मुख्य बिंदु

  • मनरेगा को वीबी-जी राम जी के रूप में पुनर्गठित किया गया है जिसके तहत 100 दिनों के बजाय 125 दिनों का रोजगार प्रदान किया जाएगा; वीबी-जी राम जी के लिए 95,692 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

  • पिछले दशक में मनरेगा के तहत प्रदान किया गया रोजगार प्रति परिवार प्रति वर्ष औसतन लगभग 48 दिन रहा।

  • पीएम आवास योजना (ग्रामीण) में धनराशि का उपयोग कम हुआ है; केवल 70% घरों का निर्माण पूरा हुआ है।

ग्रामीण विकास मंत्रालय का उद्देश्य देश के ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना है और यह ग्रामीण भारत में अधिकांश विकास और कल्याणकारी गतिविधियों के लिए नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करता है।[1] मंत्रालय के दो विभाग हैं: ग्रामीण विकास विभाग और भूमि संसाधन विभाग। ग्रामीण विकास विभाग रोजगार के अवसरों को बढ़ाने, कमजोर वर्ग के लिए सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने और ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिक विकास के लिए बुनियादी ढांचे के विकास को बढ़ावा देने का कार्य करता है।1  भूमि संसाधन विभाग वर्षा आधारित कृषि योग्य और बंजर भूमि के सतत विकास को सुनिश्चित करने और देश में भूमि संसाधनों के उपयोग को अनुकूलित करने का कार्य करता है।[2]

इस रिपोर्ट में मंत्रालय के 2026-27 के प्रस्तावित व्यय का विश्लेषण किया गया है। इसमें पिछले कुछ वर्षों के बजट के रुझानों और मंत्रालय द्वारा अपने कार्यक्रमों के कार्यान्वयन में आने वाली चुनौतियों की भी समीक्षा की गई है। पहले भाग में ग्रामीण विकास विभाग और दूसरे भाग में भूमि संसाधन विभाग शामिल है।

2026-27 में आवंटन

वर्ष 2026-27 में ग्रामीण विकास मंत्रालय (एमओआरडी) को 1,97,023 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं जो 2025-26 के संशोधित अनुमानों से 4% अधिक है। ग्रामीण विकास विभाग को 1,94,369 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं, जो 2025-26 के संशोधित अनुमानों से 4% अधिक है। भूमि संसाधन विभाग को 2,654 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं, जो 2025-26 के संशोधित अनुमानों से 51% अधिक है।

तालिका 1: ग्रामीण विकास मंत्रालय को आवंटित बजट (करोड़ रुपए में)

विभाग

24-25 वास्तविक

25-26 संअ

26-27 बअ

% परिवर्तन

ग्रामीण विकास

1,76,655

1,86,996

1,94,369

4%

भूमि संसाधन

2,652

1,757

2,654

51%

कुल

1,79,307

1,88,753

1,97,023

4%

नोट: बअ, बजट अनुमान है और संअ संशोधित अनुमान है। 2025-26 संअ से 2026-27 बजट में प्रतिशत परिवर्तन।
स्रोत: ग्रामीण विकास मंत्रालय की अनुदान मांग 2026-27; पीआरएस।

ग्रामीण विकास विभाग

वित्तीय स्थिति

विभाग द्वारा संचालित प्रमुख योजनाओं में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा), प्रधान मंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई), राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम), प्रधान मंत्री आवास योजना-ग्रामीण (पीएमएवाई-जी) और राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (एनएसएपी) शामिल हैं।

2018-19 को छोड़कर, विभाग ने 2015 से 2024 के बीच अपने बजट से अधिक खर्च किया है। 2020-21 और 2022-23 के बीच महामारी के दौरान अधिक वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए विभाग को आवंटित राशि में उल्लेखनीय वृद्धि की गई थी। महामारी के दौरान रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए मनरेगा के तहत आवंटन बढ़ाया गया था।[3]

रेखाचित्र 1: वर्ष 2014-15 से 2026-27 के बीच व्यय (करोड़ रुपए में)

 

नोट: वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमानों को वास्तविक आंकड़े माना गया है।
स्रोत: ग्रामीण विकास मंत्रालय के विभिन्न वर्षों की अनुदान मांग; पीआरएस।

विभाग के तहत प्रमुख योजनाएं

मनरेगा का पुनर्गठन वीबी-जी आरएएम जी में

दिसंबर 2025 में संसद ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी एक्ट, 2005 (मनरेगा) के स्थान पर विकसित भारत- रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) के लिए गारंटी: वीबी-जी राम जी एक्ट, 2025 पारित किया।[4] मनरेगा के तहत, प्रत्येक ग्रामीण परिवार को, जिसके वयस्क सदस्य अकुशल शारीरिक श्रम के लिए स्वेच्छा से आगे आते हैं, वर्ष में 100 दिनों के रोजगार की गारंटी दी जाती थी।[5]  मनरेगा के अंतर्गत शुरू की गई परियोजनाओं में सिंचाई के लिए नहरें खोदना, आंगनवाड़ी केंद्रों का निर्माण, वृक्षारोपण अभियान, जलापूर्ति और स्वच्छता से संबंधित परियोजनाएं शामिल हैं।[6]  वीबी-जी राम जी एक्ट के तहत गारंटी को बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है।4

योजनाओं के लिए आवंटन

2026-27 में विभाग को आवंटित कुल राशि में से, वीवी-जी राम जी (40%) और पीएमएवाई-जी (23%) मिलकर मंत्रालय के कुल सकल व्यय का 63% हिस्सा हैं। इसके बाद मनरेगा (12%), एनआरएलएम (8%), पीएमजीएसवाई (8%), और एनएसएपी (4%) का स्थान आता है।

तालिका 2: प्रमुख योजनाओं के लिए आवंटन (करोड़ रुपए में)

योजनाएं

2024-25 वास्तविक

2025-26 संअ

2026-27 बअ

% परिवर्तन

वीबी-जी राम जी

-

-

95,692

-

मनरेगा

85,834

88,000

30,000

-66%

पीएमएवाई-जी

32,327

32,500

54,917

69%

एनआरएलएम

14,705

16,000

19,200

20%

पीएमजीएसवाई

17,871

11,000

19,000

73%

एनएसएपी

9,652

9,197

9,671

5%

नोट: 2025-26 के संशोधित बजट से 2026-27 के अनुमानित बजट में प्रतिशत परिवर्तन। स्रोत: केंद्रीय बजट दस्तावेज़ 2026-27; पीआरएस।

मुख्य मुद्दे और विश्लेषण

ग्रामीण रोजगार गारंटी

मनरेगा के लिए आवंटन के रुझान

चूंकि मनरेगा एक मांग आधारित योजना है इसलिए ग्रामीण क्षेत्रों में काम की मांग के अनुसार इसके अंतर्गत व्यय में उतार-चढ़ाव आया है। कोविड-19 महामारी के दौरान लोगों के गांवों में वापस लौटने से काम की मांग बढ़ने के कारण 2020-21 में व्यय में 55% की वृद्धि हुई।[7] 

रेखचित्र 2: मनरेगा के लिए आवंटन (करोड़ रुपए में)

नोट: वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमानों को वास्तविक आंकड़े माना गया है।
स्रोत: अनुदान मांग, ग्रामीण विकास विभाग; पीआरएस।

2026-27 में मनरेगा के लिए आवंटन 30,000 करोड़ रुपए है जो 2025-26 के संशोधित अनुमानों की तुलना में 66% कम है। वीबी-जी राम जी को 2026-27 में 95,692 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।

लागत की संरचना

मनरेगा के तहत, केंद्र सरकार मजदूरी लागत का 100%, सामग्री लागत का 75% और प्रशासनिक लागत का एक हिस्सा वहन करती है।5  राज्य सरकारें शेष 25% सामग्री लागत, प्रशासन लागत का एक हिस्सा और मजदूरी भुगतान में देरी होने पर बेरोजगारी भत्ता/मुआवजा वहन करती हैं। वीबी-जी राम जी एक्ट ने इसमें संशोधन करके यह प्रावधान किया है कि योजना को केंद्र प्रायोजित योजना के रूप में लागू किया जाएगा। केंद्र और राज्य सरकारें व्यय को 60:40 के अनुपात में साझा करेंगी (पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्यों को छोड़कर, जहां अनुपात 90:10 होगा)।4  केंद्र सरकार राज्यवार मानक आवंटन निर्धारित करेगी। इस स्तर से अधिक का कोई भी व्यय पूरी तरह से राज्य सरकार द्वारा वहन किया जाएगा।

पिछले पांच वर्षों में इस योजना के अंतर्गत कुल व्यय का लगभग 70% हिस्सा वेतन भुगतान पर खर्च हुआ।[8]  सामग्री लागत कुल व्यय का 26% थी, जिसमें से लगभग 20% केंद्र सरकार द्वारा वहन किया गया। इस प्रकार, केंद्र सरकार ने योजना पर कुल व्यय का लगभग 90% वहन किया है।8  वीबी-जी राम जी एक्ट के तहत धनराशि बंटवारे के पैटर्न में बदलाव के साथ, राज्य सरकारों द्वारा इस योजना पर किया जाने वाला व्यय बढ़ सकता है।

योजना के तहत प्रदान किए गए रोजगार के दिन

पिछले एक दशक में मनरेगा के तहत रोजगार प्रति परिवार प्रति वर्ष औसतन लगभग 48 दिन रहा है। भाग लेने वाले परिवारों में से 10% से भी कम परिवार 100 दिन का काम पूरा करते हैं।[9] 

रेखाचित्र 3: प्रति परिवार औसतन रोजगार के दिन और 100 दिनों का काम प्राप्त करने वाले परिवार

स्रोत: मनरेगा डैशबोर्ड, 4 फरवरी, 2026; पीआरएस।

कोविड-19 महामारी के कारण 2020-21 में प्रति परिवार औसत रोजगार दिवस बढ़कर 52 दिन हो गया। बाद के वर्षों में रोजगार सृजन में कमी आई और 2024-25 में यह प्रति परिवार 50 दिन दर्ज किया गया। औसतन, 2017-25 के बीच सात करोड़ परिवारों ने काम की मांग की, जिनमें से छह करोड़ परिवारों (90%) को काम मिल सका (रेखाचित्र 4 देखें)।

