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मुख्य बिंदु
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रक्षा मंत्रालय रक्षा और सुरक्षा संबंधी मामलों पर नीतियां बनाता है और रक्षा सेवाओं (थलसेना, नौसेना और वायुसेना) द्वारा उनके कार्यान्वयन को सुनिश्चित करता है। यह रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और अनुसंधान एवं विकास संगठनों जैसे उत्पादन प्रतिष्ठानों के लिए भी जिम्मेदार है। इसके अतिरिक्त, यह रक्षा सेवाओं की सहायता करने वाली सहायक सेवाओं की भी देखरेख करता है जैसे सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा। इस नोट में मंत्रालय के बजटीय आवंटन और व्यय की प्रवृत्तियों का विश्लेषण किया गया है। इसमें इस क्षेत्र के कुछ मुद्दों पर भी चर्चा की गई है।
वित्तीय स्थिति
रक्षा मंत्रालय के बजट में तीनों रक्षा सेवाओं के लिए आवंटन के साथ-साथ अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) तथा सीमा सड़कों पर होने वाला व्यय भी शामिल है। वर्ष 2026-27 में मंत्रालय को 7,84,678 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। इसमें सशस्त्र बलों और असैनिकों के वेतन, पेंशन, सशस्त्र बलों का आधुनिकीकरण, उत्पादन प्रतिष्ठान, रखरखाव और आरएंडडी संगठनों पर होने वाला व्यय शामिल है। रक्षा मंत्रालय के लिए आवंटित राशि सभी मंत्रालयों में सबसे अधिक है और केंद्र सरकार के कुल व्यय (53,47,315 करोड़ रुपए) का 14.7% है। वर्ष 2025-26 के लिए संशोधित अनुमान (संअ) इस वर्ष के बजट अनुमान (बअ) की तुलना में 8% अधिक हैं। इसका मुख्य कारण स्पेक्ट्रम शुल्क के लिए संशोधित चरण में अनुमानित 36,131 करोड़ रुपए का अतिरिक्त व्यय है। वर्ष 2026-27 में स्पेक्ट्रम शुल्क के लिए 37,200 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं। इसमें दूरसंचार विभाग को देय वर्तमान स्पेक्ट्रम शुल्क और मूलधन तथा विलंब शुल्क (लेट फी) के बकाया का भुगतान शामिल है।
रक्षा व्यय अभी भी बजट का सबसे बड़ी मद, लेकिन सरकारी व्यय और जीडीपी में इसकी हिस्सेदारी में गिरावट आई है
रक्षा व्यय केंद्र सरकार के बजट का सबसे बड़ा हिस्सा है। हालांकि रक्षा पर खर्च होने वाले केंद्रीय बजट का हिस्सा पिछले कुछ वर्षों में कम हुआ है। रक्षा पर व्यय 2014-15 में केंद्र सरकार के कुल व्यय का 17.1% था, जो 2026-27 में घटकर 14.7% हो गया है (रेखाचित्र 1)। 2014-15 और 2026-27 के बीच केंद्र सरकार के व्यय में 10.2% की वार्षिक दर से वृद्धि होने का अनुमान है। इसकी तुलना में, इसी अवधि के दौरान रक्षा व्यय में 8.8% की वार्षिक दर से वृद्धि होने का अनुमान है।
रेखाचित्र 1: केंद्र के कुल व्यय में रक्षा व्यय की हिस्सेदारी में गिरावट आई
नोट: BE: बजट अनुमान; RE: संशोधित अनुमान। स्रोत: केंद्रीय बजट दस्तावेज (विभिन्न वर्ष); पीआरएस।
रक्षा से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (2018) ने सुझाव दिया था कि सशस्त्र बलों की पर्याप्त तैयारी सुनिश्चित करने के लिए रक्षा मंत्रालय को जीडीपी के लगभग 3% का निश्चित बजट आवंटित किया जाना चाहिए।[1] इसके जवाब में वित्त मंत्रालय ने कहा था कि संशोधित अनुमान चरण में आवंटन व्यय की प्रगति, प्रतिबद्ध देनदारियों और सरकार के संसाधनों पर निर्भर करता है।1 चूंकि संसाधनों का आवंटन आवश्यकता और प्रतिस्पर्धी प्राथमिकताओं के आधार पर किया जाता है, इसलिए रक्षा व्यय को कुल व्यय या जीडीपी के हिस्से के रूप में निश्चित नहीं किया जा सकता है।1 भारत का रक्षा व्यय लगातार अनुशंसित स्तर से कम रहा है। रक्षा पर व्यय 2014-15 में जीडीपी के 2.3% से घटकर 2026-27 में जीडीपी का 2.0% हो गया है। अगर रक्षा पेंशन पर होने वाले व्यय को हटा दिया जाए, तो जीडीपी के प्रतिशत के रूप में रक्षा व्यय प्रत्येक वर्ष लगभग 0.5% कम होगा (रेखाचित्र 2)।
रेखाचित्र 2: जीडीपी के प्रतिशत के रूप में रक्षा व्यय में कमी आई है
स्रोत: केंद्रीय बजट दस्तावेज (विभिन्न वर्ष); पीआरएस।
स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (सिपरी) के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में भारत का रक्षा व्यय पांचवां सबसे अधिक था। [2] इसमें अर्धसैनिक बलों पर किया गया व्यय भी शामिल है। पूर्ण रूप से देखा जाए तो, 2024 में चीन का रक्षा व्यय भारत के रक्षा व्यय का 3.6 गुना था।
तालिका 1: 2024 में विभिन्न देशों का सैन्य व्यय
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देश |
रक्षा व्यय (USD बिलियन) |
सामान्य सरकारी व्यय का %^ |
|
यूएसए |
997 |
9.1% |
|
चीन |
314 |
5.1% |
|
रूस |
149 |
18.9% |
|
जर्मनी |
88 |
3.9% |
|
भारत |
86 |
7.6% |
|
यूके |
82 |
5.3% |
|
साऊदी अरब |
80 |
22.3% |
|
उक्रेन |
65 |
54.0% |
|
फ्रांस |
65 |
3.6% |
|
जापान |
55 |
3.3% |
|
पाकिस्तान* |
10 |
13.8% |
नोट: *पाकिस्तान 2024 में सैन्य खर्च में 29वें स्थान पर था। ^सामान्य सरकारी व्यय के प्रतिशत के रूप में।
स्रोत: सिपरी सैन्य व्यय डेटाबेस; पीआरएस।
रक्षा बजट की संरचना
2026-27 में केंद्र सरकार ने रक्षा मंत्रालय के लिए 7,84,678 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं जो 2025-26 के संशोधित अनुमान से 7% अधिक है (तालिका 2)। रक्षा बजट के अंतर्गत, वेतन पर व्यय में 3% और पेंशन पर व्यय में 1% की वृद्धि का अनुमान है। 2026-27 में रक्षा पर अनुमानित व्यय का 44% वेतन और पेंशन पर खर्च होगा। 2014-15 और 2026-27 के बीच वेतन और पेंशन पर रक्षा व्यय में लगभग 8% की वार्षिक दर से वृद्धि होने का अनुमान है। उल्लेखनीय है कि वेतन पर व्यय का अनुमान कम हो सकता है क्योंकि राष्ट्रीय राइफल्स, राष्ट्रीय कैडेट कोर और अग्निपथ कैडर पर राजस्व व्यय का विस्तृत विवरण उपलब्ध नहीं है। अन्य व्यय 2025-26 और 2026-27 में मुख्य रूप से दूरसंचार विभाग को देय स्पेक्ट्रम शुल्क के व्यय के कारण बढ़े हैं।
रक्षा क्षेत्र में पूंजीगत परिव्यय, जिसमें हथियार, गोला-बारूद और अन्य उपकरण खरीदने पर होने वाला खर्च शामिल है, 2026-27 में संशोधित अनुमान 2025-26 की तुलना में 17% बढ़ने का अनुमान है। 2014-15 और 2026-27 के बीच रक्षा क्षेत्र में पूंजीगत परिव्यय लगभग 9% की वार्षिक दर से बढ़ा। अन्य व्ययों में परिवहन, राष्ट्रीय राइफल्स, अग्निपथ योजना और मंत्रालय के अन्य स्थापना व्यय शामिल हैं।
16वें वित्त आयोग का अनुमान है कि पंचाट अवधि (2026-31) के दौरान रक्षा वेतन और भत्तों में लगभग 6% वार्षिक वृद्धि होगी।[3] रक्षा संबंधी बढ़ती आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए गैर-वेतन व्यय में लगभग 15% प्रति वर्ष की दर से कहीं अधिक तेजी से वृद्धि होने की उम्मीद है।
तालिका 2: रक्षा बजट का बंटवारा
|
मुख्य मदें |
2024-25 |
2025-26 संअ |
2026-27 बअ |
% परिवर्तन (25-26 संअ से 26-27 बअ) |
|
वेतन |
1,62,384 |
1,66,064 |
1,71,044 |
3% |
|
पेंशन |
1,57,654 |
1,69,187 |
1,71,338 |
1% |
|
पूंजीगत परिव्यय |
1,70,617 |
1,97,417 |
2,31,010 |
17% |
|
ररखरखाव |
83,220 |
93,321 |
92,870 |
0% |
|
अन्य व्यय |
62,128 |
1,06,523 |
1,18,416 |
11% |
|
कुल |
6,36,003 |
7,32,512 |
7,84,678 |
7% |
नोट: वेतन में सशस्त्र बलों, सहायक बलों, असैनिक कर्मचारियों के वेतन और भत्ते, आरएंडडी शामिल हैं। पूंजी परिव्यय में मंत्रालय और सशस्त्र बलों का पूंजीगत व्यय शामिल है। रखरखाव में स्टोर, वर्क्स, रिपेयर और रिफिट्स पर व्यय शामिल है।
स्रोत: व्यय बजट, केंद्रीय बजट 2026-27; पीआरएस।
2026-27 में सेना पर राजस्व व्यय में 2025-26 के संशोधित अनुमान की तुलना में 6% की वृद्धि होने का अनुमान है, जबकि नौसेना पर 7% की वृद्धि होने की उम्मीद है (तालिका 3)। वायुसेना के राजस्व व्यय में वृद्धि नगण्य है। उल्लेखनीय है कि 2026-27 में पेंशन पर राजस्व व्यय को सार्वजनिक खाते से 8,000 करोड़ रुपए की वसूली के लिए समायोजित किया गया है। तीनों रक्षा सेवाओं के पेंशन व्यय पर इसके अलग-अलग प्रभाव का विवरण नहीं दिया गया है। 2024-25 से सरकार तीनों सेवाओं की पूंजीगत व्यय मांगों को विमान और एयरो इंजन तथा भारी और मध्यम वाहन जैसी सामान्य श्रेणियों में एकीकृत कर रही है।[4] इसका उद्देश्य समन्वय को बढ़ावा देना और रक्षा मंत्रालय को प्राथमिकताओं के आधार पर विभिन्न सेवाओं में धन के पुनर्वितरण में अधिक लचीलापन प्रदान करना है।4
