिसीमन आयोग 2002 में गठित किया गया था और इसके आदेशों को 2008 में अंतिम रूप दिया गया था।[4] 

16 अप्रैल, 2026 को लोकसभा में तीन बिल पेश किए गए: (i) संविधान (131वां संशोधन) बिल, 2026, (ii) केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) बिल, 2026, और (iii) परिसीमन बिल, 2026। ये बिल लोकसभा के आकार (सीटों की संख्या) को बढ़ाते हैं, 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन का रास्ता साफ करते हैं और इसी परिसीमन के आधार पर महिलाओं के लिए आरक्षण को लागू करने का प्रावधान करते हैं। केंद्र शासित प्रदेश कानून बिल पुद्दूचेरी, दिल्ली और जम्मू-कश्मीर के मामलों में इसी तरह के प्रावधानों को लागू करता है।

मुख्य विशेषताएं

  • जनसंख्या के अनुपात में परिसीमन: संविधान संशोधन बिल प्रत्येक राज्य में उसकी जनसंख्या के अनुपात में सीटों के सिद्धांत पर वापस लौटता है। इसका तात्पर्य यह है कि सभी राज्यों में लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों की जनसंख्या लगभग समान होगी।

  • किस जनगणना का इस्तेमाल होगा, संसद तय करेगी: संविधान में यह निर्दिष्ट है कि प्रत्येक जनगणना के बाद परिसीमन किया जाएगा और यह परिसीमन उसी जनगणना पर आधारित होगा। संविधान संशोधन बिल संसद को यह निर्धारित करने के लिए कानून पारित करने का अधिकार देता है कि परिसीमन कब किया जाएगा और किस जनगणना का उपयोग किया जाएगा। एक अलग बिल (परिसीमन बिल, 2026) में यह प्रावधान है कि परिसीमन आयोग के गठन की तारीख तक प्रकाशित नवीनतम जनगणना का उपयोग किया जाएगा। इसका तात्पर्य यह है कि अगले परिसीमन के लिए 2011 की जनगणना का उपयोग किया जाएगा।

  • लोकसभा में सीटों की अधिकतम संख्या में बढ़ोतरी: संविधान के अनुसार, लोकसभा में अधिकतम 550 सदस्य होंगे, जिनमें राज्यों से 530 और केंद्र शासित प्रदेशों से 20 सदस्य हो सकते हैं। संविधान संशोधन बिल के तहत सदस्यों की अधिकतम संख्या बढ़ाकर 850 कर दी गई है, जिनमें राज्यों से 815 तक सदस्य और केंद्र शासित प्रदेशों से 35 तक सदस्य शामिल हो सकते हैं।

  • महिलाओं के लिए आरक्षण की शुरुआत: 2023 में पारित 106वें संवैधानिक संशोधन के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में एक तिहाई सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित की गईं। यह आरक्षण 2023 के कानून के लागू होने के बाद पहली जनगणना के आधार पर प्रभावी होगा। संविधान संशोधन बिल इस अनिवार्यता को हटाता है।

  • परिसीमन आयोग की नियुक्ति: परिसीमन बिल, 2026 केंद्र सरकार को यह अधिकार देता है कि वह परिसीमन करने के लिए परिसीमन आयोग का गठन कर सकती है। इसमें निम्नलिखित सदस्य होंगे: (i) एक चेयरपर्सन, जो सर्वोच्च न्यायालय का वर्तमान या पूर्व न्यायाधीश हो, (ii) मुख्य चुनाव आयुक्त या मुख्य चुनाव आयुक्त द्वारा नामित एक चुनाव आयुक्त, और (iii) संबंधित राज्य का राज्य चुनाव आयुक्त। चेयरपर्सन की नियुक्ति केंद्र सरकार करेगी।