रेखाचित्र 4: काम की मांग और काम की उपलब्धता (परिवारों की संख्या करोड़ में) 

नोट: 2025-26 दिसंबर 2025 तक के आंकड़े। स्रोत: मनरेगा डैशबोर्ड, 29 दिसंबर, 2025; पीआरएस।

ग्रामीण विकास से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (2024) ने पाया कि यह योजना कोविड-19 महामारी जैसी संकट की स्थितियों में ग्रामीण आबादी को सहायता प्रदान करने में सहायक है।7  आर्थिक सर्वेक्षण (2023-24) में यह पाया गया कि मनरेगा के तहत मांगे गए कार्य को ग्रामीण संकट का वास्तविक संकेतक नहीं माना जा सकता।[10]  सर्वेक्षण के अनुसार, योजना के तहत प्रदान किया गया कार्य अलग-अलग राज्यों की संस्थागत क्षमता से जुड़ा हुआ है। योजना के तहत धनराशि प्राप्त करने के लिए, राज्यों को आगामी वित्तीय वर्ष के लिए अग्रिम बजट बनाना होगा। इसमें ग्राम पंचायत, ब्लॉक और जिला स्तर पर योजना बनाना और बैठकें करना शामिल है। सर्वेक्षण में यह पाया गया कि उच्च संस्थागत क्षमता वाले राज्य कम क्षमता वाले राज्यों की तुलना में योजना को अधिक कुशलता से नियोजित और कार्यान्वित करते हैं।

योजना के तहत मजदूरी

मनरेगा के तहत, ग्रामीण विकास मंत्रालय प्रत्येक वित्तीय वर्ष में विभिन्न राज्यों के मनरेगा मजदूरों के लिए दैनिक मजदूरी दरें अधिसूचित करता है।[11]  पिछले कुछ वर्षों में मजदूरों को भुगतान की गई वास्तविक मजदूरी अक्सर अधिसूचित दर से कम रही है। 2025-26 में (दिसंबर 2025 तक), 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से 20 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मजदूरों को प्राप्त मजदूरी अधिसूचित मजदूरी दर से कम थी।[12]

 

तालिका 3: 2025 में चयनित राज्यों में अधिसूचित दैनिक मजदूरी दर और भुगतान की गई औसत मजदूरी (रुपए में)

राज्य

अधिसूचित मजदूरी दर

चुकाई गई औसत मजदूरी

आंध्र प्रदेश

307

268

छत्तीसगढ़

261

245

गुजरात

288

264

कर्नाटक

370

342

राजस्थान

281

221

तमिलनाडु

336

268

तेलंगाना

307

259

स्रोत: मनरेगा डैशबोर्ड, ग्रामीण विकास मंत्रालय, 4 फरवरी, 2026 को प्राप्त जानकारी के अनुसार; पीआरएस।

मनरेगा के तहत मजदूरी राज्यों में अलग-अलग होती है क्योंकि यह राज्य के खेती मजदूरों के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई-एएल) से जुड़ी होती है।27  सीपीआई-एएल उन परिवारों द्वारा उपभोग की जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में परिवर्तन को ट्रैक करता है जिन्हें अपनी प्राथमिक आय कृषि श्रम से प्राप्त होती है।[13]  ग्रामीण विकास से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (2024) ने पाया कि बढ़ती महंगाई को देखते हुए मनरेगा के तहत मजदूरी अपर्याप्त है।7  कमिटी के अनुसार, मजदूरी दरों की गणना के लिए वर्ष 2009-10 को आधार वर्ष के रूप में उपयोग किया जाता है। उसने सुझाव दिया कि मंत्रालय आधार को संशोधित करने पर विचार करे ताकि मजदूरी में मौजूदा मुद्रास्फीति के रुझानों को ध्यान में रखा जा सके। 2025 में इस योजना की समीक्षा करते हुए स्टैंडिंग कमिटी ने इस सुझाव को दोहराया था।22

वीबी-जी राम जी एक्ट के तहत, केंद्र सरकार मनरेगा के तहत मौजूदा प्रणाली के समान, राज्यों में मजदूरों के लिए मजदूरी दरों को अधिसूचित करेगी।

बेरोजगारी भत्ते का भुगतान

मनरेगा के तहत, अगर किसी व्यक्ति को काम की मांग करने पर 15 दिनों के भीतर काम उपलब्ध नहीं कराया जाता था, तो उसे बेरोजगारी भत्ता दिया जाता था।[14]  राज्य सरकारें बेरोजगारी भत्ते की दर निर्धारित करने और आवश्यक बजटीय प्रावधान करने के लिए जिम्मेदार हैं।14 वीबी-जी राम जी में भी इसी तरह के प्रावधान हैं। हालांकि, 2019-25 के बीच कुल देय बेरोजगारी भत्ते के मुकाबले लगभग 8% का ही भुगतान किया गया था।[15] 

2025-26 में फरवरी 2026 तक देय बेरोजगारी भत्ते का केवल 2% ही भुगतान किया गया था।[16]  2025-26 में जिन 14 राज्यों को भत्ता बकाया था, लेकिन जो कुछ भुगतान हुआ, वह पूरा का पूरा तीन राज्यों, असम, झारखंड और उत्तर प्रदेश में ही किया गया।

तालिका 4: देय बेरोजगारी भत्ता और वास्तव में देय भत्ता (रुपए में)

वर्ष

जितनी राशि अदा की जानी है

जितनी राशि चुकाई गई

भुगतान का प्रतिशत

2019-20

30,30,253

31,106

1%

2020-21

61,40,016

4,62,646

8%

2021-22

1,70,42,459

6,70,454

4%

2022-23

89,92,628

10,49,600

12%

2023-24

21,97,678

3,21,552

15%

2024-25

23,40,635

6,75,490

29%

2025-26

6,44,284

9,965

2%

स्रोत: मनरेगा डैशबोर्ड, ग्रामीण विकास मंत्रालय, 4 फरवरी, 2026 को प्राप्त जानकारी के अनुसार; पीआरएस।

2023-24 के आर्थिक सर्वेक्षण में पाया गया कि राज्यों की संस्थागत क्षमता इस बात पर असर डालती है कि वे मनरेगा के तहत लोगों को काम कितनी जल्दी और सही तरीके से दे पाते हैं।10  अगर राज्यों के पास काम संभालने की सही व्यवस्था नहीं है तो काम की मांग को समय पर दर्ज नहीं किया जा सकता। इससे राज्यों द्वारा दिया जाने वाला बेरोजगारी भत्ता भी प्रभावित होता है। कानूनी प्रावधानों के बावजूद राज्यों ने 2023 में 7.8 लाख रुपए और 2024 में 90,000 रुपए बेरोजगारी भत्ते के रूप में जारी किए।10

ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (2022) ने भत्तों के भुगतान में देरी और अनियमितताओं पर गौर किया।[17]  कमिटी ने नोडल एजेंसी के रूप में विभाग से भत्तों का उचित भुगतान सुनिश्चित करने का आग्रह किया था। मंत्रालय ने कहा था कि वह सर्कुलर, एडवाइजरीज़ जारी करता है और केंद्रीय टीमों के दौरों के माध्यम से राज्यों में नियमित निगरानी करता है।17

सामाजिक ऑडिट्स की अपर्याप्त क्षमता

मनरेगा के अनुसार, ग्राम पंचायत के भीतर योजना के तहत किए गए कार्यों की निगरानी करके जवाबदेही सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी ग्राम सभा की होती है।18  निगरानी सामाजिक ऑडिट के माध्यम से की जाती है। राज्यों को स्वतंत्र सामाजिक ऑडिट यूनिट्स स्थापित करने होते हैं, जो ऑडिट प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए ग्राम सभाओं को रिसोर्स पर्सन उपलब्ध कराती हैं।[18]  ऑडिट के दौरान लाभार्थियों और योजना में किए गए कार्यों से संबंधित सभी रिकॉर्ड्स का सत्यापन किया जाता है। दिसंबर 2025 तक, 2.7 लाख ग्राम पंचायतों में से केवल 63% (1.7 लाख) ने ही 2025-26 में कम से कम एक सामाजिक ऑडिट कराए थे।[19]

रेखाचित्र 5: ऐसी ग्राम पंचायतें जिन्होंने एक वित्तीय वर्ष में कम से कम एक बार सामाजिक ऑडिट पूरे किए

नोट: 2025-26 के आंकड़े दिसंबर 2025 तक के हैं। स्रोत: सामाजिक ऑडिट कैलेंडर बनाम पूर्ण ऑडिट, मनरेगा डैशबोर्ड, एमओआरडी (15 जनवरी 2026 को प्राप्त जानकारी के अनुसार); पीआरएस।

पंचायती राज मंत्रालय की हस्तांतरण सूचकांक रिपोर्ट (2024) में यह बताया गया है कि अधिकांश राज्यों में पंचायत कार्यालयों में स्वीकृत संख्या से कम कर्मचारी हैं।[20]  रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है कि एक पंचायत सचिव औसतन एक राज्य में 17 ग्राम पंचायतों का प्रबंधन करता है। इस प्रकार की क्षमता संबंधी समस्याओं के कारण ग्राम पंचायतें सामाजिक ऑडिट जैसे नियमित कार्य करने में असमर्थ रहती हैं।20

प्रधानमंत्री आवास योजना (जी)

2016 में पीएमएवाई (जी) को शुरू किया जिसमें इंदिरा आवास योजना को शामिल किया गया था। इसका उद्देश्य ग्रामीण आवास की मांग और आपूर्ति के बीच के अंतर को दूर करना था। इसका उद्देश्य 2022 तक सभी के लिए आवास सुनिश्चित करना था। सामाजिक-आर्थिक और जाति जनगणना (एसईसीसी), 2011 के आधार पर, ग्रामीण क्षेत्रों में आवास की कमी 4.03 करोड़ होने का अनुमान लगाया गया था।[21]  इस योजना का लक्ष्य प्रथम चरण (2016-19) में एक करोड़ घर और द्वितीय चरण (2019-22) में 1.95 करोड़ घर बनाना था।21 इन 2.95 करोड़ घरों में से लगभग दो करोड़ परिवारों का चयन एसईसीसी आधारित स्थायी प्रतीक्षा सूची से किया गया था और शेष का चयन 2018 के आवास+ सर्वेक्षण के आधार पर किया गया था।[22]  आवास+ सर्वेक्षण को 2011 के एसईसीसी सर्वेक्षण में छूट गए पात्र परिवारों की पहचान करने के लिए आयोजित किया गया था।[23]