तालिका 3: सशस्त्र सेवाओं का राजस्व व्यय (करोड़ रुपए में)
|
सेवा |
2024-25 |
2025-26 |
2026-27 |
% परिवर्तन (25-26 संअ से 26-27 बअ) |
|
थलसेना |
3,33,761 |
3,75,416 |
3,96,977 |
6% |
|
नौसेना |
45,299 |
57,060 |
61,216 |
7% |
|
वायुसेना |
64,690 |
80,756 |
80,796 |
0% |
|
अन्य |
21,604 |
16,965 |
17,601 |
4% |
|
कुल |
4,65,355 |
5,30,197 |
5,56,590 |
5% |
नोट: अन्य में आयुध निदेशालय, अनुसंधान एवं विकास निदेशालय और रक्षा मंत्रालय (असैनिक) शामिल हैं। स्रोत: व्यय बजट, केंद्रीय बजट 2026-27; पीआरएस।
तालिका 4: बजट अनुमानों के अनुसार 2026-27 में विभिन्न सैन्य सेवाओं के वेतन और पेंशन पर व्यय (करोड़ रुपए में)
|
सैन्य सेवा |
वेतन |
सैन्य सेवा के रेवेक्स (Revex) का % |
पेंशन |
सैन्य सेवा के रेवेक्स (Revex) का % |
|
थलसेना |
1,29,516 |
33% |
1,51,631 |
38% |
|
नौसेना |
13,460 |
22% |
10,024 |
16% |
|
वायुसेना |
22,768 |
28% |
17,646 |
22% |
नोट: Revex का अर्थ, राजस्व व्यय है। स्रोत: व्यय बजट, केंद्रीय बजट 2026-27; पीआरएस।
रक्षा बजट का 20% से अधिक हिस्सा पेंशन भुगतान में
रक्षा पेंशन में तीनों सेवाओं के सेवानिवृत्त रक्षा कर्मियों (नागरिक कर्मचारियों सहित) के लिए पेंशन संबंधी लाभ शामिल हैं।[5] इसमें सेवा पेंशन, ग्रैच्युटी, पारिवारिक पेंशन, विकलांगता पेंशन, पेंशन का परिवर्तित मूल्य और अवकाश नकदीकरण का भुगतान शामिल है।5 देश में रक्षा पेंशनभोगियों की कुल संख्या 32,94,181 है।[6] रक्षा व्यय में पेंशन भुगतान का एक बड़ा हिस्सा होता है। रक्षा पेंशन परिव्यय में लगभग 20% की वार्षिक दर से वृद्धि हुई है, जो 2000-01 में 10,539 करोड़ रुपए से बढ़कर 2026-27 में 1,71,338 करोड़ रुपए हो गया है। इसकी तुलना में गैर-पेंशन रक्षा व्यय में 17% की धीमी वार्षिक दर से वृद्धि हुई है, जो 2000-01 में 54,800 करोड़ रुपए से बढ़कर 2026-27 में 6,13,340 करोड़ रुपए हो गया है। 2000-01 में रक्षा बजट का 16% हिस्सा पेंशन पर खर्च किया गया था और अनुमान है कि 2026-27 में कुल रक्षा व्यय में इसका योगदान 22% होगा (रेखाचित्र 3)।
रक्षा कर्मियों की पेंशन लगभग उनके वेतन के बराबर है (तालिका 2)। इसके विपरीत, केंद्र सरकार के शेष विभागों के लिए 2026-27 में पेंशन (1,24,876 करोड़ रुपए) का बजट वेतन और भत्तों (3,67,182 करोड़ रुपए) का लगभग एक तिहाई है।
रेखाचित्र 3: वर्ष 2014-15 और 2026-27 के बीच रक्षा व्यय का लगभग एक चौथाई हिस्सा पेंशन पर
नोट: BE: बजट अनुमान; RE: संशोधित अनुमान। स्रोत: केंद्रीय बजट दस्तावेज (विभिन्न वर्ष); पीआरएस।
रक्षा पेंशन व्यय में वृद्धि के कई कारण हैं। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) कलर सर्विस की अवधि में वृद्धि, (ii) क्रमिक वेतन आयोगों के सुझावों को लागू करना, और (iii) वन रैंक वन पेंशन (ओआरओपी) योजना का प्रारंभ। कलर सर्विस का अर्थ है, सशस्त्र बलों में सक्रिय सेवा के दौरान कर्मियों द्वारा प्रदान की गई सेवा अवधि। 1965 से, अधिकारी रैंक से नीचे के कर्मियों (पीबीओआर) के लिए आवश्यक न्यूनतम कलर सर्विस सात वर्ष से बढ़कर 17 वर्ष हो गई है, जबकि पेंशन के लिए न्यूनतम अर्हता सेवा 15 वर्ष पर अपरिवर्तित रही है।[7],[8] परिणामस्वरूप, कलर सर्विस को पूरा करने के बाद सेवानिवृत्त होने वाले लगभग सभी कर्मी पेंशन के पात्र होते हैं।
जनवरी 2016 से सातवें केंद्रीय वेतन आयोग (सीपीसी) के लागू होने से रक्षा पेंशन में भारी वृद्धि हुई जो 2015-16 और 2016-17 के बीच लगभग 46% तक बढ़ गई।[9] आठवें सीपीसी के सुझावों के अनुसार संशोधित वेतन संरचना 1 जनवरी, 2026 से प्रभावी होने की उम्मीद है।[10] इससे रक्षा पेंशन पर होने वाला खर्च और भी बढ़ जाएगा।
नवंबर 2015 में सरकार ने ओआरओपी के कार्यान्वयन को मंजूरी दी, जिसके लाभ 1 जुलाई, 2014 से प्रभावी हुए।[11] ओआरपी के तहत, समान रैंक और समान सेवा अवधि वाले सेवानिवृत्त कर्मियों को उनकी सेवानिवृत्ति की तिथि के बावजूद समान पेंशन का अधिकार है।[12] ओआरओपी के तहत पेंशन में हर पांच साल में संशोधन किया जाता है।12 1 जुलाई, 2014 से शुरू होने वाली आठ साल की अवधि में, ओआरओपी पर व्यय औसतन लगभग 7,123 करोड़ रुपए प्रति वर्ष रहा।11 1 जुलाई, 2024 से प्रभावी नवीनतम ओआरओपी संशोधन का वित्तीय प्रभाव 6,703 करोड़ रुपए प्रति वर्ष आंका गया है।[13]
15वें वित्त आयोग ने सुझाव दिय़ा कि मंत्रालय को वेतन और पेंशन संबंधी देनदारियों को कम करने के लिए कदम उठाने चाहिए।[14] सशस्त्र बलों में सैनिकों, नौसैनिकों और वायुसैनिकों की भर्ती के लिए अग्निपथ योजना दीर्घकालिक रूप से पेंशन व्यय को कम करने में सहायक हो सकती है।
पूंजीगत परिव्यय रक्षा बजट का 30% से भी कम
रक्षा बजट का वह हिस्सा जो पूंजीगत परिव्यय पर खर्च होता है, हाल के वर्षों में कम हुआ है। रक्षा के लिए पूंजीगत परिव्यय में निर्माण कार्य, मशीनरी और टैंक, नौसैनिक पोत और विमान जैसे उपकरणों पर होने वाला व्यय शामिल है। इसमें आरएंडडी तथा सीमावर्ती सड़कों के निर्माण पर होने वाला पूंजीगत व्यय भी शामिल है। 2014-15 से 2025-26 के बीच रक्षा बजट का 27% पूंजीगत परिव्यय पर खर्च होने का अनुमान है। 2026-27 में रक्षा परिव्यय का 29% पूंजीगत व्यय के लिए बजट में रखा गया है। रक्षा से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (2021) ने पाया था कि राजस्व व्यय और पूंजीगत परिव्यय का आदर्श अनुपात 60:40 है।[15]
रेखाचित्र 4: पूंजीगत परिव्यय बजट के अनुशंसित 40% से काफी कम है
नोट: BE: बजट अनुमान; RE: संशोधित अनुमान। स्रोत: केंद्रीय बजट दस्तावेज (विभिन्न वर्ष); पीआरएस।
तालिका 5: पूंजीगत परिव्यय के घटक
|
मद |
2024-25 |
2025-26 संअ |
2026-27 बअ |
|
एयरक्राफ्ट और एयरो इंजन |
26% |
37% |
28% |
|
अन्य उपकरण |
31% |
26% |
36% |
|
नौसैनिक बेड़ा |
15% |
11% |
11% |
|
अनुसंधान और विकास |
8% |
8% |
7% |
|
रक्षा मंत्रालय (असैनिक) |
6% |
6% |
5% |
|
नौसेना का डॉकयार्ड/परियोजनाएं |
3% |
2% |
2% |
|
भारी और मध्यम वाहन |
2% |
2% |
2% |
|
अन्य |
8% |
9% |
10% |
|
कुल |
100% |
100% |
100% |
नोट: रक्षा मंत्रालय (असैनिक) के अंतर्गत मुख्य रूप से तटरक्षक संगठन और सीमा सड़क विकास बोर्ड पर पूंजीगत व्यय शामिल है। अन्य मदों में सार्वजनिक उद्यमों, संयुक्त स्टाफ, राष्ट्रीय राइफल्स में निवेश, प्रोटोटाइप विकास के लिए सहायता और सेना एवं वायुसेना की विशेष परियोजनाएं शामिल हैं।
स्रोत: व्यय बजट, केंद्रीय बजट 2026-27; पीआरएस।
रक्षा मंत्रालय ने 15वें वित्त आयोग को प्रस्तुत अपने प्रस्ताव में बढ़ती आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए वैकल्पिक वित्तपोषण तंत्र की आवश्यकता पर बल दिया।[16] इस संबंध में बार-बार उठाया जाने वाला एक प्रस्ताव रक्षा पूंजीगत व्यय के लिए एक नॉन-लैप्सेबल कोष का निर्माण करना रहा है, क्योंकि अधिग्रहण कार्यक्रम कई वर्षों तक चलते हैं। 2004-05 के अंतरिम बजट में 25,000 करोड़ रुपए के कोष के साथ एक नॉन लैप्सेबल रक्षा आधुनिकीकरण कोष का प्रस्ताव रखा गया था।[17] रक्षा से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (2017) ने इस बात पर बल दिया कि परिचालन संबंधी तैयारी में सुधार के लिए ऐसा कोष आवश्यक है।[18] 15वें वित्त आयोग ने रक्षा और आंतरिक सुरक्षा के लिए एक नॉन-लैप्सेबल आधुनिकीकरण कोष स्थापित करने का भी सुझाव दिया है।16