विचारणीय मुद्दे

परिसीमन की अवधि और हालिया जनगणना के उपयोग पर कोई संवैधानिक निश्चितता नहीं

संविधान के अनुच्छेद 81 और 82 में यह प्रावधान है कि लोकसभा की सीटों का परिसीमन प्रत्येक जनगणना के बाद किया जाएगा और यह नवीनतम जनगणना पर आधारित होगा। इसके विपरीत, संविधान संशोधन बिल के तहत संसद कानून द्वारा यह तय करेगी कि परिसीमन कब किया जाए और किस जनगणना का उपयोग किया जाए। संसद साधारण बहुमत से ये निर्णय ले सकती है। चूंकि लोकसभा में सरकार के पास साधारण बहुमत होगा, और यह संशोधन बिल पर राज्यसभा के तुलनात्मक नियंत्रण को कमजोर करता है (नीचे देखें), इसलिए सरकार के पास यह तय करने की शक्ति होगी कि परिसीमन कब किया जाए और किस जनगणना का उपयोग किया जाए।

लोकसभा में राज्यों का आनुपातिक हिस्सा बदलने वाला है

संविधान में यह प्रावधान है कि लोकसभा में राज्यों को सीटों का आवंटन 1971 की जनगणना के आधार पर होगा, जो 2026 के बाद होने वाली पहली जनगणना तक लागू रहेगा। बिल इस प्रावधान को हटाते हैं और अगली परिसीमन प्रक्रिया को 2011 की जनगणना के आधार पर करने की अनुमति देते हैं। इस बदलाव से लोकसभा की कुल सीटों में राज्यों के हिस्से में महत्वपूर्ण परिवर्तन हो सकता है। उदाहरण के लिए अगर लोकसभा में मौजूदा संख्या बनी रहती है तो तमिलनाडु की सीटें 39 से घटकर 32 हो जाएंगी, और केरल की 20 से घटकर 15 रह जाएंगी। उत्तर प्रदेश की सीटें 80 से बढ़कर 89 हो जाएंगी, बिहार की 40 से बढ़कर 46 हो जाएंगी, और राजस्थान की 25 से बढ़कर 30 हो जाएंगी। लोकसभा की कुल सीटों की संख्या बढ़ाने के बावजूद राज्यों के बीच सीटों का आपसी अनुपात या हिस्सेदारी का संतुलन वैसा ही बना रहेगा, जैसा अभी है। राज्यवार विवरण के लिए परिशिष्ट देखें।

लोकसभा के आकार (संख्या) में बढ़ोतरी

राज्यसभा के तुलनात्मक आकार में बदलाव

संविधान संशोधन बिल में लोकसभा की अधिकतम सीटों की संख्या 550 से बढ़ाकर 850 करने का प्रावधान है। संविधान के अनुच्छेद 80 के अनुसार राज्यसभा में अधिकतम 250 सदस्य होंगे। 131वें संविधान संशोधन बिल में इस प्रावधान को अपरिवर्तित रखा गया है। इसके परिणामस्वरूप लोकसभा और राज्यसभा के तुलनात्मक आकार में परिवर्तन होगा। लोकसभा में सीटों की संख्या 50% बढ़कर 543 से 815 हो जाने पर लोकसभा और राज्यसभा की सीटों का अनुपात 2.2:1 से बढ़कर 3.3:1 हो जाएगा। इससे राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के चुनावों में राज्यसभा सदस्यों की आनुपातिक हिस्सेदारी कम हो जाएगी। इससे दोनों सदनों की संयुक्त बैठक की स्थिति में लोकसभा की शक्तियां भी बढ़ जाएंगी। उदाहरण के लिए, अगर राज्यसभा में विपक्ष के पास दो-तिहाई बहुमत है, तब भी सरकार लोकसभा में 56% सीटों के साथ इस बहुमत को दरकिनार कर सकती है। संविधान का अनुच्छेद 108 संयुक्त बैठक का प्रावधान करता है, अगर किसी सदन द्वारा पारित बिल: (i) दूसरे सदन द्वारा अस्वीकृत कर दिया जाता है, (ii) दूसरे सदन द्वारा छह महीने से अधिक समय तक लंबित रखा जाता है, या (iii) सदन संशोधनों पर असहमत होते हैं।