2022 तक दोनों चरणों के तहत कुल 2.10 करोड़ घरों का निर्माण पूरा हो चुका था।24 लक्ष्यों को पूरा करने के लिए कार्यक्रम को मार्च 2024 तक बढ़ा दिया गया था।[24]  अगस्त 2024 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने योजना को 2028-29 तक बढ़ाने की मंजूरी दी।[25]  इन लक्ष्यों का उद्देश्य (i) पिछले चरणों से लंबित घरों को पूरा करना और (ii) अतिरिक्त दो करोड़ ग्रामीण घरों का निर्माण करना था।

2026-27 के लिए इस योजना के लिए 54,917 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं, जो 2025-26 के संशोधित अनुमानों से 69% अधिक है। 2025-26 में 32,500 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं, जो बजट अनुमान से 41% कम है। कुछ वर्षों में जरूरत से ज्यादा खर्च करने के बाद अब 2023-24 से इस योजना में तय बजट से कम पैसा इस्तेमाल हो रहा है।

रेखाचित्र 6: पीएमएवाई (जी) के लिए आवंटित धनराशि (करोड़ रुपए में)

नोट: वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमानों को वास्तविक आंकड़े माना गया है।

स्रोत: अनुदान मांग, ग्रामीण विकास विभाग; पीआरएस।  

घर के निर्माण में देरी

सभी चरणों के लिए निर्धारित 4.15 करोड़ घरों के संचयी लक्ष्य के मुकाबले, दिसंबर 2025 तक कुल 2.89 करोड़ (70%) घर पूरे हो चुके हैं।[26]  (पिछले तीन वर्षों के लक्ष्यों के मुकाबले पूरे हुए घरों की संख्या के लिए परिशिष्ट में तालिका 15 देखें)।

तालिका 5: योजना के अंतर्गत वर्ष-दर-वर्ष पूर्ण किए गए घरों की संख्या (लाख में)

 

वर्ष

लक्ष्य

पूर्ण

पूर्णता की दर

चरण I

2016-17

42

0.02

0.05%

2017-18

32

38

121%

2018-19

25

45

179%

चरण II

2019-20

56

21

38%

2020-21

42

34

82%

2021-22

67

42

64%

2022-23

23

57

244%

2023-24

9

21

239%

विस्तारित लक्ष्य

2024-25

84

13

16%

2025-26

35

22

63%

नोट: एक वर्ष में पूर्ण हुए मकानों की गिनती में वे सभी घर आते हैं जो पूरे हो चुके हैं, चाहे उन्हें किसी भी वर्ष मंजूरी मिली हो। स्रोत: पीएमएवाई (जी) डैशबोर्ड, 4 फरवरी, 2026 को प्राप्त जानकारी के अनुसार; पीआरएस।

मंत्रालय ने परियोजना के पूरा होने में देरी के कई कारण बताए हैं, जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) कोविड-19 के कारण लगाए गए प्रतिबंध, (ii) लाभार्थियों की अनिच्छा, (iii) भूमिहीन लाभार्थियों को भूमि आवंटन में देरी, (iv) विवादित उत्तराधिकार, और (v) स्थायी पलायन।22 इस योजना के तहत, अगर किसी लाभार्थी के पास घर बनाने के लिए भूमि नहीं है, तो भूमि उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी संबंधित राज्य सरकार की है। ग्रामीण विकास और पंचायती राज से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (2023) ने सुझाव दिया था कि मंत्रालय इन लाभार्थियों के लिए भूमि सुनिश्चित करने और बहुमंजिला आवास जैसे समाधान तलाशने के लिए राज्य सरकारों के साथ समन्वय करे।[27] असम, बिहार, महाराष्ट्र और ओड़िशा में ऐसी योजनाएं हैं जो भूमिहीन लाभार्थियों को भूमि के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती हैं।22

दिसंबर 2025 तक इस योजना के तहत एक घर के निर्माण में औसतन 297 दिन लगे। अधिकांश घर (77%) एक वर्ष के भीतर पूरे हो गए।[28]  12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मुख्य रूप से पूर्वोत्तर और पहाड़ी राज्यों में औसत निर्माण समय एक वर्ष से अधिक था (राज्यवार निर्माण में लगने वाले औसत दिनों के लिए परिशिष्ट में तालिका 16 देखें)।

रेखाचित्र 7: पीएमएवाई जी के अंतर्गत घरों के निर्माण का औसत समय

स्रोत: पीएमएवाई-जी डैशबोर्ड (4 फरवरी, 2026 को प्राप्त जानकारी), ग्रामीण विकास मंत्रालय; पीआरएस

वित्तीय सहायता एवं कार्यान्वयन

इस योजना के तहत, मैदानी इलाकों में रहने वाले लाभार्थियों को प्रति यूनिट 1.2 लाख रुपए और पहाड़ी इलाकों में रहने वालों को 1.3 लाख रुपए की सहायता राशि मिलती है।27 यह राशि तीन से चार किस्तों में हस्तांतरित की जाती है, जो घर के निर्माण के विभिन्न चरणों से जुड़ी होती हैं। अगर कोई लाभार्थी योजना के तहत दी गई राशि से अधिक खर्च करना चाहता है, तो वह वित्तीय संस्थानों से 3% की ब्याज सबसिडी के साथ 70,000 रुपए तक का गृह ऋण प्राप्त कर सकता है।21

ग्रामीण विकास और पंचायती राज से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (2025) ने सुझाव दिया था कि बढ़ती निर्माण लागत और मुद्रास्फीति के दबाव को देखते हुए, योजना के तहत प्रदान की जाने वाली वित्तीय सहायता को चार लाख रुपए तक बढ़ाया जाना चाहिए।22  उसने कहा था कि सहायता बढ़ाने से लाभार्थियों को ऐसे अच्छे घर बनाने में मदद मिलेगी जो टिकाऊ और सुरक्षित हों।

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना

सरकार ने पात्र ग्रामीण बस्तियों को बारहमासी सड़क संपर्क प्रदान करने के लिए वर्ष 2000 में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) शुरू की थी।[29] 2026-27 में इसके लिए 19,000 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं जो 2025-26 के संशोधित अनुमानों से 73% अधिक है।

रेखाचित्र 8: पीएमजीएसवाई के तहत आवंटित और उपयोग की गई धनराशि (करोड़ रुपए में)

नोट: वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमानों को वास्तविक आंकड़े माना गया है।

स्रोत: ग्रामीण विकास विभाग की अनुदान मांग; पीआरएस।

तालिका 6: पीएमजीएसवाई के विभिन्न चरणों के अंतर्गत स्वीकृत और पूर्ण की गई सड़कों की लंबाई (किमी में)

वर्टिकल

मंजूर

पूर्ण

पूर्णता की दर

पीएमजीएसवाई I

6,44,735

6,25,097

97%

पीएमजीएसवाई II

49,795

49,086

99%

पीएमजीएसवाई III

1,22,388

1,02,444

84%

आरसीपीएलडब्ल्यूईए

12,212

9,892

81%

जनमन

7,316

1,176

16%

कुल

8,36,446

7,87,695

94%

स्रोत: पीएमएवाई-जी डैशबोर्ड (28 दिसंबर, 2025 को प्राप्त जानकारी), ग्रामीण विकास मंत्रालय; पीआरएस।

पीएमजीएसवाई में छह वर्टिकल हैं।[30],[31] पहले वर्टिकल का लक्ष्य मैदानी इलाकों में 500 से अधिक आबादी वाले और पूर्वोत्तर और पहाड़ी क्षेत्रों में 250 से अधिक आबादी वाली बस्तियों को सड़क संपर्क प्रदान करना है। दूसरे वर्टिकल का लक्ष्य प्रमुख संपर्क मार्गों के रूप में कार्य करने वाले 50,000 किलोमीटर मार्गों को अपग्रेड करना है। तीसरा वर्टिकल, जिसे 2019 में शुरू किया गया था, का लक्ष्य बाजारों और शहर केंद्रों को जोड़ने वाली 1.2 लाख किलोमीटर सड़कों को सुदृढ़ करना है।30  वामपंथी अतिवाद से प्रभावित क्षेत्रों के लिए सड़क संपर्क परियोजना (आरसीपीएलडब्ल्यूईए) को 2016 में एक अलग वर्टिकल के रूप में शुरू किया गया था और इसे मार्च 2023 तक कार्यान्वित किया जाना था।[32]  मंत्रालय पीएम-जनमन के तहत विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों द्वारा बसे क्षेत्रों में सड़क निर्माण कार्य भी करता है।[33]  सितंबर 2024 में सरकार ने 62,500 किलोमीटर सड़कों के निर्माण के उद्देश्य से पीएमजीएसवाई-IV शुरू किया।[34]  इसे 2024-25 और 2028-29 के बीच लागू किया जाएगा और इसके तहत 25,000 बस्तियों को जोड़ा जाएगा। मंत्रालय के अनुसार, पीएमजीएसवाई-IV के तहत किए गए सर्वेक्षणों में दिसंबर 2025 तक 40,547 ऐसी बस्तियों को चिन्हित किया गया है जो अभी तक इंटरनेट से कनेक्टेड नहीं हैं।[35]