हालांकि केंद्र सरकार ने कहा है कि संवैधानिक प्रावधान नॉन लैप्सेबल कोष बनाने की अनुमति नहीं देते हैं, और उसने समर्पित राजस्व स्रोतों के बिना सार्वजनिक खाते में ऐसा कोष स्थापित करने का विरोध किया है।18,[19], रक्षा मंत्रालय ने संकेत दिया है कि वित्त मंत्रालय नॉन लैप्सेबल आधुनिकीकरण कोष को क्रियान्वित करने के लिए एक वैकल्पिक तंत्र की तलाश कर रहा है।19 15वें वित्त आयोग ने इस कोष के वित्त पोषण के लिए कई स्रोतों से धन हस्तांतरित करने का सुझाव दिया, जैसे भारत की संचित निधि से हस्तांतरण, रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के विनिवेश से प्राप्त आय, अतिरिक्त रक्षा भूमि का मुद्रीकरण और सार्वजनिक परियोजनाओं के लिए हस्तांतरित की गई रक्षा भूमि से प्राप्त राशि।16 हालांकि 16वें वित्त आयोग (2026) की रिपोर्ट में ऐसे किसी कोष पर कोई सुझाव नहीं दिया गया।
प्रतिबद्ध देनदारियां: सशस्त्र बलों के पूंजीगत अधिग्रहण में दो घटक शामिल हैं: (i) प्रतिबद्ध देनदारियां और (ii) नई योजनाएं। प्रतिबद्ध देनदारियां वे भुगतान होते हैं जिनकी अपेक्षा किसी वित्तीय वर्ष के दौरान उन अनुबंधों के संबंध में की जाती है, जो पिछले वर्षों में संपन्न हुए हैं। नई योजनाओं में ऐसी नई परियोजनाएं शामिल हैं जो अनुमोदन के विभिन्न चरणों में हैं और भविष्य में कार्यान्वित होने की संभावना है। प्रतिबद्ध देनदारियों से संबंधित आंकड़े 2019-20 के बाद से सार्वजनिक रूप से जारी नहीं किए गए हैं।
तालिका 6: प्रतिबद्ध देनदारियां और आधुनिकीकरण बजट (करोड़ रुपए में)
|
वर्ष |
प्रतिबद्ध देनदारियां |
आधुनिकीकरण बजट |
कमी |
|
2016-17 |
73,553 |
62,619 |
15% |
|
2017-18 |
91,382 |
68,965 |
25% |
|
2018-19 |
1,10,044 |
73,883 |
33% |
|
2019-20 |
1,13,667 |
80,959 |
29% |
नोट: 2019-20 के बाद प्रतिबद्ध देनदारियां के आंकड़े सार्वजनिक रूप से जारी नहीं किए गए हैं।
स्रोत: रक्षा सेवाओं पर पूंजीगत परिव्यय, खरीद नीति और रक्षा योजना पर तीसरी रिपोर्ट, रक्षा संबंधित स्टैंडिंग कमिटी, दिसंबर 2019; पीआरएस।
रक्षा से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (2019) ने प्रतिबद्ध देनदारियों के व्यय को पूरा करने के लिए आवंटन में कमी पर चिंता व्यक्त की।[20] कमिटी ने कहा कि प्रतिबद्ध देनदारियों के लिए अपर्याप्त आवंटन कॉन्ट्रैक्चुअल दायित्वों के उल्लंघन का कारण बन सकता है, जिसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में अच्छा नहीं माना जाएगा।20 कमिटी (2022) ने मंत्रालय को प्रतिबद्ध देनदारियों और नई योजनाओं के लिए एक समर्पित कोष बनाने का सुझाव दिया है।[21] ये कोष अभी तक नहीं बनाए गए हैं।
आधुनिकीकरण बजट
थलसेना
तीनों सेनाओं में से थलसेना सबसे बड़ी है, चाहे बजट के लिहाज से हो या कर्मियों की संख्या के लिहाज से। थलसेना में अधिकारियों और सैनिकों सहित लगभग 12.5 लाख कर्मियों की स्वीकृत संख्या है। कर्मियों की विशाल संख्या के कारण, थलसेना अपने बजट का 80% से अधिक हिस्सा राजस्व मदों पर खर्च करती रही है।
आधुनिकीकरण में रक्षा क्षमताओं को उन्नत और मजबूत करने के लिए नवीनतम प्रौद्योगिकियों और हथियार प्रणालियों का अधिग्रहण शामिल है।[22] मंत्रालय के अनुसार, थलसेना उन्नत मारक क्षमता, गतिशीलता और रात्रि युद्ध क्षमताओं को प्राथमिकता दे रही है, साथ ही उभरते खतरों से निपटने के लिए ड्रोन और काउंटर-ड्रोन प्रौद्योगिकियों के उपयोग को बढ़ा रही है।[23]
रेखाचित्र 5: आधुनिकीकरण पर थलसेना का व्यय
स्रोत: केंद्रीय बजट दस्तावेज; पीआरएस।
रक्षा से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (2023) ने पाया कि थलसेना के पास आदर्श उपकरण मिश्रण की कमी है, जिसमें केवल 15% ही नई पीढ़ी के उपकरण हैं और पुराने उपकरणों का हिस्सा वांछित से अधिक (45%) है (तालिका 7)।[24] रक्षा से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (2025) ने यह भी पाया कि हालांकि कर्मियों का वेतन एक निश्चित और आवश्यक व्यय है, फिर भी बजट में आधुनिक हथियार प्रणालियों और महत्वपूर्ण सीमा अवसंरचना को प्राथमिकता दी जानी चाहिए, जिनसे समझौता नहीं किया जा सकता।23
तालिका 7: रक्षा उपकरणों का विवरण
|
प्रकार |
आदर्श मिश्रण |
भारतीय थलसेना |
|
नई पीढ़ी |
30% |
15% |
|
मौजूदा पीढ़ी |
40% |
40% |
|
पुरानी पीढ़ी |
30% |
45% |
स्रोत: 36वीं रिपोर्ट, रक्षा संबंधित स्टैंडिंग कमिटी, मार्च 2023; पीआरएस।
ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैनाती के दौरान आपूर्ति संबंधी कमियां: कैग (2019) के एक प्रदर्शन ऑडिट में सियाचिन और लद्दाख जैसे ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैनात सैनिकों के लिए आपूर्ति में कमियां पाई गईं।[25] आवश्यक कपड़ों और उपकरणों की खरीद में चार साल तक की देरी के कारण भारी कमी हो गई जिसमें स्नो गॉगल्स की भारी कमी और जूतों का जारी न होना शामिल है। इससे सैनिकों को पुराने गियर का पुन: उपयोग करने के लिए मजबूर होना पड़ा।25 रक्षा प्रयोगशाला द्वारा आरएंडडी की कमी के कारण आयात पर निर्भरता जारी रही।25 विकल्पों के माध्यम से विशेष राशन की मात्रा कम कर दी गई जिससे कैलोरी की मात्रा में 82% तक की गिरावट आई।25 आवास परियोजनाओं को तदर्थ तरीके से पूरा किया गया जिसके परिणामस्वरूप अनावश्यक लागत बढ़ी, संपत्ति हस्तांतरण में देरी हुई, उचित मंजूरी का अभाव रहा और रिकॉर्ड तथा जमीनी संपत्तियों के बीच विसंगतियां पाई गईं, जिससे दुर्गम क्षेत्रों में तैनात सैनिकों के कल्याण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।25
वायुसेना
तीनों सेनाओं द्वारा आधुनिकीकरण पर किए गए कुल व्यय में वायुसेना का हिस्सा लगातार सबसे अधिक रहा है। रक्षा से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (2024) ने इस बात पर प्रकाश डाला कि वायुसेना को उपलब्ध कराया गया पूंजीगत कोष बड़ी संख्या में लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए अपर्याप्त था।[26]
दिसंबर 2024 तक वायुसेना के पास 42 की स्वीकृत क्षमता के मुकाबले 31 सक्रिय लड़ाकू स्क्वाड्रन थे।26 प्रत्येक स्क्वाड्रन में लगभग 20 विमान होते हैं।[27] रक्षा से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (2024) ने कहा था कि वर्तमान परिस्थितियों में वायुसेना को कम से कम 180 लड़ाकू विमानों की आवश्यकता है।26 वायुसेना के पास मिग-21, मिग-23 और मिग-27 सहित एक पुराना बेड़ा भी है, जो चरणबद्ध तरीके से सेवामुक्त होने के करीब हैं।26 इनके सेवानिवृत्ति से वायुसेना की स्क्वाड्रन क्षमता में और गिरावट होने की उम्मीद है।26 रक्षा से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (2024) ने यह भी कहा था कि भारतीय वायुसेना के पास लगभग 130 प्रशिक्षण विमानों की कमी है।26
12 फरवरी, 2026 को रक्षा अधिग्रहण परिषद ने वायुसेना के लिए 114 राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद को मंजूरी दी।[28],[29] परिषद की अध्यक्षता रक्षा मंत्री करते हैं। रक्षा मंत्रालय ने बताया कि इनमें से अधिकांश राफेल विमानों का निर्माण भारत में ही किया जाएगा।28
रेखाचित्र 6: आधुनिकीकरण पर वायुसेना का व्यय
स्रोत: केंद्रीय बजट दस्तावेज; पीआरएस।
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ड्रोन भारत-पाकिस्तान संघर्ष (2025) के दौरान, पाकिस्तान ने उत्तरी और पश्चिमी भारत में सैन्य क्षेत्रों को निशाना बनाने के लिए स्वार्म ड्रोन तैनात किए।[30] स्वार्म ड्रोन स्वायत्त या अर्ध-स्वायत्त मानव रहित वाहन होते हैं जो एक समन्वित समूह में काम करते हैं।[31] वे वायरलेस नेटवर्क के माध्यम से एक दूसरे से संवाद करते हैं और साझा लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए रियल टाइम में खुद को समायोजित करते हैं।31 इनका उपयोग अक्सर दुश्मन के रडार सिस्टम को निष्क्रिय करने के लिए किया जाता है।31 2025 में अंतरराष्ट्रीय सीमा पर मुख्य रूप से पंजाब और राजस्थान में 791 ड्रोन घुसपैठ की सूचना मिली, जिनमें से 237 को निष्क्रिय कर दिया गया।32 वायुसेना मेहर बाबा प्रतियोगिता के माध्यम से मानवरहित और स्वायत्त हवाई प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा दे रही है जो उद्योग, शिक्षा जगत और उपयोगकर्ताओं को आपस में जोड़ती है और इसके परिणामस्वरूप पहले ही एक भारतीय स्टार्टअप को स्वार्म ड्रोन प्रणाली के लिए 300 करोड़ रुपए का ऑर्डर मिल चुका है।[32] सेना ने आंतरिक ड्रोन निर्माण क्षमता विकसित कर ली है और अब तक 819 ड्रोन बना चुकी है। |