मंत्रिपरिषद की संख्या में वृद्धि

संविधान के अनुच्छेद 75 में यह प्रावधान है कि मंत्रियों की कुल संख्या लोकसभा के कुल सदस्यों की संख्या के 15% से अधिक नहीं होगी। अगर लोकसभा की सीटों की संख्या 50% बढ़कर 543 से 815 हो जाती है, तो केंद्र सरकार की मंत्रिपरिषद की अनुमत संख्या 81 से बढ़कर 122 हो जाएगी। यह सीमा संविधान (91वां संशोधन) एक्ट, 2003 के माध्यम से निर्धारित की गई थी। उद्देश्यों और कारणों के विवरण में यह उल्लेख किया गया था कि विभिन्न सरकारों द्वारा असामान्य रूप से बड़ी मंत्रिपरिषदें गठित की जा रही थीं और इस परंपरा को कानून द्वारा प्रतिबंधित करना आवश्यक था।[5]  इससे यह सवाल उठता है कि क्या लोकसभा के आकार में वृद्धि के लिए मंत्रिपरिषद के आकार में भी आनुपातिक वृद्धि आवश्यक है। तुलना के लिए, यूएसए में राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति के अलावा संघीय मंत्रिमंडल में 22 कार्यकारी विभागों और एजेंसियों के प्रमुख होते हैं।[6]

सांसदों के लिए लोकसभा में भाग लेने के अवसर

लोकसभा का आकार बढ़ने से प्रत्येक सांसद को बिल और प्रमुख मुद्दों पर बहस सहित विभिन्न विषयों पर अपनी बात रखने के लिए कम समय मिलेगा। प्रश्न पूछने और जन महत्व के मुद्दों को उठाने जैसे कुछ अधिकार मतदान के माध्यम से आवंटित किए जाते हैं। सांसदों की संख्या बढ़ने से मतदान में चुने जाने की संभावना कम हो जाएगी, और इस प्रकार प्रत्येक सांसद को प्रश्न और मुद्दे उठाने का अवसर भी कम मिलेगा।

‘परिसीमन आयोग’ पारिभाषित नहीं है

संविधान संशोधन बिल संविधान में 'परिसीमन आयोग' शब्द को शामिल करता है, लेकिन इसकी परिभाषा नहीं देता है।

अनुलग्नक

तालिका 1: 2011 की जनगणना के आधार पर अनुमानित सीटों की संख्या

राज्य/केंद्र शासित प्रदेश

2011

जनसंख्या

वर्तमान सीटें

(1971 की जनगणना के अनुसार)

2011 की जनगणना पर आधारित अनुमान

कुल सीटों में कोई बदलाव नहीं

सीटों में 50% की वृद्धि

सीटें

% हिस्सा

अनुमानित सीटें

वृद्धि(+)/

कमी (-)

%
 
हिस्सा

अनुमानित सीटें

वृद्धि (+)/

कमी (-)