सड़क निर्माण की गति

दिसंबर 2025 तक योजना के तहत स्वीकृत 8.3 लाख किलोमीटर सड़कों में से 94% सड़कें पूरी हो चुकी हैं।[36] वामपंथी अतिवाद से प्रभावित क्षेत्रों और आदिवासी क्षेत्रों में सड़क निर्माण करने वाले विभागों के लिए निर्माण कार्य की गति धीमी रही है। विभाग ने लक्ष्यों को प्राप्त करने में देरी के कई कारण बताए हैं, जैसे: (i) वामपंथी अतिवाद से प्रभावित क्षेत्रों में दुष्कर भूभाग और कानून-व्यवस्था की समस्याएं, (ii) भूमि अधिग्रहण और लॉजिस्टिक प्रबंधन तथा इनपुट आपूर्ति से संबंधित चुनौतियां, और (iii) ठेकेदारों के कारण हुई देरी।[37]  ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (2025) ने विभाग से आग्रह किया था कि वह राज्यों के साथ समन्वय करे और समय-समय पर अनुवर्ती कार्रवाई के माध्यम से शेष परियोजनाओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करे।22  कमिटी ने यह भी सुझाव दिया था कि पीएमजीएसवाई-IV के तहत किए गए सड़क सर्वेक्षण में नवीनतम जनसंख्या आंकड़ों को ध्यान में रखा जाना चाहिए, क्योंकि पिछली जनगणना के बाद से बस्तियों के फैलाव या बसाहट के पैटर्न में बदलाव आया है।

निगरानी और रखरखाव

इस योजना के तहत, ग्रामीण सड़कों का निर्माण करने वाले ठेकेदार निर्माण कार्य पूरा होने के बाद पांच साल की दोष दायित्व अवधि (डीएलपी) के दौरान रखरखाव के लिए जिम्मेदार होते हैं।[38] इस अवधि के बाद सड़क रखरखाव की जिम्मेदारी राज्य सरकारों की होती है। मंत्रालय तीन स्तरीय गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली का उपयोग करते हुए, निर्माण कार्य के दौरान और पूरा होने के बाद निरीक्षण के माध्यम से सड़कों की गुणवत्ता की निगरानी करता है।[39] जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच राष्ट्रीय गुणवत्ता निरीक्षकों (एनक्यूएम) द्वारा रखरखाव कार्य के लिए निरीक्षण की गई 24% सड़कें असंतोषजनक पाई गईं।[40] इसी अवधि के दौरान, राज्य गुणवत्ता निरीक्षकों (एसक्यूएम) द्वारा रखरखाव के लिए निरीक्षण की गई 16% सड़कें असंतोषजनक पाई गईं।[41]

तालिका 7: निरीक्षणों के दौरान योजना के अंतर्गत किए गए कार्य असंतोषजनक पाए गए

स्तर

काम की स्थिति

निरीक्षण

असंतोषजनक

%

एनक्यूएम

पूर्ण

880

199

23%

जारी

984

91

9%

रखरखाव

2,017

480

24%

एसक्यूएम

पूर्ण

3,818

120

3%

जारी

7,634

207

3%

रखरखाव

14,168

2,285

16%

नोट: जनवरी से दिसंबर 2025 के बीच की अवधि के आंकड़े।

स्रोत: पीएमजीएसवाई डैशबोर्ड (28 दिसंबर 2025 को प्राप्त जानकारी); पीआरएस।

15वें वित्त आयोग ने सड़कों के रखरखाव में अंतरराज्यीय विषमताओं पर गौर किया था।[42] उसने मंत्रालय को अंतरराज्यीय अंतरों को दूर का सुझाव दिया था और कहा था कि राज्यों को एक-दूसरे से सीखना चाहिए। उसके सुझावों में से एक यह था कि राज्यों को सड़कों के रखरखाव के लिए धनराशि उपलब्ध कराई जाए। ग्रामीण विकास और पंचायती राज से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (2023) ने इस सुझाव को दोहराया था।27  वर्तमान में सड़क रखरखाव कार्य के लिए बजट बनाने की जिम्मेदारी राज्यों की है। पीएमजीएसवाई-III के तहत, किसी राज्य में योजना शुरू करने से पहले, राज्य को कार्यक्रम दिशानिर्देशों के अनुसार मंत्रालय के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर करना होता है।[43] इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राज्य निर्माण के बाद 10 वर्षों के नियमित रखरखाव के लिए धनराशि मुहैय्या कराए, जिसमें जरूरत होने पर सड़कों के नवीनीकरण के लिए भी धनराशि उपलब्ध हो।

तालिका 8: सड़क रखरखाव में सुधार के लिए विभिन्न राज्यों द्वारा अपनाए गए मॉडल

राज्य

अपनाए गए मॉडल

छत्तीसगढ़, राजस्थान

क्षेत्रीय रखरखाव अनुबंध ठेकेदारों के साथ हस्ताक्षरित किए जाते हैं।

उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड

स्वयं सहायता समूहों को सड़क रखरखाव की जिम्मेदारी सौंपी गई।

मध्य प्रदेश, पंजाब, राजस्थान

सड़कों के रखरखाव के लिए मंडी उपकर का उपयोग किया जाता है

स्रोत: 15वीं वित्त आयोग रिपोर्ट, खंड III; पीआरएस।

राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन

दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (डीएवाई-एनआरएलएम) का उद्देश्य गरीब परिवारों को वित्तीय सहायता और रोजगार के अवसर प्रदान करके ग्रामीण क्षेत्रों में गरीबी कम करना है।[44] यह योजना स्वयं सहायता समूहों (एसएचजीज़) के माध्यम से परिवारों को संगठित करने और ऋण एवं वित्तीय सेवाओं तक उनकी पहुंच बढ़ाने का प्रयास करती है। सामुदायिक संसाधनों को मजबूत करने के लिए, सरकार एकमुश्त (i) प्रति एसएचजी 20,000 रुपए से 30,000 रुपए का रिवॉल्विंग फंड और (ii) एसएचजी संघों के माध्यम से 2.5 लाख रुपए तक का सामुदायिक निवेश कोष प्रदान करती है।[45]  एसएचजी-बैंक लिंकिंग कार्यक्रम के तहत, यह ब्याज सबसिडी के माध्यम से एसएचजीज़ के लिए ऋण सुविधा को सुगम बनाती है। 

2026-27 में इस योजना के लिए 19,200 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं, जो 2025-26 के संशोधित अनुमान से 20% अधिक है।

रेखाचित्र 9: एनआरएलएम के अंतर्गत बजट का उपयोग (करोड़ रुपए में)

नोट: वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमानों को वास्तविक आंकड़े माना गया है।

स्रोत: ग्रामीण विकास विभाग की अनुदान मांग; पीआरएस।

दिसंबर 2025 तक इस कार्यक्रम के तहत कुल मिलाकर 92 लाख स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) को बढ़ावा दिया जा चुका था, जिसमें 10 करोड़ से अधिक परिवारों ने भाग लिया था।[46] दिसंबर 2025 तक वित्तीय वर्ष 2025-26 में लगभग 44 लाख स्वयं सहायता समूहों ने इस योजना के तहत ऋण का लाभ उठाया था, और उन्हें कुल 1,20,678 करोड़ रुपए दिए गए थे।[47]

एसएचजी के लिए ऋण तक पहुंच

नाबार्ड ने भारत में सूक्ष्म वित्त की स्थिति पर एक रिपोर्ट (2023-24) तैयार की थी। उसमें पाया गया कि देश के दक्षिणी और पूर्वोत्तर क्षेत्रों में अन्य क्षेत्रों की तुलना में स्वयं सहायता समूहों को अधिक ऋण वितरित किया जाता है।[48] रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि छोटे ऋणों से जुड़ी उच्च परिचालन लागत और स्वयं सहायता समूहों को उच्च जोखिम वाले उधारकर्ताओं के रूप में देखने (ऋण उपयोग संबंधी चिंताओं के कारण) के कारण वित्तीय संस्थान ऋण देने से हिचक सकते हैं। रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि सदस्यों में पर्याप्त वित्तीय साक्षरता और व्यावसायिक समझ की कमी उन्हें अधिक ऋण प्राप्त करने से रोक सकती है।48  मंत्रालय ने कहा है कि वह बैंक अधिकारियों को जागरूक करने के लिए पहल करता है और स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों को प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण कार्यक्रमों के माध्यम से वित्तीय साक्षरता प्रदान करता है।51  2022 में मंत्रालय ने कहा था कि एसएचजी की ऋण चुकौती दर लगभग 98% है।[49] नाबार्ड की रिपोर्ट में पाया गया कि एसएचजी के बकाया ऋणों में गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों का हिस्सा 2021-22 में 4% से घटकर 2023-24 में 2% हो गया।48 उसने कहा कि यह प्रवृत्ति बैंकों द्वारा परिसंपत्ति की गुणवत्ता में सुधार करने और ऋण की अदायगी सुनिश्चित करने के प्रयासों को दर्शाती है।48  एनआरएलएम के तहत, बेहतर संस्थागत और वित्तीय प्रबंधन के लिए एसएचजी को ग्राम संगठनों और क्लस्टर स्तर के संघों में भी संगठित किया जाता है।[50]    

2019 में मंत्रालय के तहत एक मूल्यांकन अध्ययन से पता चला कि: (i) स्वयं सहायता समूहों द्वारा लिए गए ऋणों का 44% कृषि गतिविधियों में उपयोग किया जाता है, (ii) ऋणों का 25% गाय, भैंस, बकरी और अन्य पशुधन संबंधी गतिविधियों की खरीद में उपयोग किया जाता है, और (iii) ऋणों का 31% हिस्सा, उपभोग, स्वास्थ्य और आवास के लिए उपयोग किया जाता है।[51]  अध्ययन में यह भी पाया गया कि स्वयं सहायता समूहों से जुड़ने के कारण घरेलू आय, बचत और महिलाओं की श्रम शक्ति में भागीदारी पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।51

दीन दयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना

एनआरएलएम के तहत दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। इसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में गरीब परिवारों के युवाओं को रोजगार से जुड़ा कौशल प्रशिक्षण प्रदान करना है। कार्यक्रम के तहत बनाए गए 2,369 प्रशिक्षण केंद्रों में से मार्च 2025 तक 629 (26%) कार्यरत थे।22  वर्ष 2016 से अगस्त 2025 के बीच, कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षित 14.7 लाख लोगों में से 10.2 लाख (69%) को रोजगार मिल चुका था।[52] योजना के दिशानिर्देशों के अनुसार, प्रशिक्षित उम्मीदवारों में से कम से कम 70% को रोजगार मिलना चाहिए।[53]