वायुसेना ने अपने पुराने बेड़े को लगभग चौथी पीढ़ी की क्षमता तक उन्नत कर लिया है, हालांकि कुछ पुराने विमानों को अभी भी रखरखाव संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।26 डीआरडीओ पांचवीं पीढ़ी के विमान का विकास कर रहा है, लेकिन इसकी डिलीवरी अगले दशक में ही होने की उम्मीद है।26 पांचवीं पीढ़ी के विमान नवीनतम परिचालन लड़ाकू जेट हैं जिनमें स्टील्थ तकनीक, उन्नत रडार और सेंसर जैसी उन्नत विशेषताएं हैं।[33] उदाहरणों में एफ-35 (यूएसए) और सुखोई सु-57 (रूस) शामिल हैं। चीन ने दिसंबर 2024 में छठी पीढ़ी के दो विमान प्रोटोटाइपों का परीक्षण किया।[34] उम्मीद है कि ये विमान 2035 के आसपास विभिन्न प्रकार के युद्ध अभियानों के लिए परिचालन में आ जाएंगे।34
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भारत की वायु रक्षा प्रणालियां भारत की वायु रक्षा प्रणाली में खतरों का पता लगाने, उन पर नज़र रखने और उन्हें बेअसर करने के लिए कई प्रणालियां शामिल हैं। तालिका 8 में कुछ प्रणालियों का उदाहरण दिया गया है। संचार और रक्षा क्षमताओं को बढ़ाने के लिए जीएसएटी-7, जीएसएटी-7ए और ईएमआईएसएटी जैसे विशेष रक्षा उपग्रहों का प्रक्षेपण किया गया है।[35],[36],[37] वायुसेना की एकीकृत वायु कमान और नियंत्रण प्रणाली (आईएसीसीएस) सभी वायु रक्षा प्रणालियों और भारतीय वायुसेना के विभिन्न कमान केंद्रों से प्राप्त डेटा को एकीकृत करती है।[38] प्रधानमंत्री ने 2025 में मिशन सुदर्शन चक्र के आरंभ की घोषणा की।[39] यह महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की रक्षा और खतरों को रोकने के लिए एक बहुस्तरीय, स्वदेशी रक्षा और सुरक्षा प्रणाली है, जिसमें प्रभावी ढंग से जवाबी हमला करने की क्षमता है।39 तालिका 8: भारत में वायु रक्षा प्रणाली के घटक
स्रोत: सिपरी; पीआईबी; पीआरएस। |
नौसेना
नौसेना भारत की समुद्री सुरक्षा के लिए दो प्रकार के खतरों को कम करने का प्रयास करती है।26 ये खतरे निम्नलिखित हैं: (i) चीन और पाकिस्तान जैसे देशों से, और (ii) समुद्री डकैती और मादक पदार्थों की तस्करी जैसे गैर-पारंपरिक स्रोतों से।26 नौसेना ने 2018-19 से आधुनिकीकरण पर अपने व्यय में उल्लेखनीय वृद्धि की है।
विदेश मामलों से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (2025) ने कहा है कि हिंद महासागर में चीन की तेजी से बढ़ती नौसैनिक मौजूदगी भारत की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है।[40] कमिटी ने कहा कि चीन के पास अब दुनिया की सबसे बड़ी नौसेना है।40 यह प्रतिवर्ष 15 से अधिक जहाजों को शामिल करके और अपनी ताकत बढ़ाने के लिए नियमित रूप से पनडुब्बियों को तैनात करके अपने बेड़े का तेजी से विस्तार कर रहा है। चीन हर साल 15 से ज्यादा नए जंगी जहाज अपनी नौसेना में शामिल कर रहा है और अपनी ताकत दिखाने के लिए हिंद महासागर में लगातार अपनी पनडुब्बियां भी भेज रहा है।40 इसके अलावा पाकिस्तान की नौसेना चीन और तुर्कीए से नए जहाजों और प्रणालियों के साथ तेजी से आधुनिक हो रही है।40 भारतीय नौसेना वर्तमान में 137 जहाजों और पनडुब्बियों तथा 264 विमानों का संचालन करती है।40 इसके अलावा, भारतीय तटरक्षक बल 151 स्वदेशी रूप से निर्मित जहाजों और 78 विमानों के बेड़े का संचालन करता है।40 नौसेना के 53% जहाज 15 वर्ष से अधिक पुराने हैं।40 2040 तक इसके घटकर 20% होने की उम्मीद है।40 2025 तक 58 नौसैनिक जहाज निर्माणाधीन हैं और 62 अतिरिक्त जहाजों के निर्माण के लिए अनुमोदन प्राप्त हो चुके हैं।40 विदेश मामलों से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (2025) ने उन्नत पनडुब्बी रोधी युद्धपोतों, निगरानी विमानों और परमाणु-संचालित पनडुब्बियों को शामिल करके भारत की नौसैनिक क्षमताओं को उन्नत करने का अनुरोध किया।40
रेखाचित्र 7: 2018-19 के बाद से नौसेना के आधुनिकीकरण व्यय में उल्लेखनीय वृद्धि
स्रोत: केंद्रीय बजट दस्तावेज; पीआरएस।
भारत ने अप्रैल 2025 में फ्रांस के साथ 26 राफेल-मरीन जेट के लिए 63,000 करोड़ रुपए का समझौता किया।[41] ये जेट विमानवाहक जहाजों से संचालित हो सकते हैं और नौसैनिक अभियानों के लिए निर्मित हैं।41 नौसेना ने रक्षा से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (2024) को सूचित किया कि उसकी कई विमानन संपत्तियां रूसी मूल की हैं, जिसके कारण रखरखाव और पुर्जों के लिए मूल उपकरण निर्माताओं (ओईएम) पर निर्भरता बनी हुई है।[42] हालांकि ओईएम के साथ अनुबंध पर प्रतिबंध है, रक्षा मंत्रालय के अधीन एक अधिकार प्राप्त समिति विदेशी रखरखाव और खरीद की अनुमति देने के लिए मामले-दर-मामले छूट प्रदान करती है।42
रक्षा कर्मी
तीनों सेनाओं में सभी स्तरों पर कर्मियों की कमी का सामना करना पड़ रहा है
सशस्त्र बलों में भर्ती दो मुख्य श्रेणियों के अंतर्गत की जाती है: (i) अधिकारी, और (ii) अधिकारी रैंक से नीचे के कर्मी (पीबीओआर)। थलसेना में पीबीओआर को जूनियर कमीशंड ऑफिसर (जेसीओ) या अन्य रैंक (ओआर) के रूप में वर्गीकृत किया जाता है, जबकि नौसेना और वायुसेना में इन्हें क्रमशः नाविक और वायुसैनिक (एयरमेन) के रूप में वर्गीकृत किया जाता है। अधिकारियों और पीबीओआर दोनों की भर्ती कई प्रवेश मार्गों के माध्यम से की जाती है। उदाहरण के लिए, सेना में अधिकारियों की भर्ती राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, भारतीय सैन्य अकादमी और लघु सेवा आयोग जैसे संस्थानों के माध्यम से होती है।[43]
सेवानिवृत्ति, समयपूर्व सेवानिवृत्ति, चिकित्सा कारणों और दुर्घटनाओं के कारण तीनों सेवाओं में प्रतिवर्ष लगभग 60,000 रिक्तियां उत्पन्न होती हैं।[44] तीनों सेवाओं में मिलाकर लगभग 1.19 लाख कर्मियों की कमी है (तालिका 9), जो उनकी स्वीकृत संख्या का लगभग 8% है।
तालिका 9: कर्मचारियों की कमी
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बल |
पद |
स्वीकृत |
वर्तमान में कार्यरत |
कमी |
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संख्या |
% में |
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थलसेना |
अधिकारी |
50,538 |
42,095 |
8,443 |
17% |
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अधिकारी के रैंक से नीचे के कर्मी |
11,97,520 |
11,05,110 |
92,410 |
8% |
|
|
वायुसेना |
अधिकारी |
12,929 |
11,916 |
1,013 |
8% |
|
एयरमेन |
1,46,030 |
1,39,876 |
6,154 |
4% |
|
|
नौसेना |
अधिकारी |
11,979 |
10,202 |
1,777 |
15% |
|
नाविक |
76,649 |
67,530 |
9,119 |
12% |
|
|
कुल |
|
14,95,645 |
13,76,729 |
1,18,916 |
8% |
नोट: थलसेना में अधिकारियों की कमी से संबंधित आंकड़े जुलाई 2024 तक के हैं। नौसेना में कर्मचारियों की कमी से संबंधित आंकड़े अक्टूबर 2023 तक के हैं। शेष आंकड़े अक्टूबर 2024 तक के हैं।
स्रोत: रक्षा संबंधित स्टैंडिंग कमिटी की आठवीं रिपोर्ट, मार्च 2025; लोकसभा में तारांकित प्रश्न संख्या 1005, दिनांक 8 दिसंबर 2023 को उत्तर दिया गया, पीआरएस।
रक्षा मंत्रालय ने कहा है कि वह कर्मियों की कमी को दूर करने के लिए कदम उठा रहा है। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) व्यापक प्रचार अभियान, (ii) करियर मेलों और शैक्षणिक संस्थानों में कार्यक्रमों के माध्यम से जागरूकता अभियान, और (iii) करियर में प्रगति को बेहतर बनाने के लिए पात्र अल्पकालिक सेवा कमीशन अधिकारियों को स्थायी कमीशन प्रदान करना।44
सशस्त्र बलों में आयु वर्ग को कम करने के लिए सेवा अवधि में सुधार
राष्ट्रीय सुरक्षा पर मंत्रियों के समूह की रिपोर्ट (2001) में सशस्त्र बलों की हर समय सर्वोत्तम युद्ध क्षमता सुनिश्चित करने के लिए सेवाओं में युवा कर्मियों की भर्ती की आवश्यकता पर बल दिया गया था।[45] इसे प्राप्त करने के लिए कारगिल समीक्षा समिति (1999) ने सेवा अवधि को 17 वर्ष से घटाकर 7-10 वर्ष करने का सुझाव दिया था।45