%

हिस्सा

अंडमान निकोबार द्वीप समूह

3,80,581

1

0.18%

1

0

0.18%

1

0

0.12%

आंध्र प्रदेश

8,45,80,777

42

7.73%

38

-4

6.93%

56

14

6.89%

अरुणाचल प्रदेश

13,83,727

2

0.37%

2

0

0.36%

2

0

0.25%

असम

3,12,05,576

14

2.58%

14

0

2.55%

21

7

2.58%

बिहार

10,40,99,452

40

7.37%

46

6

8.39%

69

29

8.49%

चंडीगढ़

10,55,450

1

0.18%

1

0

0.18%

1

0

0.12%

छत्तीसगढ़

2,55,45,198

11

2.03%

11

0

2.01%

17

6

2.09%

दादरा एवं नगर हवेली

3,43,709

1

0.18%

1

0

0.18%

1

0

0.12%

दमन एवं दीव

2,43,247

1

0.18%

1

0

0.18%

1

0

0.12%

गोवा

14,58,545

2

0.37%

2

0

0.36%

2

0

0.25%

गुजरात

6,04,39,692

26

4.79%

27

1

4.93%

40

14

4.92%

हरियाणा

2,53,51,462

10

1.84%

11

1

2.01%

17

7

2.09%

हिमाचल प्रदेश

68,64,602

4

0.74%

3

-1

0.55%

5

1

0.62%

जम्मू एवं कश्मीर

1,25,41,302

6

1.10%

6

0

1.09%

8

2

0.98%

झारखंड

3,29,88,134

14

2.58%

15

1

2.74%

22

8

2.71%

कर्नाटक

6,10,95,297

28

5.16%

27

-1

4.93%

41

13

5.04%

केरल

3,34,06,061

20

3.68%

15

-5

2.74%

22

2

2.71%

लक्षद्वीप

64,473

1

0.18%

1

0

0.18%

1

0

0.12%

मध्य प्रदेश

7,26,26,809

29

5.34%

32

3

5.84%

48

19

5.90%

महाराष्ट्र

11,23,74,333

48

8.84%

50

2

9.12%

75

27

9.23%

मणिपुर

28,55,794

2

0.37%

2

0

0.36%

2

0

0.25%

मेघालय

29,66,889

2

0.37%

2

0

0.36%

2

0

0.25%

मिजोरम

10,97,206

1

0.18%

1

0

0.18%

1

0

0.12%

नागालैंड

19,78,502

1

0.18%

1

0

0.18%

1

0

0.12%

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली

1,67,87,941

7

1.29%

7

0

1.28%

11

4

1.35%

ओड़िशा

4,19,74,218

21

3.87%

19

-2

3.47%

28

7

3.44%

पुद्दूचेरी

12,47,953

1

0.18%

1

0

0.18%

1

0

0.12%

पंजाब

2,77,43,338

13

2.39%

12

-1

2.19%

19

6

2.34%

राजस्थान

6,85,48,437

25

4.60%

30

5

5.47%

46

21

5.66%

सिक्किम

6,10,577

1

0.18%

1

0

0.18%

1

0

0.12%

तमिलनाडु

7,21,47,030

39

7.18%

32

-7

5.84%

48

9

5.90%

त्रिपुरा

36,73,917

2

0.37%

2

0

0.36%

2

0

0.25%

उत्तर प्रदेश

19,98,12,341

80

14.73%

89

9

16.24%

133

53

16.36%

उत्तराखंड

1,00,86,292

5

0.92%

4

-1

0.73%

7

2

0.86%

पश्चिम बंगाल

9,12,76,115

42

7.73%

41

-1

7.48%

61

19

7.50%

कुल

1,21,08,54,977

543

-

548

-

-

813

-

-

नोट: आंध्र प्रदेश में तेलंगाना और जम्मू-कश्मीर में लद्दाख शामिल हैं। हम मानते हैं कि अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मणिपुर और मेघालय के लिए सीटों की संख्या कम नहीं की जाएगी, क्योंकि 60 लाख से कम जनसंख्या वाले राज्यों के लिए यह अपवाद है। प्रत्येक राज्य के आंकड़ों को राउंड ऑफ करने के कारण कुल अनुमानित संख्या में थोड़ा अंतर आ सकता है। स्रोत: जनगणना पोर्टल; प्रथम अनुसूची, लोक प्रतिनिधित्व एक्ट, 1950; पीआरएस।


[2] Statement of Objects and Reasons to the Constitution (84th Amendment) Act, 2001, https://bombayhighcourt.nic.in/libweb/misc/coi/constitution/act/BILL/C084Bill.pdf.

[3] “Population Census-2027 to be conducted in two phases along with enumeration of castes”, Press Information Bureau, Ministry of Home Affairs, June 4, 2025, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2133845&reg=3&lang=2.

[4] S.O. 382(E), Notification dated February 19, 2008 issued by Ministry of Law and Justice, Government of India, https://egazette.gov.in/WriteReadData/2008/E_250_2010_006.pdf.

[5] Statement of Objects and Reasons to the Constitution (91st Amendment) Act, 2003, https://bombayhighcourt.nic.in/libweb/misc/coi/constitution/act/BILL/C091Bill.pdf.

[6] “Cabinet”, Website of the White House, USA, as accessed on April 15, 2026, https://www.whitehouse.gov/administration/cabinet/.

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