रेखाचित्र 10: अगस्त 2025 तक योजना के तहत प्रशिक्षित और नियुक्त किए गए व्यक्तियों की संख्या (हजारों में)

नोट: वर्ष 2020 और 2021 में महामारी के कारण प्रशिक्षण केंद्र बंद रहे। 2025-26 के आंकड़े अगस्त 2025 तक के हैं।

स्रोत: स्टैंडिंग कमिटी की रिपोर्ट (2025), लोकसभा प्रश्न; पीआरएस।

अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन ने रोजगार पर एक रिपोर्ट (2020) में पाया कि स्कूली शिक्षा की खराब गुणवत्ता के कारण, कई प्रशिक्षु कम बुनियादी कौशल के साथ कौशल केंद्रों में प्रवेश करते हैं।[54]  रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि प्रशिक्षण प्रदाताओं के पास अक्सर नवीनतम उपकरण और प्रशिक्षण विधियों की कमी होती है।54 इस योजना के तहत, प्रशिक्षण अवधि के दौरान वित्तीय सहायता के अलावा, सरकार प्रशिक्षुओं को माइग्रेशन सेंटर और पुराने विद्यार्थियों (एल्यूमनाई) के नेटवर्क के जरिए भी मदद देती है ताकि वे अपनी नौकरी जारी रख सकें।[55]

ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान

इस कार्यक्रम के तहत, मंत्रालय का उद्देश्य देश के सभी जिलों में ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरएसईटीआई) स्थापित करना है ताकि ग्रामीण युवाओं को स्वरोजगार और उद्यमिता के लिए प्रशिक्षण प्रदान किया जा सके।[56]  ये संस्थान संबंधित जिलों में सार्वजनिक क्षेत्र, सहकारी समितियों और निजी क्षेत्र के बैंकों के सहयोग से स्थापित किए जाते हैं। दिसंबर 2025 तक देश के 612 जिलों में 625 आरएसईटीआई कार्यरत थे।[57] मंत्रालय के अनुसार, 2020 और 2025 (अक्टूबर) के बीच, कार्यक्रम के तहत कुल 23.6 लाख उम्मीदवारों को प्रशिक्षित किया गया है।57 उनमें से 74% (17.5 लाख) स्वरोजगार कर रहे थे और लगभग 2% (34,798) को वेतन वाली नौकरी मिली।57

रेखाचित्र 11: आरएसईटीआई में प्रशिक्षित और स्वरोजगार प्राप्त युवा (हजारों में)

 

नोट: आंकड़े दिसंबर 2025 तक। स्रोत: अतारांकित प्रश्न संख्या 2,367, राज्यसभा, 19 दिसंबर, 2025; पीआरएस।

मंत्रालय द्वारा आरएसईटीआई पर एक प्रभाव मूल्यांकन अध्ययन में पाया गया कि अधिकांश उम्मीदवार अपने स्वयं के उद्यम स्थापित करने के लिए दाखिला लेते हैं और उनमें से लगभग 80% महिलाएं हैं।[58]  अध्ययन में सुझाव दिया गया कि इन संस्थानों में स्थायी परिसर और अनिवार्य सुविधाएं होनी चाहिए।58 उसने यह सुझाव भी दिया कि संस्थान महिलाओं के लिए अधिक प्रासंगिक पाठ्यक्रम प्रदान करें, प्रशिक्षकों के लिए प्रशिक्षण अनिवार्य करें और प्रशिक्षित उम्मीदवारों को ऋण प्राप्त करने में सहायता प्रदान करें।58 मंत्रालय ने आरएसईटीआई के लिए अवसंरचना अनुदान को एक करोड़ रुपए से बढ़ाकर दो करोड़ रुपए कर दिया है।57 उसने फैकेल्टी के लिए रिफ्रेशर प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किए हैं और प्रशिक्षित उम्मीदवारों में से 50% को ऋण सुविधा प्रदान की है।57

राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम

तालिका 9: एनएसएपी के तहत धनराशि आवंटन (करोड़ रुपए में)

योजना

आवंटन

वृद्धावस्था पेंशन योजना

6,905

राष्ट्रीय परिवार लाभ योजना

400

विधवा पेंशन योजना

2,027

विकलांगता पेंशन योजना

290

अन्नपूर्णा योजना

10

स्रोत: ग्रामीण विकास विभाग की अनुदान संबंधी मांग 2026-27; पीआरएस।

राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (एनजीओएपी) की शुरुआत 1995 में जरूरतमंद, वृद्ध, बीमार या विकलांग नागरिकों को सहायता प्रदान करने के लिए की गई थी।[59] इसमें पांच उप-योजनाएं शामिल हैं: (i) इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना (आईजीएनओएपी), (ii) इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना (आईजीएनडब्ल्यूपीएस), (iii) इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विकलांगता पेंशन योजना (आईजीएनडीपीएस), (iv) राष्ट्रीय परिवार लाभ योजना और (v) अन्नपूर्णा योजना। यह योजना ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में लागू है और राज्यों द्वारा कार्यान्वित की जाती है।

इस योजना के लिए 2026-27 में 9,671 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं, जो पिछले वित्तीय वर्ष के संशोधित आवंटन से 5% अधिक है। एनएसएपी के अंतर्गत योजनाओं के लिए धनराशि आवंटन इस प्रकार है (तालिका 9 देखें)।

तालिका 10: एनएसएपी के तहत धनराशि उपयोग (करोड़ रुपए में)

वर्ष

बजट अनुमान

वास्तविक

% उपयोगिता

2015-16

9,074

8,616

95%

2016-17

9,500

8,854

93%

2017-18

9,500

8,694

92%

2018-19

9,975

8,418

84%

2019-20

9,200

8,692

94%

2020-21

9,197

42,443

461%

2021-22

9,200

8,152

89%

2022-23

9,652

9,651

100%

2023-24

9,636

9,476

98%

2024-25

9,652

6,844

71%

2025-26

9,652

6,460

67%

नोट: वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमानों को वास्तविक आंकड़े माना गया है।

स्रोत: ग्रामीण विकास विभाग की अनुदान मांग; पीआरएस।

आईएनजीओएपी योजना के तहत, गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले वरिष्ठ नागरिकों को 79 वर्ष की आयु तक 200 रुपए और उसके बाद 500 रुपए की मासिक पेंशन मिलती है। बढ़ती महंगाई को देखते हुए सांसदों ने इस योजना के तहत मिलने वाली मासिक सहायता राशि बढ़ाने का मुद्दा उठाया है।[60]  सहायता राशि बढ़ाने के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने केंद्र द्वारा दी जाने वाली राशि में अपने संसाधनों से अतिरिक्त राशि जोड़ी है।[61]  यह राशि 50 रुपए से लेकर 3,200 रुपए तक है।

15वें वित्त आयोग ने सुझाव दिया कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर एक ऐसी न्यूनतम राशि तय करें जो  हर साल देश के प्रत्येक व्यक्ति की सामाजिक सुरक्षा पर अनिवार्य रूप से खर्च की जानी चाहिए। इससे पूरे देश में एक समान मानक लागू हो सकेगा। आयोग ने राज्यों से यह आग्रह भी किया कि वे लाभार्थियों की सूची को सत्यापित और अपडेट करने के लिए वार्षिक ऑडिट करे।[62]

योजना की समीक्षा करते हुए एक पब्लिक एकाउंट्स कमिटी (2025) ने योजना के अंतर्गत लाभार्थियों का कवरेज कम होने की बात कही थी।[63]  उसने मंत्रालय को सुझाव दिया था कि लाभार्थी आवंटन में विसंगतियों को दूर करे।63  मंत्रालय का यह कहना है कि लाभार्थियों को चिन्हित करना और उनकी सूची को अपडेट करने की जिम्मेदारी राज्य की है। कमिटी ने आगे मंत्रालय को यह सुझाव भी दिया कि वह इस योजना के तहत एक स्वतंत्र मूल्यांकन कराएं जिसमें लाभार्थियों के शामिल किए जाने और बाहर रह जाने की प्रक्रिया पर विशेष ध्यान दिया जाए।63

2023 में कैग द्वारा योजना के ऑडिट में कई राज्यों में धनराशि के वितरण में विलंब पाया गया।[64] राज्य के खजाने से कार्यान्वयन एजेंसियों को धनराशि हस्तांतरण में देरी के कारण लाभार्थियों को मासिक पेंशन का भुगतान नहीं हो सका। हालांकि एनएसएपी मासिक भुगतान वाली पेंशन योजना है, लेकिन चार राज्य त्रैमासिक आधार पर, दो राज्य वार्षिक आधार पर और 17 राज्य अनियमित आधार पर पेंशन का वितरण कर रहे थे।

तालिका 11: राज्य कोष से कार्यान्वयन विभाग को धनराशि हस्तांतरण में देरी

राज्य/यूटी

विलंब की अवधि

अरुणाचल प्रदेश

251 से 265 दिन

तमिलनाडु

117 से 287 दिन

महाराष्ट्र

39 से 189 दिन

सिक्किम

60 से 990 दिन

पंजाब

36 से 139 दिन

स्रोत: रिपोर्ट संख्या 10 वर्ष 2023, कैग; पीआरएस।

भूमि संसाधन विभाग

भूमि संसाधन विभाग का उद्देश्य वर्षा आधारित और निम्नीकृत भूमि का स्थायी विकास सुनिश्चित करना और एक आधुनिक भूमि रिकॉर्ड प्रबंधन प्रणाली को लागू करना है।[65]

वित्तीय स्थिति

तालिका 12: भूमि संसाधन विभाग को बजटीय आवंटन (करोड़ रुपए में)

मद

24-25

25-26

संअ

26-27 बअ

% परिवर्तन

पीएमकेएसवाई-डब्ल्यूडीसी

2,491

1,500

2,500

67%

डीआईएलआरएमपी

137

230

125

-46%

सचिवालय

25

28

29

4%

कुल

2,653

1,758

2,654

51%

नोट: बअ बजट अनुमान है, संअ संशोधित अनुमान है; % परिवर्तन 2026-27 के बअ में 2025-26 के संअ की तुलना में प्रतिशत वृद्धि को दर्शाता है; पीएमकेएसवाई-डब्ल्यूडीसी प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना– वॉटरशेड विकास घटक के लिए और डीआईएलआरएमपी डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम के लिए है।
स्रोत: भूमि संसाधन विभाग की अनुदान मांग, 2026-27; पीआरएस।
 