जून 2022 में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सशस्त्र बलों में भर्ती के लिए अग्निपथ योजना को मंजूरी दी।[46] अब सभी भर्ती पीबीओआर स्तर पर अग्निपथ योजना के तहत की जा रही है।[47] इस योजना के तहत भर्ती किए गए उम्मीदवार चार साल तक सेवा करेंगे और सशस्त्र बलों के अंतर्गत एक अलग रैंक बनाएंगे, जिसे अग्निवीर के नाम से जाना जाता है।46 अग्निवीरों के प्रत्येक बैच से, 25% तक कर्मियों को सशस्त्र बलों के नियमित कैडर में भर्ती किया जाएगा।46 इस योजना से सशस्त्र बलों की औसत आयु में चार से पांच वर्ष की कमी आने की उम्मीद है।46 पीबीओआर सशस्त्र बलों की स्वीकृत संख्या के 95% से अधिक हैं (तालिका 9)। विभिन्न रैंकों के पीबीओआर की तुलना में, जो 15-37 वर्षों तक सेवा करते हैं, 75% अग्निवीरों का सेवाकाल केवल चार वर्ष तक सीमित है।[48] हालांकि सशस्त्र बलों की परिचालन तत्परता पर अग्निपथ योजना का प्रभाव अभी स्पष्ट नहीं है, लेकिन दीर्घकाल में इससे पेंशन व्यय में कमी आने की उम्मीद है। चूंकि कम से कम 75% अग्निवीर बिना पेंशन के सेवामुक्त होंगे, इसलिए इस योजना से कार्मिक संबंधी व्यय में कमी आने की संभावना है। चार वर्ष की सेवा पूरी होने पर, सशस्त्र बलों से सेवानिवृत्त होने वालों को 11.7 लाख रुपए का सेवा निधि पैकेज प्राप्त होगा।46 मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सेना भर्ती में आवश्यक किसी भी बदलाव का आकलन करने के लिए अग्निपथ योजना का आंतरिक सर्वेक्षण कर रही है।[49]
सशस्त्र बलों के अधिकारी कैडर में मुख्य रूप से स्थायी कमीशन प्राप्त अधिकारी होते हैं।48 सातवें केंद्रीय वेतन आयोग (2015) के अनुसार, अल्पकालिक सेवा कमीशन (एसएससी) पर भर्ती अधिकारियों के लिए सेवा समाप्ति के विकल्प आकर्षक नहीं हैं, जिसके परिणामस्वरूप एसएससी के लिए सीमित संख्या में ही भर्ती होती है।48 इनमें से बड़ी संख्या में अधिकारियों को स्थायी कमीशन में समायोजित कर लिया जाता है, जिससे अधिकारियों की औसत आयु बढ़ जाती है।48 वेतन आयोग ने एसएससी अधिकारियों को 7-10 वर्ष की सेवा के बीच सेवा समाप्ति की अनुमति देने का सुझाव दिया था, जिसमें उन्हें दसवें वर्ष के बजाय सातवें वर्ष में स्थायी कमीशन का विकल्प चुनने का अवसर दिया गया था। हालांकि, सरकार ने कहा है कि एसएससी अधिकारी मुख्य रूप से अधिकारियों की कमी को दूर करने के लिए 10-14 वर्षों तक सेवा करते हैं, और इस कार्यकाल को संशोधित करने का कोई प्रस्ताव नहीं है।[50]
यूएसए में सैन्य भर्ती की प्रारंभिक अवधि आठ वर्ष है, जबकि यूके में यह अवधि 12 वर्ष है। 48 यूएसए में पेंशन पात्रता के लिए 20 वर्ष की सेवा आवश्यक है, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 19% सक्रिय सेवा कर्मी पेंशन के साथ सेवानिवृत्त होते हैं।48
रक्षा उत्पादन और अधिग्रहण
भारत विश्व का दूसरा सबसे बड़ा हथियार आयातक देश, लेकिन रक्षा आधुनिकीकरण के लिए विदेशी स्रोतों पर निर्भरता घट रही है
भारत के हथियार आयात में 2015-19 और 2020-24 के बीच 9.3% की कमी आई।[51] सिपरी के आंकड़ों के अनुसार, भारत 2020 से 2024 के बीच हथियारों का दूसरा सबसे बड़ा आयातक था (रेखाचित्र 8)।[52] इस अवधि के दौरान आयातित हथियारों की कुल मात्रा में भारत का हिस्सा 8.3% था।52 उक्रेन, जो फरवरी 2022 से रूस के साथ युद्ध में है, 2020-24 के दौरान हथियारों का सबसे बड़ा आयातक था।52 इस अवधि के दौरान भारत के हथियार आयात में रूस की हिस्सेदारी 36% रही, लेकिन 2010-14 की तुलना में इसमें भारी गिरावट आई, जब यह हिस्सेदारी 72% थी।51 अब भारत को तेजी से फ्रांस, इज़राइल और यूएसए जैसे देशों से प्रमुख रक्षा उपकरण प्राप्त हो रहे हैं।51
2023-24 और 2024-25 (दिसंबर 2024 तक) में 337 रक्षा पूंजी अधिग्रहण अनुबंधों पर हस्ताक्षर किए गए। इनमें से 12 अनुबंध विदेशी विक्रेताओं (रूस, यूएसए और फ्रांस) के साथ किए गए।6 2020-21 और दिसंबर 2024 के बीच, विदेशी विक्रेताओं से खरीद 1,65,881 करोड़ रुपए की थी।6
रेखाचित्र 8: 2020-2024 के बीच हथियारों के शीर्ष 10 आयातक देश
स्रोत: सिपरी; पीआईबी; पीआरएस।
अप्रैल 2014 और दिसंबर 2024 के बीच रक्षा बलों ने अपने कुल आधुनिकीकरण व्यय का 35% से अधिक विदेशी स्रोतों से खरीद पर खर्च किया (रेखाचित्र 9)। 2023-24 में कुल आधुनिकीकरण व्यय का 28% विदेशी स्रोतों से खरीद पर खर्च किया गया। एस्टिमेट्स कमिटी (2018) ने यह कहा था कि विदेशी आपूर्तिकर्ताओं, विशेष रूप से सैन्य उपकरणों पर निर्भरता, भारत की सुरक्षा को जोखिम में डालती है क्योंकि आपातकालीन स्थितियों के दौरान आपूर्तिकर्ता आवश्यक हथियार या अतिरिक्त पुर्जे उपलब्ध नहीं करा सकते हैं।[53]
रक्षा से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (2023) ने कहा था कि भारत की अधिकांश रक्षा खरीद अमेरिकी डॉलर में की जाती है।[54] कमिटी ने कहा कि डॉलर के मुकाबले रुपए के मूल्य में किसी भी गिरावट से इस खरीद की प्रभावी लागत बढ़ जाती है और पिछले वर्ष की तुलना में रक्षा के लिए वित्तीय स्वीकृतियों में वास्तविक वृद्धि का आकलन करते समय इसे ध्यान में रखा जाना चाहिए।54 1 जनवरी, 2025 और 4 फरवरी, 2026 के बीच, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपए का लगभग 5.6% मूल्यह्रास हुआ।[55]
आयात कम करने के लिए मंत्रालय ने पांच सकारात्मक स्वदेशीकरण सूचियां भी जारी की हैं।6 इन सूचियों में 5,012 रक्षा उपकरण शामिल हैं जिन पर चरणबद्ध तरीके से आयात प्रतिबंध लगाया गया है।6 दिसंबर 2024 तक, पांचों सूचियों में अधिसूचित वस्तुओं में से 61% का स्वदेशीकरण हो चुका है।6
रेखाचित्र 9: रक्षा आधुनिकीकरण व्यय में घरेलू और विदेशी स्रोतों की हिस्सेदारी
नोट: 2024-25 के आंकड़े दिसंबर 2024 तक के हैं।
स्रोत: रक्षा संबंधित स्टैंडिंग कमिटी की तीसरी रिपोर्ट, मार्च 2025; पीआरएस।
रक्षा उत्पादन में वृद्धि, लेकिन गुणवत्ता संबंधी समस्याएं सामने आई हैं
भारत के घरेलू रक्षा उत्पादन में 2016-17 और 2024-25 के बीच 8% की वार्षिक दर से वृद्धि हुई है। 2024-25 में घरेलू रक्षा उत्पादन 1.54 लाख करोड़ रुपए रहा। इस अवधि के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) का घरेलू रक्षा उत्पादन में औसतन 80% योगदान रहा। मंत्रालय का लक्ष्य 2028-29 तक तीन लाख करोड़ रुपए का स्वदेशी रक्षा उत्पादन हासिल करना है।[56] इसके लिए, घरेलू रक्षा उत्पादन में 2024-25 की तुलना में 18% की वार्षिक दर से वृद्धि करनी होगी। सिपरी (2022) ने पाया है कि भारत के स्वदेशी रूप से डिजाइन किए गए रक्षा प्लेटफॉर्म अभी भी इंजन और रडार जैसे महत्वपूर्ण घटकों के आयात पर निर्भर हैं।[57]
रेखाचित्र 10: भारत का रक्षा उत्पादन (करोड़ रुपए में)
स्रोत: रक्षा उत्पादन विभाग; पीआरएस।
2021 में ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड की उत्पादन इकाइयों को सात नए रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (पीएसयू) में परिवर्तित कर दिया गया।[58] ये पीएसयू रक्षा सेवाओं के लिए विभिन्न वस्तुओं के उत्पादन में लगे हुए हैं, जैसे: (i) गोला-बारूद और विस्फोटक, (ii) वाहन, (iii) हथियार और उपकरण, और (iv) पैराशूट। 2021-22 और 2026-27 की अवधि के लिए, सरकार ने इन पीएसयू को पूंजीगत व्यय के लिए 8,745 करोड़ रुपए आवंटित किए हैं।[59] 2024-25 तक, आधुनिकीकरण और आरएंडडी के लिए 5,757 करोड़ रुपए वितरित किए जा चुके थे।59 31 दिसंबर 2024 तक इन पीएसयू के पास अगले पांच वर्षों के लिए 78,984 करोड़ रुपए का ऑर्डर था।59
ऑर्डिनेंस फैक्ट्री के बने उपकरणों की गुणवत्ता को लेकर चिंताएं जताई गई हैं। कैग की एक ऑडिट रिपोर्ट में पाया गया कि 2015-16 और 2019-20 के बीच, थलसेना ने इन कारखानों द्वारा निर्मित छोटे हथियारों से संबंधित कई दुर्घटनाओं की सूचना दी।[60] इसका कारण पुर्जों में खराबी और विनिर्देशों के अनुरूप न होने वाली सामग्रियों का उपयोग बताया गया।60 कैग ने छोटे हथियारों के कारखानों में बहुत अधिक ऊपरी खर्चों पर भी गौर किया जिससे प्रति इकाई उत्पादन लागत बढ़ गई।60 2016-17 और 2018-19 के बीच स्वदेशी आरएंडडी से अपेक्षित परिणाम न मिलने के कारण सशस्त्र बलों को छोटे हथियार आयात करने पड़े।60
विलंब और खरीद प्रक्रिया में लगने वाला लंबा समय
रक्षा मंत्रालय (2024) के अनुसार, रक्षा उपकरणों की खरीद में 19 से 26 महीने लग सकते हैं।[61] स्टैंडिंग कमिटी (2024) ने रणनीतिक जोखिमों को देखते हुए इस समयसीमा को काफी लंबा बताया।61 इससे खरीदी जा रही तकनीक अप्रचलित हो सकती है, जिससे भारत की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। कमिटी ने मंत्रालय को रक्षा खरीद में तेजी लाने के तरीके खोजने का सुझाव दिया।61
जुलाई 2020 में रक्षा अधिग्रहण परिषद ने त्वरित प्रक्रिया के तहत थलसेना के लिए आपातकालीन खरीद को मंजूरी दी जिसमें त्वरित अधिग्रहण को सक्षम बनाने के लिए अतिरिक्त छूट भी शामिल थी।[62] कैग (2025) ने पाया कि जांच किए गए 72% अनुबंधों में, डिलीवरी निर्धारित समय सीमा के बाद देर से की गई।62
हल्के लड़ाकू विमान (एलसीए) को 1983 में मंजूरी मिली थी ताकि 8 से 10 साल में पुराने मिग-21 और मिग-27 विमानों को हटाया जा सके, लेकिन तकनीकी देरी की वजह से इसे सेना में शामिल करने में 2016 तक का समय लग गया।[63],[64] 2021 में वायुसेना ने एचएएल से 83 तेजस एमके-1ए विमानों का अनुबंध किया, जिनकी डिलीवरी फरवरी 2024 से निर्धारित थी।26,[65] डिजाइन और विकास संबंधी समस्याओं के कारण कार्यक्रम में तब से विलंब हो रहा है।26 रक्षा से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (2024) ने सलाह दी कि अगर स्वदेशी लड़ाकू विमान उत्पादन में देरी जारी रहती है, तो सरकार को पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान सीधे खरीदने पर विचार करना चाहिए।26 कैग (2024) ने कहा था कि 2008 में अनुबंधित विमानों के अपग्रेड, जिन्हें मूल रूप से 2014 तक पूरा किया जाना था, उनमें देरी हुई और वे केवल 2022 में जाकर पूरे हुए।[66]
कई नौसैनिक खरीद परियोजनाओं में लंबे समय तक देरी हुई है। प्रोजेक्ट-75 के तहत, दिसंबर 2017 तक शामिल होने वाली छह पनडुब्बियों को बार-बार समय सीमा बढ़ाने के बाद जनवरी 2025 तक ही सेवा में शामिल किया जा सका।26
रक्षा उत्पादन में वृद्धि के बावजूद, वैश्विक निर्यात में भारत की हिस्सेदारी कम है
2016-17 और 2025-26 के बीच रक्षा निर्यात में 38% की वार्षिक वृद्धि दर से बढ़ोतरी हुई है। इस अवधि के दौरान रक्षा निर्यात में निजी कंपनियों का औसत योगदान 63% रहा है (रेखाचित्र 11)। उल्लेखनीय है कि भारत के रक्षा निर्यात में वृद्धि 2016-17 के निम्न स्तर से हुई है, जब भारत ने 1,522 करोड़ रुपए के रक्षा सामान का निर्यात किया था।[67] 2025-26 में, भारत का रक्षा निर्यात 26,848 करोड़ रुपए था।67 भारत 80 से अधिक देशों को रडार और बख्तरबंद सुरक्षा वाहन जैसी वस्तुओं का निर्यात करता है।[68]
रक्षा निर्यात में वृद्धि के बावजूद वैश्विक हथियार निर्यात में भारत की हिस्सेदारी बहुत कम है। सिपरी के अनुसार, 2020 से 2024 के बीच वैश्विक स्तर पर निर्यात किए गए हथियारों की कुल मात्रा में भारत का हिस्सा 0.2% था।[69] इस अवधि में, यूएसए, फ्रांस और रूस का वैश्विक हथियार निर्यात में क्रमशः 43%, 10% और 8% हिस्सा था।69 इसके अलावा, चीन का वैश्विक हथियार निर्यात में 6% हिस्सा था।69
रेखाचित्र 11: रक्षा निर्यात में निजी क्षेत्र की प्रमुख भूमिका
स्रोत: रक्षा उत्पादन विभाग; पीआरएस।
रक्षा व्यय में अनुसंधान एवं विकास (आरएंडडी) की हिस्सेदारी में गिरावट देखी गई है
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) विमानन, हथियार, लड़ाकू वाहन और मिसाइलों जैसे क्षेत्रों में रणनीतिक और सामरिक सैन्य उपकरण बनाता है।[70] हाल के वर्षों में, आरएंडडी के लिए रक्षा बजट का अनुपात कम हुआ है (रेखाचित्र 12)। 2014-15 में कुल रक्षा व्यय का 4.7% आरएंडडी पर खर्च किया गया था। 2026-27 के बजट अनुमानों के अनुसार, रक्षा व्यय का 3.7% आरएंडडी पर खर्च होने का अनुमान है। 2014-15 से 2026-27 की अवधि में रक्षा संबंधी आरएंडडी पर व्यय में 7% की वार्षिक दर से वृद्धि होने का अनुमान है।
रेखाचित्र 12: रक्षा बजट का अनुसंधान एवं विकास पर खर्च होने वाला हिस्सा घट गया है
स्रोत: केंद्रीय बजट दस्तावेज (विभिन्न वर्ष); पीआरएस।
2022 से रक्षा आरएंडडी बजट का 25% उद्योग, स्टार्टअप और अकादमिक संस्थानों के लिए निर्धारित किया गया है, जिसके परिणामस्वरूप डीआरडीओ की परियोजनाओं के लिए धनराशि की कमी हो गई है।[71] इस पहल के तहत व्यय 2023-24 में आवंटन से अधिक हो गया और 2024-25 में भी ऐसा ही होने की संभावना है।71 इसके साथ ही केंद्रीय बजट 2024 में रक्षा के लिए नई गहन प्रौद्योगिकी पहलों की घोषणा की गई, जिसमें डीआरडीओ के मौजूदा आरएंडडी बजट से लगभग 2,000 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं।71 इसे ध्यान में रखते हुए रक्षा मंत्रालय ने अगले दशक में आरएंडडी खर्च को रक्षा बजट के लगभग 10% तक क्रमिक रूप से बढ़ाने की मांग की है।71
डीआरडीओ ने स्वदेशी रक्षा अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए कुछ उपाय किए हैं। मंत्रालय के अनुसार, डीआरडीओ ने उद्योग द्वारा विकास के लिए 183 प्रणालियां निर्धारित की हैं, जिन पर डीआरडीओ काम नहीं करेगा।71 आगे चलकर, डीआरडीओ प्रमुख हथियार प्रणालियों, प्लेटफार्मों और सेंसरों के लिए प्रौद्योगिकियों के विकास पर ध्यान केंद्रित करेगा।71
प्रौद्योगिकी विकास कोष के तहत, भारतीय कंपनियों और संस्थानों को रक्षा और दोहरे उपयोग वाली प्रौद्योगिकी विकसित करने के लिए अनुदान प्रदान किया जाता है।[72] इस योजना के तहत 81 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है, जिनमें 344 करोड़ रुपए की प्रतिबद्धता शामिल है।[73] घरेलू अनुसंधान को समर्थन देने के लिए डीआरडीओ की अन्य पहलों में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) भारतीय उद्योगों को डीआरडीओ पेटेंट के मुफ्त उपयोग की सुविधा, (ii) निजी और सार्वजनिक उद्यमों को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, और (iii) कुछ चिन्हित क्षेत्रों में अनुसंधान के लिए अकादमिक संस्थानों को सहयोग।72 डीआरडीओ ने भारतीय उद्योगों को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण के लिए 1,918 लाइसेंसिंग समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं।73
डीआरडीओ की परियोजनाओं में विलंब
डीआरडीओ की कई परियोजनाओं में लगातार देरी हो रही है। कैग (2022) ने 178 परियोजनाओं की समीक्षा की और पाया कि 119 परियोजनाएं अपनी निर्धारित समय-सीमा को पूरा करने में विफल रहीं, और 49 मामलों में देरी मूल अवधि से अधिक हो गई।[74] इसके अलावा, कुछ परियोजनाओं को प्रमुख उद्देश्यों और प्रदर्शन मानकों को पूरा न करने के बावजूद सफल घोषित कर दिया गया।74
रक्षा से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (2023) ने पाया है कि इस तरह की देरी नियमित हो गई है, जिसके परिणामस्वरूप लागत में वृद्धि हुई है और सशस्त्र बलों के लिए महत्वपूर्ण क्षमताओं को शामिल करने में भी विलंब हुआ है।74 उसने डीआरडीओ की आंतरिक समीक्षा प्रक्रियाओं को मजबूत करने और परियोजना निगरानी में तकनीकी विशेषज्ञों की अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने का सुझाव दिया।[75]
[1] 40th Report: Demands for Grants (2018-19) General Defence Budget, Border Roads Organisation, Indian Coast Guard, Military Engineer Services, Directorate General Defence Estates, Defence Public Sector Undertakings, Welfare of Ex-Servicemen, Defence Pensions, Ex-servicemen Contributory Health Scheme, Standing Committee on Defence, Lok Sabha, March 12, 2018, https://sansad.in/getFile/lsscommittee/Defence/16_Defence_40.pdf?source=loksabhadocs.