2026-27 में विभाग को 2,654 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं, जो पिछले वर्ष के संशोधित अनुमान से 67% अधिक है। 2013-14 से विभाग का वास्तविक व्यय लगातार बजट अनुमान से कम रहा है।

रेखाचित्र 12: भूमि संसाधन विभाग द्वारा बजटीय आवंटन का उपयोग (करोड़ रुपए में)

नोट: वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमानों को वास्तविक आंकड़े माना गया है।

स्रोत: भूमि संसाधन विभाग की अनुदान मांग; पीआरएस।

विभाग के अंतर्गत प्रमुख योजनाएं

विभाग दो प्रमुख योजनाओं को लागू करता है: प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना - वॉटरशेड विकास घटक (पीएमकेएसवाई-डब्ल्यूडीसी) और डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम (डीआईएलआरएमपी)। भूमि रिकॉर्ड्स के प्रबंधन को आधुनिक बनाने के लिए राष्ट्रीय भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम को 2016 में डीआईएलआरएमपी के रूप में संशोधित किया गया था।[66]  इस योजना का उद्देश्य जमीन के रिकॉर्ड्स के बारे में व्यापक जानकारी उपलब्ध कराना है, जिससे (i) भूमि संसाधनों का अधिकतम उपयोग, (ii) भूमि विवादों की संख्या में कमी और (iii) भू-राजस्व को कुशलता से जमा करना सुनिश्चित होगा। वर्षा आधारित और निम्नीकृत भूमि की उत्पादक क्षमता में सुधार लाने के लिए पीएमकेएसवाई-डब्ल्यूडीसी योजना लागू की जा रही है।[67] वर्ष 2025-26 में पीएमकेएसवाई-डब्ल्यूडीसी के अंतर्गत विभाग के कुल आवंटन का 94% हिस्सा है।

मुख्य मुद्दे और विश्लेषण

व्यय न होने वाली राशि

ग्रामीण विकास और पंचायती राज से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (2025) ने विभाग के कुल बजट आवंटन में वर्ष दर वर्ष कमी देखी।[68] लाभार्थियों को अधिक लाभ पहुंचाने और उनकी पहुंच बढ़ाने के लिए कमिटी ने मंत्रालय से विभाग के बजट में वृद्धि करने का आग्रह किया।

प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना - वॉटरशेड विकास घटक

पीएमकेएसवाई-डब्ल्यूडीसी पर व्यय 2026-27 में 2,500 करोड़ रुपए होने का अनुमान है, जो 2025-26 के संशोधित अनुमान से 67% अधिक है। 2015-16 से इस योजना के लिए आवंटन में 5% की वार्षिक दर (सीएजीआर) से वृद्धि हुई है। वहीं दूसरी ओर योजना के तहत धनराशि का उपयोग कम रहा है, कुछ वर्षों में तो यह 50% से भी नीचे रहा है। 2025-26 में, संशोधित अनुमान बजट अनुमान का 40% है।

रेखाचित्र 13: पीएमकेएसवाई– डब्ल्यूडीसी के अंतर्गत बजटीय आवंटन और धनराशि उपयोग (करोड़ रुपए में)

नोट: वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमानों को वास्तविक आंकड़े माना गया है।
स्रोत: भूमि संसाधन विभाग की अनुदान मांग; पीआरएस।

पीएमकेएसवाई-डब्ल्यूडीसी के अंतर्गत अपूर्ण परियोजनाएं

तालिका 13: वित्त वर्ष 2024-25 के लिए पीएमकेएसवाई-डब्ल्यूडीसी के अंतर्गत विभिन्न घटकों के लक्ष्य और उपलब्धि

गतिविधियां (इकाई)

लक्ष्य

उपलब्धि

% उपलब्धि

वनरोपण और कृषि के अंतर्गत लाया गया क्षेत्रफल (हेक्टेयर)

17,157

8,907

52%

बागवानी के अंतर्गत लाया गया क्षेत्रफल (हेक्टेयर)

29,023

11,186

39%

मृदा एवं नमी संरक्षण के अंतर्गत आने वाला क्षेत्रफल (हेक्टेयर)

1,41,429

56,871

40%

जल संचयन संरचनाओं का नया निर्माण (संख्या)

56,915

22,808

40%

जल संचयन संरचनाओं का नवीनीकरण (संख्या)

13,039

1,466

11%

स्रोत: पीएमकेएसवाई-डब्ल्यूडीसी 2.0 एमआईएस, 28 जनवरी, 2026 को प्राप्त जानकारी; पीआरएस।

पीएमकेएसवाई-डब्ल्यूडीसी को दो चरणों में लागू किया जा रहा है। पीएमकेएसवाई-डब्ल्यूडीसी 1.0 को 2009-10 से 2014-15 तक लागू किया गया था। पीएमकेएसवाई-डब्ल्यूडीसी 2.0 को 2021-22 में शुरू किया गया था और इसके 2025-26 तक जारी रहने की उम्मीद थी। डब्ल्यूडीसी में कई घटक शामिल हैं जिनका उद्देश्य निम्नीकृत भूमि के उपयोग में सुधार करना है। इनमें वनीकरण, बागवानी और जल संचयन संरचनाओं का निर्माण शामिल है। इन सभी क्षेत्रों में कार्य की गति और लक्ष्यों की प्राप्ति में भिन्नता पाई जाती है (तालिका 13 देखें)।[69]

डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम

डीआईएलआरएमपी के लिए 2026-27 में 125 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं, जो पिछले वर्ष के संशोधित अनुमानों से 46% कम है। 2017-18 से 2019-20 के बीच तीन वर्षों को छोड़कर, योजना के तहत धनराशि का उपयोग 90% से अधिक रहा है।

जमीन के रिकॉर्ड्स से संबंधित डेटा टेक्स्ट और स्पेशियल डेटा के रूप में उपलब्ध है।71  टेक्स्ट डेटा में अधिकारों के रिकॉर्ड्स शामिल हैं, जो भूमि के स्वामित्व, उसके उपयोग और सिंचाई की स्थिति के बारे में जानकारी प्रदान करते हैं। स्पेशियल डेटा में भूमि विभाजन और सीमाओं के बारे में जानकारी रखने वाले कैडेस्ट्रल मैप शामिल हैं। इस कार्यक्रम के तहत, कैडेस्ट्रल मैप्स को आधुनिक जियोग्राफिक इनफॉरमेशन सिस्टम (जीआईएस) एन्कोडिंग के साथ डिजिटाइज़ किया जा रहा है।

रेखाचित्र 14: डीआईएलआरएमपी के अंतर्गत बजटीय आवंटन और धनराशि उपयोग (करोड़ रुपए में)

नोट: वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमानों को वास्तविक आंकड़े माना गया है।

स्रोत: भूमि संसाधन विभाग के लिए अनुदान की मांग; पीआरएस।

घटकों की धीमी प्रगति

डीआईएलआरएमपी के आठ घटक हैं, जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) भूमि रिकॉर्ड्स का कंप्यूटरीकरण, (ii) कैडस्ट्रल मैप्स का डिजिटलीकरण, (iii) कैडस्ट्रल मैप्स को रिकॉर्ड ऑफ राइट्स से जोड़ना, (iv) रिकॉर्ड रूम्स को आधुनिकी बनाना, और (v) उप-पंजीयक कार्यालयों को जमीन के रिकॉर्ड्स के साथ जोड़ना।[70]  जमीनी हकीकत को दर्शाने के लिए आधिकारिक रिकॉर्ड्स को अपडेट करना आवश्यक है।[71]  मानचित्रों में परिवर्तन तब आवश्यक होता है जब: (i) किसी भूखंड को कई भूखंडों में विभाजित किया जाता है, (ii) किसी भूखंड को उपहार, बिक्री या विरासत के माध्यम से अन्य व्यक्तियों को हस्तांतरित किया जाता है। पुनर्सर्वेक्षण तब आवश्यक हो जाता है जब रिकॉर्ड्स में दर्शाई गई सीमाएं ज़मीनी हकीकत से मेल नहीं खातीं। ग्रामीण विकास और पंचायती राज से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (2024) ने कहा था कि योजना के प्रभावी कार्यान्वयन से जमीन के रिकॉर्ड्स से संबंधित विवादों को हल करने में मदद मिल सकती है।[72] कमिटी ने मंत्रालय से समय पर कार्य पूरा करने का आग्रह किया था। इससे पहले, विभाग ने कुछ मामलों में धीमी प्रगति के कारणों के रूप में कुशल मानव संसाधन की जरूरत और राज्य सरकारों द्वारा की गई देरी का उल्लेख किया था।[73]  

तालिका 14: डीआईएलआरएमपी के अंतर्गत गतिविधियों की प्रगति

गतिविधि

उपलब्धि

रिकॉर्ड ऑफ राइट्स का कंप्यूटरीकरण

100%

उप-पंजीयक कार्यालयों का कंप्यूटरीकरण

100%

राजस्व न्यायालयों का कंप्यूटरीकरण

93%

कैडस्ट्रल मानचित्रों का डिजिटलीकरण

97%

सर्वेक्षण या पुनर्सर्वेक्षण पूर्ण

15%

स्रोत: डीआईएलआरएमपी एमआईएस, 28 जनवरी, 2026 को प्राप्त जानकारी; पीआरएस।

 

अनुलग्नक

तालिका 15: पीएमएवाई-ग्रामीण योजना के अंतर्गत संचयी लक्ष्य के मुकाबले पूर्ण किए गए घरों का अनुपात (जनवरी 2026 तक)

 