[2] Military Expenditure Database, SIPRI, as accessed on February 2, 2026, https://www.sipri.org/databases/milex.
[3] Report for 2026-31, Volume I – Main Report, 16th Finance Commission, February 2026, https://fincomindia.nic.in/asset/doc/commission-reports/16th-FC/reports/Vol1-Main-Report.pdf.
[4] “Record over Rs 6.21 lakh crore allocation to Ministry of Defence in Interim Union Budget 2024-25; 4.72% more than FY 2023-24”, Press Information Bureau, February 1, 2024, https://www.pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=2001375®=3&lang=2#:~:text=In%20the%20current%20geopolitical%20scenario,the%20Financial%20Year%202024%2D25.
[5] First Report, General Defence Budget, Border Roads Organisation, Indian Coast Guard, Defence Estates Organisation, Defence Public Sector Undertakings, Welfare Of Ex-Servicemen And Defence Pension, Standing Committee on Defence, December 2024, https://eparlib.sansad.in/bitstream/123456789/2982216/1/18_Defence_1.pdf#search=null%20[2000%20TO%202025]%2018%20Committee%20on%20Defence.
[6] Ninth Report, Capital Outlay on Defence Services, Defence Planning, Procurement Policy and Defence Pensions, Standing Committee on Defence, Lok Sabha, March 2025, https://eparlib.sansad.in/bitstream/123456789/2989702/1/18_Defence_9.pdf.
[7] 34th Report, Human Resource Planning, Shortage of Manpower, Infusion of Hi-Tech Training and Infrastructure for the Armed Forces, Standing Committee on Defence, February 2009, https://eparlib.sansad.in/bitstream/123456789/62705/1/14_Defence_34.pdf.
[8] Website of the Department of Ex-servicemen Welfare, as accessed on February 6, 2027, https://desw.gov.in/pensions.
[9] Starred Question No. 83, Lok Sabha, Ministry of Finance, July 22, 2016, https://sansad.in/getFile/loksabhaquestions/annex/9/AS83.pdf?source=pqals.
[10] Cabinet approves Terms of Reference of 8th Central Pay Commission, Press Information Bureau, October 28, 2025, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2183289®=3&lang=2#:~:text=changes%20required%20thereon.-,Usually%2C%20the%20recommendations%20of%20the%20pay%20commissions%20are%20implemented%20after,benefits%20of%20Central%20Government%20employees.
[11] Unstarred Question No. 449, Lok Sabha, Ministry of Defence, February 3, 2023, https://sansad.in/getFile/loksabhaquestions/annex/1711/AU449.pdf?source=pqals.
[12] One Rank One Pension, Department of Ex-servicemen Welfare, https://www.desw.gov.in/sites/default/files/OROP-English.pdf.
[13] Unstarred Question No. 1881, Lok Sabha, Ministry of Defence, December 6, 2024, https://sansad.in/getFile/loksabhaquestions/annex/183/AU1881_Qi8o4Y.pdf?source=pqals.
[14] Chapter 11, Defence and Internal Security, Volume-I Main Report, 15th Finance Commission, October 2020, https://fincomindia.nic.in/asset/doc/commission-reports/XVFC%20VOL%20I%20Main%20Report.pdf.
[15] 21st Report, Demands for Grants (2021-22) Capital Outlay on Defence Services, Procurement Policy, Defence Planning and Married Accommodation Project, Standing Committee on Defence, Lok Sabha, March 2021, https://loksabhadocs.nic.in/lsscommittee/Defence/17_Defence_21.pdf.
[16] Volume I - Main Report, Fifteenth Finance Commission, October 2020, https://fincomindia.nic.in/asset/doc/commission-reports/XVFC%20VOL%20I%20Main%20Report.pdf.
[17] Speech of Finance Minister, Interim Budget 2004-2005, February 3, 2004, https://www.indiabudget.gov.in/doc/bspeech/bs200405(I).pdf.
[18] 32nd Report: Creation of Non-Lapsable Capital Fund Account, Instead of the Present System, Standing Committee on Defence, Lok Sabha, August 2017, https://sansad.in/getFile/lsscommittee/Defence/16_Defence_32.pdf?source=loksabhadocs.
[19] Unstarred Question No. 1110, Lok Sabha, Ministry of Defence, December 8, 2023, https://sansad.in/getFile/loksabhaquestions/annex/1714/AU1110.pdf?source=pqals.
[20] Third Report, Demands for Grants (2019-20), Capital Outlay on Defence Services, Procurement Policy, Defence Planning and Married Accommodation Project, December 2019, https://sansad.in/getFile/lsscommittee/Defence/17_Defence_3.pdf?source=loksabhadocs.
[21] 28th Report: Capital Outlay on Defence Services. Procurement Policy, Defence Planning and Married Accommodation Project (Demand No. 21), Standing Committee on Defence, Lok Sabha, March 2022, https://sansad.in/getFile/lsscommittee/Defence/17_Defence_28.pdf?source=loksabhadocs.
[22] Ninth Report, Capital Outlay on Defence Services, Defence Planning, Procurement Policy and Defence Pensions, Standing Committee on Defence, Lok Sabha, March 2025, https://eparlib.sansad.in/bitstream/123456789/2989702/1/18_Defence_9.pdf.
[23] Eighth Report, Army, Air Force, Navy, Joint Staff, Ex-Servicemen Contributory Health Scheme and Directorate General of Armed Forces Medical Services, Standing Committee on Defence, Lok Sabha, March 2025, https://eparlib.sansad.in/bitstream/123456789/2989701/1/18_Defence_8.pdf.
[24] 36th Report: Demands for Grants (2023-24), Army, Navy, Air Force, Joint Staff, Ex-Servicemen Contributory Health Scheme and Sainik Schools, Standing Committee on Defence, Lok Sabha, March 21, 2023, https://sansad.in/getFile/lsscommittee/Defence/17_Defence_36.pdf?source=loksabhadocs.
[25] CAG’s Audit report on Union Government (Defence Services) Army presented in Parliament, Press Release, Comptroller and Auditor General of India, February 3, 2020, https://cag.gov.in/uploads/PressRelease/PR-Press-Brief-Report-no-16-05f19941ebcdbc7-81616480.pdf.
[26] Second Report: Demands for Grants (2024-25), Army, Navy, Air Force, Joint Staff and Ex-Servicemen Contributory Health Scheme, Standing Committee on Defence, Lok Sabha, December 17, 2024, https://sansad.in/getFile/lsscommittee/Defence/18_Defence_2.pdf?source=loksabhadocs.
[27] Thirty Sixth Report, Army, Navy, Air Force, Joint Staff, Ex Health Scheme and Sainik Schools, Standing Committee on Defence, Lok Sabha, March 17, 2023, https://sansad.in/getFile/lsscommittee/Defence/17_Defence_36.pdf?source=loksabhadocs.
[28] “DAC clears Rs 3.60 lakh crore worth of capital acquisition proposals to enhance the combat readiness of defence force”, Press Information Bureau, Ministry of Defence, February 12, 2026, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2227018®=3&lang=2.
[29] "First time Rafale will be built outside France with major localisation: Defence Secretary in DAC's nod for 114 jets”, ANI, February 13, 2026, https://aninews.in/news/national/general-news/first-time-rafale-will-be-built-outside-france-with-major-localisation-defence-secretary-after-dacs-nod-to-buy-114-jets20260213133604/.
[30] Pakistan’s bid to escalate negated- proportionate response by India, Ministry of Defence, May 8, 2025, https://www.pib.gov.in/PressReleseDetailm.aspx?PRID=2127670.
[31] Swarm Robotics, United Nations Institute for Disarmament Research, https://unidir.org/files/2020-04/UNIDIR%20Swarm%20Robotics%20-%202020.pdf.
[32] Ministry of Defence; Year End Review – 2025, Press Information Bureau, December 31, 2025, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2210154®=3&lang=2.
[33] F-35 Joint Strike Fighter (JSF) Program, Congressional Research Service, May 2, 2022, https://sgp.fas.org/crs/weapons/RL30563.pdf.
[34] Annual Report to Congress: Military and Security Developments Involving the People’s Republic of China 2025, US Department of Defence, 2025, https://media.defense.gov/2025/Dec/23/2003849070/-1/-1/1/ANNUAL-REPORT-TO-CONGRESS-MILITARY-AND-SECURITY-DEVELOPMENTS-INVOLVING-THE-PEOPLES-REPUBLIC-OF-CHINA-2025.PDF.
[35] GSAT-7, ISRO, as accessed on January 29, 2026, https://www.isro.gov.in/GSAT_7.html.
[36] GSAT-7A, ISRO, as accessed on January 29, 2026, https://www.isro.gov.in/GSAT_7A.html.
[37] EMISAT, ISRO, as accessed on January 29, 2026, https://www.isro.gov.in/EMISAT.html.
[38] Operation SINDOOR: The Rise of Aatmanirbhar Innovation in National Security, Press Information Bureau, May 14, 2025, https://static.pib.gov.in/WriteReadData/specificdocs/documents/2025/may/doc2025514554901.pdf.
[39] Union Home Minister and Minister of Cooperation, Shri Amit Shah, terms Prime Minister Shri Narendra Modi’s address to the nation on the 79th Independence Day as a roadmap of the past 11 years’ progress, the strength of the present, and a strategy for a prosperous India, Press Information Bureau, August 15, 2025, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2156863&utm_source=chatgpt.com®=3&lang=2.
[40] Eighth Report, Evaluation of India’s Indian Ocean Strategy, Standing Committee on External Affairs, Lok Sabha, August, 2025, https://sansad.in/getFile/lsscommittee/External%20Affairs/18_External_Affairs_8.pdf?source=loksabhadocs.
[41] Rafale-Marine: Enhancing India's Naval Strength, Press Information Bureau, April 29, 2025, https://www.pib.gov.in/PressNoteDetails.aspx?ModuleId=3&NoteId=154353®=3&lang=2.
[42] Second Report: Demands for Grants (2024-25), Army, Navy, Air Force, Joint Staff and Ex-Servicemen Contributory Health Scheme, Standing Committee on Defence, Lok Sabha, December 17, 2024, https://sansad.in/getFile/lsscommittee/Defence/18_Defence_2.pdf?source=loksabhadocs.
[43] “Join Indian Army”, Recruitment Portal for Indian Army, as accessed on January 29, 2026, https://www.joinindianarmy.nic.in/default.aspx.
[44] Unstarred Question No. 2443, Rajya Sabha, Ministry of Defence, August 8, 2022, https://sansad.in/getFile/annex/257/AU2443.pdf?source=pqars.
[45] Report of the Group of Ministers on National Security, February 19, 2001, https://www.vifindia.org/sites/default/files/GoM%20Report%20on%20National%20Security.pdf.
[46] “In a transformative reform, Cabinet clears ‘Agnipath’ scheme for recruitment of youth in the armed forces”, Press Information Bureau, Ministry of Defence, June 14, 2022, https://www.pib.gov.in/PressReleseDetailm.aspx?PRID=1833747®=3&lang=2.
[47] Unstarred Question No. 1321, Rajya Sabha, Ministry of Defence, December 19, 2022, https://sansad.in/getFile/annex/258/AU1321.pdf?source=pqars.
[48] Report of the Seventh Central Pay Commission, November, 2015, https://doe.gov.in/files/cenetral-pay_document/7cpc_report_eng.pdf.
[49] “Army conducts own survey on scheme for Agniveers, may recommend tweaks”, The Indian Express, May 23, 2024, https://indianexpress.com/article/india/army-conducts-own-survey-on-scheme-for-agniveers-may-suggest-tweaks-9346007/.
[50] Unstarred Question No. 1034, Lok Sabha, Ministry of Defence, December 4, 2015, https://sansad.in/getFile/loksabhaquestions/annex/6/AU1034.pdf?source=pqals.
[51] Trends in International Arms Transfers 2024, Stockholm International Peace Research Institute, March 2025, https://www.sipri.org/sites/default/files/2025-03/fs_2503_at_2024_0.pdf.
[52] Arms transfers database, Stockholm International Peace Research Institute, https://armstransfers.sipri.org/ArmsTransfer/ImportExport.
[53] 29th Report: Preparedness of Armed Forces- Defence Production and Procurement, Committee on Estimates, July 25, 2018, https://sansad.in/getFile/lsscommittee/Estimates/16_Estimates_29.pdf?source=loksabhadocs.
[54] 37th Report: Demands for Grants (2023-24) Capital Outlay on Defence Services, Procurement Policy and Defence Planning, Standing Committee on Defence, Lok Sabha, March 21, 2023, https://sansad.in/getFile/lsscommittee/Defence/17_Defence_37.pdf?source=loksabhadocs.
[55] Reference Rate Archive, Reserve Bank of India, https://www.rbi.org.in/scripts/referenceratearchive.aspx.
[56] “Rs three lakh crore annual defence production & Rs 50,000 crore exports expected by 2028-29: Raksha Mantri Shri Rajnath Singh”, Press Information Bureau, Ministry of Defence, February 24, 2024, https://pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2008632.
[57] Arms-Production Capabilities in the Indo-Pacific Region, Stockholm International Peace Research Institute, October 2022, https://www.sipri.org/sites/default/files/2022-10/1022_indopacific_arms_production.pdf.
[58] “Splitting of OFBs”, Press Information Bureau, Ministry of Defence, November 29, 2021, https://pib.gov.in/Pressreleaseshare.aspx?PRID=1776096.
[59] Tenth Report: Demands for Grants (2025-26), Defence Public Sector Undertakings, Directorate of Ordnance (Coordination and Services–New DPSUs), Directorate General of Quality Assurance, Directorate General of Aeronautical Quality Assurance and National Cadet Corps, Standing Committee on Defence, Lok Sabha, March 17, 2025, https://eparlib.sansad.in/bitstream/123456789/2989703/1/18_Defence_10.pdf.
[60] Performance Audit Report on “Production of Small Arms in Ordnance Factories” Presented in Parliament, Office of the Comptroller and Auditor General of India, March 27, 2023, https://cag.gov.in/uploads/PressRelease/PR-Press-Brief-English-Report-No-5-of-2023-064230a68abcab2-09764714.pdf.
[61] Third Report: Demands for Grants (2024-25), Capital Outlay on Defence Services, Procurement Policy and Defence Planning, Standing Committee on Defence, Lok Sabha, December 17, 2024, https://sansad.in/getFile/lsscommittee/Defence/18_Defence_3.pdf?source=loksabhadocs.
[62] CAG Audit Report on Defence Services-Army Presented in Parliament, Comptroller and Auditor General of India, December 18, 2025, https://cag.gov.in/uploads/PressRelease/PR-Press-Brief-Report-No-28-of-2025-english-06944f3569fc990-08485789.pdf.
[63] 114th Report: Design, Development, Manufacture and Induction of Light Combat Aircraft (LCA), Public Accounts Committee, Lok Sabha, December 14th 2018, https://eparlib.nic.in/bitstream/123456789/783969/1/16_Public_Accounts_114.pdf.
[64] “Prime Minister Flies in the Indigenously Designed, Developed and Manufactured Twin Seater Fighter Aircraft LCA Tejas”, Press Information Bureau, Ministry of Defence, November 25, 2023, https://pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=1979812.
[65] Rs. 48,000 Crore Contract for 83 Light Combat Aircraft (LCA) Tejas handed over to HAL at the Inaugural Ceremony of Aero India 2021, Press Information Bureau, Ministry of Defence, February 3, 2021, https://www.pib.gov.in/Pressreleaseshare.aspx?PRID=1694844®=3&lang=2.
[66] Report of the Comptroller and Auditor General of India, Union Government, Defence Services (Air Force) for the year ended March 2021, presented in Parliament, Office of the Comptroller and Auditor General of India, December 17, 2024,
https://cag.gov.in/uploads/PressRelease/PR-English-Press-Release-on-Audit-Report-No-16-of-2024-067619586015be4-22082486.pdf.
[67] Defence Exports, Department of Defence Production, accessed on February 10, 2026, https://ddpdashboard.gov.in/defence-exports.
[68] Annual Report 2023-24, Department of Defence Production, Ministry of Defence, https://www.ddpmod.gov.in/sites/default/files/57cfea92938b03f670763d972acabf946f5cf7bd47c6252b78aede2f466d0214/aa2dde469a046132ce341e7e686e18eba17f1a007e9519a8658715109a3a729a.pdf.
[69] Arms Transfers Database, SIPRI, as accessed on February 10, 2026, https://armstransfers.sipri.org/ArmsTransfer/ImportExportTop.
[70] 38th Report: Demands for Grants (2023-24), Directorate of Ordnance (Coordination and Services) – New DPSUs, Defence Research and Development Organisation and National Cadet Corps, Standing Committee on Defence, Lok Sabha, March 21, 2023, https://sansad.in/getFile/lsscommittee/Defence/17_Defence_38.pdf?source=loksabhadocs.
[71] Seventh Report, General Defence Budget, Border Roads Organisation, Indian Coast Guard, Defence Estates Organisation, Welfare of Ex Research and Development Organisation, Standing Committee on Defence, Lok Sabha, March 17, 2025, https://eparlib.sansad.in/bitstream/123456789/2989700/1/18_Defence_7.pdf#search=seventh%20report%20standing%20committee%20on%20defence%20defence%20research.
[72] “Technology Development Fund”, Press Information Bureau, Ministry of Defence, December 8, 2023, https://pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=1983971.
[73] Unstarred Question No. 3353, Lok Sabha, Ministry of Defence, August 8, 2025, https://sansad.in/getFile/loksabhaquestions/annex/185/AU3353_B2HSv6.pdf?source=pqals.
[74] 38th Report: Demands for Grants (2023-24), Directorate of Ordnance (Coordination and Services) – New DPSUs, Defence Research and Development Organisation and National Cadet Corps, Standing Committee on Defence, Lok Sabha, March 21, 2023, https://sansad.in/getFile/lsscommittee/Defence/17_Defence_38.pdf?source=loksabhadocs.
[75] 42nd Report: A Review of the Working of the Defence Research and Development Organisation (DRDO), Standing Committee on
Defence, Lok Sabha, December 20, 2023, https://sansad.in/getFile/lsscommittee/Defence/17_Defence_42.pdf?source=loksabhadocs.
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