एमओआरडी का लक्ष्य

मंजूर

पूर्ण

लक्ष्य बनाम पूर्ण घर

अरुणाचल प्रदेश

35,937

35,404

35,582

99%

असम

26,11,793

21,67,921

19,90,974

76%

बिहार

44,92,010

39,28,189

37,10,515

83%

छत्तीसगढ़

23,41,457

17,72,161

11,21,050

48%

गोवा

257

253

240

93%

गुजरात

9,02,354

7,81,951

5,64,855

63%

हरियाणा

1,06,460

31,441

28,795

27%

हिमाचल प्रदेश

1,21,502

92,922

24,080

20%

जम्मू और कश्मीर

3,36,498

3,33,155

2,95,137

88%

झारखंड

20,12,107

16,62,892

15,64,359

78%

केरल

2,32,916

62,135

34,097

15%

मध्य प्रदेश

49,89,236

40,49,223

36,87,490

74%

महाराष्ट्र

33,40,872

25,58,248

12,69,264

38%

मणिपुर

1,08,550

97,978

37,773

35%

मेघालय

1,88,034

1,82,890

1,29,505

69%

मिजोरम

29,967

29,542

24,593

82%

नागालैंड

48,830

48,085

21,978

45%

ओड़िशा

28,49,889

27,80,187

23,40,492

82%

पंजाब

1,03,674

61,956

38,750

37%

राजस्थान

22,15,247

18,72,955

17,00,136

77%

सिक्किम

1,399

1,373

1,386

99%

तमिलनाडु

9,57,825

7,39,889

6,33,145

66%

त्रिपुरा

3,76,913

3,72,974

3,67,787

98%

उत्तर प्रदेश

36,85,704

36,35,296

36,10,909

98%

उत्तराखंड

69,194

68,381

68,091

98%

पश्चिम बंगाल

45,69,423

44,23,752

34,19,112

75%

अंडमान-निकोबार

3,424

3,028

1,227

36%

दादरा-नगर हवेली

11,206

10,995

3,937

35%

दमन-दीव

158

127

24

15%

लक्षद्वीप

45

53

45

100%

पुद्दूचेरी

-

-

-

 

आंध्र प्रदेश

2,47,114

1,67,931

83,826

34%

कर्नाटक

9,44,140

1,83,410

1,45,077

15%

तेलंगाना

-

-

-

 

लद्दाख

3,004

3,004

3,004

100%

कुल

3,79,37,139

3,21,59,701

2,69,57,235

71%

नोट: इसमें 2024-25 के लिए निर्धारित लक्ष्य शामिल हैं। स्रोत: पीएमएवाई-जी डैशबोर्ड, 31 जनवरी 2026 तक; पीआरएस।

तालिका 16: राज्यवार कार्य पूरा करने में लगने वाले औसत दिन (जनवरी 2026 तक)

राज्य

काम पूरा होने में लगने वाला औसत समय (दिनों में)

राज्य

काम पूरा होने में लगने वाला औसत समय (दिनों में)

अरुणाचल प्रदेश

276

पंजाब

305

असम

313

राजस्थान

311

बिहार

351

सिक्किम

358

छत्तीसगढ़

327

तमिलनाडु

370

गोवा

630

त्रिपुरा

281

गुजरात

316

उत्तर प्रदेश

195

हरियाणा

434

उत्तराखंड

223

हिमाचल प्रदेश

303

पश्चिम बंगाल

276

जम्मू और कश्मीर

464

अंडमान-निकोबार

371

झारखंड

367

दादरा-नगर हवेली

708

केरल

348

दमन-दीव

326

मध्य प्रदेश

265

लक्षद्वीप

786

महाराष्ट्र

356

पुद्दूचेरी

-

मणिपुर

473

आंध्र प्रदेश

179

मेघालय

448

कर्नाटक

72

मिजोरम

468

तेलंगाना

-

नागालैंड

492

लद्दाख

120

ओड़िशा

283

औसत

297

स्रोत: पीएमएवाई-जी डैशबोर्ड, 31 जनवरी 2026 तक; पीआरएस।

 

[1] About the Ministry, Ministry of Rural Development, as accessed on February 4, 2025, https://www.dord.gov.in/department

[2] About the Department, Department of Land Resources, as accessed on February 4, 2024, https://dolr.gov.in/about-department/history-background/.

[3] Demand No. 87, Department of Rural Development, Ministry of Rural Development, Union Budget 2022-23, https://www.indiabudget.gov.in/budget2022-23/doc/eb/sbe87.pdf.

[4] The Viksit Bharat – Guarantee for Rozgar and Ajeevika Mission (Gramin) VB-G RAM G Bill, 2025, https://prsindia.org/billtrack/the-viksit-bharat-%E2%80%93-guarantee-for-rozgar-and-ajeevika-mission-gramin-vb-%E2%80%93-g-ram-g-bill-2025.

[5] The National Rural Employment Guarantee Act, 2005, Ministry of Law, Ministry of Rural Development, https://nregaplus.nic.in/Netnrega/Data/Library/Books/1_MGNREGA_Act.pdf.

[6] MGNREGA Operational Guidelines 2013, Ministry of Rural Development, https://drdashimla.nic.in/guideline/nrega.pdf.

[7] Rural Employment through Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act (MGNREGA) – An insight into wage rates and other matters relating thereto, Thirty Seventh Report of Standing Committee on Rural Development and Panchayati Raj (2023-24), February 2024, https://sansad.in/getFile/lsscommittee/Rural%20Development%20and%20Panchayati%20Raj/17_Rural_Development_and_Panchayati_Raj_37.pdf?source=loksabhadocs.

[9] Employment generated during the year MGNREGA Dashboard, Ministry of Rural Development, as accessed on February 4, 2026, https://nreganarep.nic.in/netnrega/citizen_html/demregister.aspx?lflag=eng&fin_year=2024-2025&source=national&labels=labels&Digest=O57D2k1AxQj89t4Y5xNiBg.

[10] Economic Survey 2023-24, Ministry of Finance, https://www.indiabudget.gov.in/economicsurvey/doc/echapter.pdf.

[11] State-wise wage rate for unskilled manual workers, Ministry of Rural Development, March 27, 2024, https://nregaplus.nic.in/netnrega/writereaddata/Circulars/2476Wage_Rate_notification_FY_2024-25.pdf.

[13] National Consumer Price Index Numbers, Ministry of Statistics and Programme Implementation, https://mospi.gov.in/112-national-consumer-price-index-numbers

[15] Unemployment Allowance in Financial Year 2023-24, MGNREGA Dashboard, Ministry of Rural Development, as accessed on August 12, 2024, https://mnregaweb4.nic.in/netnrega/state_html/unempall_new.aspx?fin_year=2023-2024&source=national&Digest=akdjO9VfTrWA9tZ+TJ0C7A.

[16] R 19.1 Unemployment Allowance in Financial Year 2024-25, NREGA Reports, Ministry of Rural Development, as accessed on January 22, 2025, https://mnregaweb4.nic.in/netnrega/state_html/unempall_new.aspx?fin_year=2024-2025&source=national&Digest=A5biDOmxWUswueiINVvFwg.

[17] Twenty Fifth Report of the Standing Committee on Rural Development and Panchayati Raj, Lok Sabha, August 3, 2022, https://sansad.in/getFile/lsscommittee/Rural%20Development%20and%20Panchayati%20Raj/17_Rural_Development_and_Panchayati_Raj_25.pdf?source=loksabhadocs.

[18] MGNREGS Annual Master Circular 2024-25, Ministry of Rural Development, https://nregaplus.nic.in/netnrega/writereaddata/Circulars/AMC_2024-25-English.pdf.

[19] R.9.1.3 Social Audit Calendar vs Audits Completed, NREGA Dashboard, Ministry of Rural Development, as accessed on January 22, 2025, https://nreganarep.nic.in/netnrega/MISreport4.aspx.

[20] Status of Devolution to Panchayats, Ministry of Panchayati Raj, 2024, https://static.pib.gov.in/WriteReadData/specificdocs/documents/2025/feb/doc2025213501601.pdf.

[21] Overview of Pradhan Mantri Awas Yojana – Gramin (PMAY-G), Ministry of Rural Development, https://rural.gov.in/sites/default/files/Overview%20of%20PMAY-G.pdf.

[23] Awas Plus Scheme, Ministry of Rural Development, Press Information Bureau, March 12, 2023, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1906802&reg=3&lang=2.

[24] Houses for all under Pradhan Mantri Awas Yojana – Gramin, Press Information Bureau, Ministry of Rural Development, December 13, 2022, https://pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1883183.

[25] Cabinet approves implementation of the Pradhan Mantri Awaas Yojana – Gramin (PMAY-G) during FY 2024-25 to 2028-29, Ministry of Rural Development, PIB, August 9, 2024, https://pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=2043921.

[26] PMAY (G) Dashboard, Ministry of Rural Development, as accessed on December 27, 2025, https://pmayg.nic.in/netiay/PBIDashboard/PMAYGDashboard.aspx

[27] Thirty Three Report of the Standing Committee on Rural Development and Panchayati Raj (2022-23), July, 2023, https://sansad.in/getFile/lsscommittee/Rural%20Development%20and%20Panchayati%20Raj/17_Rural_Development_and_Panchayati_Raj_33.pdf?source=loksabhadocs.

[28] Average Completion time of houses sanctioned under PMAY – G, Ministry of Rural Development, as accessed on December 27, 2025, https://rhreporting.nic.in/netiay/DataAnalytics/AverageCompletionTimeADReport.aspx.

[29] Pradhan Mantri Gram Sadak Yojana Programme Guidelines, Ministry of Rural Development, January, 2015, https://pmgsy.nic.in/sites/default/files/pdf/PMGSY_E_J_2015.pdf.

[30] Programme Guidelines, Pradhan Mantri Gram Sadak Yojana - II, https://pmgsy.nic.in/sites/default/files/pdf/PMGSY_Guidelines_Final.pdf.

[31] Programme Guidelines, Pradhan Mantri Gram Sadak Yojana – III, https://pmgsy.nic.in/sites/default/files/PMGSY_III_guidelines.pdf

[32] PMGSY Programme Guidelines for Road Connectivity Project for Left Wing Extremism Affected Area, Ministry of Rural Development, January, 2017, https://pmgsy.nic.in/sites/default/files/RCPLWEA22feb17.pdf.

[33] Beneficiaries under PM-JANMAN, Unstarred question no 623, Ministry of Tribal Affairs, Rajya Sabha, February 7, 2024, https://sansad.in/getFile/annex/263/AU623.pdf?source=pqars.

[34] Cabinet approves implementation of the Pradhan Mantri Gram Sadak Yojana - IV (PMGSY-IV) during FY 2024-25 to 2028-29, Press Information Bureau, September 11, 2024, https://pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=2053894.

[35] Implementation of PMGSY IV, Unstarred Question no 2378, Ministry of Rural Development, Rajya Sabha, December 19, 2025, https://sansad.in/getFile/annex/269/AU2378_36y523.pdf?source=pqars.

[37] Thirty Sixth Report on Action Taken on the Report on Pradhan Mantri Gram Sadak Yojana, Standing Committee on Rural Development and Panchayati Raj (2023-24), Ministry of Rural Development, https://sansad.in/getFile/lsscommittee/Rural%20Development%20and%20Panchayati%20Raj/17_Rural_Development_and_Panchayati_Raj_36.pdf?source=loksabhadocs.

[38] Maintenance of Roads under Pradhan Mantri Gram Sadak Yojana, Ministry of Rural Development, Press Information Bureau, February 6, 2024, https://rural.gov.in/en/press-release/maintenance-roads-under-pradhan-mantri-gram-sadak-yojana.

[39] Quality Control, monitoring and evaluation, Performance Audit of Pradhan Mantri Gram Sadak Yojana, Comptroller and Auditor General of India, 2016, https://cag.gov.in/uploads/download_audit_report/2016/Chapter_6_Quality_Control,_Monitoring_and_Evaluation.pdf.

[40] Pradhan Mantri Gram Sadak Yojana, NQM, Regarded Grading Abstract, as of December 28, 2025, https://pmgsy.dord.gov.in/#

[41] Pradhan Mantri Gram Sadak Yojana, SQM, Regarded Grading Abstract, as of December 28, 2025, https://pmgsy.dord.gov.in/#.

[42] Report of the Fifteenth Finance Commission, Volume III, https://fincomindia.nic.in/asset/doc/commission-reports/XVFC-Vol-III-Union.pdf.

[43] Programme Guidelines (PMGSY-III), Ministry of Rural Development, October, 2019, https://www.pmgsy.nic.in/sites/default/files/PMGSY_III_guidelines.pdf.

[44] Introduction, Deendayal Antyodaya Yojana-National Rural Livelihood Mission, Ministry of Rural Development, accessed on June 15, 2024, https://aajeevika.gov.in/about/introduction.

[45] Bank Credit to Women SHGs, Unstarred Question No 3025, Ministry of Rural Development, Rajya Sabha, December 20, 2024, https://sansad.in/getFile/annex/266/AU3025_UtFvZ3.pdf?source=pqars.

[46] Dashboard, National Rural Livelihoods Mission, Ministry of Rural Development, as accessed on December 28, 2025, https://nrlm.gov.in/dashboardForOuter.do?methodName=dashboard.

[47] Progress under NRLM, NRLM Dashboard, Ministry of Rural Development, as accessed on December 28, 2024, https://preprodmis.lokos.in/dashboardForOuter.do?methodName=dashboard.

[48] Status of Microfinance In India 2023-24, National Bank for Agriculture and Rural Development, https://www.nabard.org/auth/writereaddata/tender/0808244223NABARD-SOMFI%20%20%20%20%20%20%20%2020232024%20%20%20%20%20%2030072024.pdf.

[50] National Rural Livelihoods Mission, Mission Guidelines, Ministry of Rural Development, https://rural.gov.in/sites/default/files/NRLM_Guidelines_English.pdf.

[51] Outcome of SHG bank linkage project, Unstarred Question no 1,219, Ministry of Rural Development, Rajya Sabha, December 13, 2023, https://sansad.in/getFile/annex/262/AU1219.pdf?source=pqars.

[52] Starred Question no 337, Achievements Under DDU-GKY, Ministry of Rural Development, Lok Sabha, August 12, 2025, https://sansad.in/getFile/loksabhaquestions/annex/185/AS337_cOAyj5.pdf?source=pqals.

[53] Programme Guidelines, Deendayal Upadhyaya Grameen Kaushalya Yojana, Ministry of Rural Development, July 2016, https://rural.gov.in/sites/default/files/DDUGKY_Guidelines_English_1.pdf.

[55] Beneficiaries under Deen Dayal Upadhyaya Grameen Kaushalya Yojana - DDU-GKY, Press Information Bureau, Ministry of Rural Development, December 17, 2024, https://pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2085248#:~:text=Based%20on%20the%20implementation%20experiences,unit%20for%20training%20and%20placement.

[56] Establishment of RSETI, Unstarred Question no 3985, Ministry of Rural Development, Rajya Sabha, April 4, 2025, https://sansad.in/getFile/annex/267/AU3985_doKUg4.pdf?source=pqars.

[57] Achievements of RSETIS, Unstarred Question No 2367, Ministry of Rural Development, Rajya Sabha, December 19, 2025, https://sansad.in/getFile/annex/269/AU2367_Jdsb5w.pdf?source=pqars.

[58] Evaluation study of rural self-employment training institutes, Ministry of Rural Development, https://kaushal.rural.gov.in/assets/files/Evaluation-Impact-Study-of-Rural-Self-Employment-Training-Institutes.pdf.

[59] About Us, National Social Assistance Programme, Ministry of Rural Development, accessed on July 16, 2024, https://nsap.nic.in/circular.do?method=aboutus.

[60] Unstarred Question No 651, Increasing Pension Under NSAP, Ministry of Rural Development, https://sansad.in/getFile/loksabhaquestions/annex/1715/AU651.pdf?source=pqals

[61] Thirty Third Report on Demand for Grants, Ministry of Rural Development (Department of Rural Development), Standing Committee on Rural Development and Panchayati Raj, https://sansad.in/getFile/lsscommittee/Rural%20Development%20and%20Panchayati%20Raj/17_Rural_Development_and_Panchayati_Raj_33.pdf?source=loksabhadocs

[62] Report of the Fifteenth Finance Commission, Volume – III, https://fincomindia.nic.in/asset/doc/commission-reports/XVFC-Vol-III-Union.pdf

[63] 35th Report of the Public Accounts Committee, Lok Sabha, December 15, 2025, https://sansad.in/getFile/lsscommittee/Public%20Accounts/18_Public_Accounts_35.pdf?source=loksabhadocs.

[64] Report of the Comptroller and Auditor General of India on Performance Audit of National Social Assistance Programme, CAG, 2023, https://cag.gov.in/uploads/download_audit_report/2023/Report-No.-10-of-2023_NSAP_English_PDF-A-064d229f832dad7.55068084.pdf.

[65] “About the Department”, Department of Land Resources, accessed on July 17, 2024, https://dolr.gov.in/en/about-us/about-department.

[66] DILRMP, Department of Land Resources, as accessed on July 18, 2024, https://dolr.gov.in/programmes-schemes/dilrmp-2/.

[67] Watershed Development Component of PMKSY, Department of Land Resources, Ministry of Rural Development, as accessed on July 17, 2024, https://dolr.gov.in/wdcpmksy/

[68] Report no. 6, Standing Committee on Rural Development and Panchayati Raj, Demand for Grants (2025-26), Department of Land Resources, Ministry of Rural Development, March 12, 2025, https://sansad.in/getFile/lsscommittee/Rural%20Development%20and%20Panchayati%20Raj/18_Rural_Development_and_Panchayati_Raj_6.pdf?source=loksabhadocs

[69] Report T2 – State wise, district wise and project wise details of targets, achievements and works of activities till selected financial year, 2023=24, as accessed on July 18, 2024, https://wdcpmksy.dolr.gov.in/activityWiseUptoPlanAchievWork

[70] Operational Guidelines of Digital India Land Records Modernisation Programme (DILRMP), Ministry of Rural Development, 2019, https://dolr.gov.in/sites/default/files/Final%20%20Guideline%20of%20DILRMP%2002-01-2019.pdf.

[71] Annual Report 2022-23, Ministry of Land Resources, https://rural.gov.in/sites/default/files/AnnualReport2022_23_English_0.pdf.

[72] Report no. 2, Standing Committee on Rural Development and Panchayati Raj, Demand for Grants (2024-25), Department of Land Resources, Ministry of Rural Development, December 12, 2024, https://sansad.in/getFile/lsscommittee/Rural%20Development%20and%20Panchayati%20Raj/18_Rural_Development_and_Panchayati_Raj_2.pdf?source=loksabhadocs.

[73] Twenty Seventh Report on Demand for Grants (2022-23) of Department of Land Resources, Standing Committee on Rural Development and Panchayati Raj, August 3, 2022, https://loksabhadocs.nic.in/lsscommittee/Rural%20Development%20and%20Panchayati%20Raj/17_Rural_Development_and_Panchayati_Raj_27.pdf.

डिस्क्लेमर: प्रस्तुत रिपोर्ट आपके समक्ष सूचना प्रदान करने के लिए प्रस्तुत की गई है। पीआरएस लेजिसलेटिव रिसर्च (पीआरएस) के नाम उल्लेख के साथ इस रिपोर्ट का पूर्ण रूपेण या आंशिक रूप से गैर व्यावसायिक उद्देश्य के लिए पुनःप्रयोग या पुनर्वितरण किया जा सकता है। रिपोर्ट में प्रस्तुत विचार के लिए अंततः लेखक या लेखिका उत्तरदायी हैं। यद्यपि पीआरएस विश्वसनीय और व्यापक सूचना का प्रयोग करने का हर संभव प्रयास करता है किंतु पीआरएस दावा नहीं करता कि प्रस्तुत रिपोर्ट की सामग्री सही या पूर्ण है। पीआरएस एक स्वतंत्र, अलाभकारी समूह है। रिपोर्ट को इसे प्राप्त करने वाले व्यक्तियों के उद्देश्यों अथवा विचारों से निरपेक्ष होकर तैयार किया गया है। यह सारांश मूल रूप से अंग्रेजी में तैयार किया गया था। हिंदी रूपांतरण में किसी भी प्रकार की अस्पष्टता की स्थिति में अंग्रेजी के मूल सारांश से इसकी पुष्टि की जा सकती है।