मुख्य बिंदु

  • मंत्रालय द्वारा किया गया पूंजीगत व्यय वर्ष 2012-13 से 2026-27 के दौरान 33% की वार्षिक चक्रवृद्धि दर (सीएजीआर) से बढ़ा है।

  • सड़क निर्माण में निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी 2014-15 में 51% से घटकर 2023-24 में लगभग 15% हो गई है।

  • एनएचएआई का बकाया ऋण 2021-22 में 3.48 लाख करोड़ रुपए से घटकर नवंबर 2025 में 2.4 लाख करोड़ रुपए हो गया है।

सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय सड़क परिवहन और परिवहन अनुसंधान के लिए नीतियां बनाता और लागू करता है। यह भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (एनएचआईडीसीएल) के माध्यम से राष्ट्रीय राजमार्गों (एनएच) के निर्माण और रखरखाव में भी शामिल है। यह मोटर वाहन एक्ट, 1988 के कार्यान्वयन के माध्यम से सड़क परिवहन, सुरक्षा और वाहन मानकों से संबंधित मामलों का निपटारा करता है। इस नोट में मंत्रालय के 2026-27 के प्रस्तावित व्यय और इस क्षेत्र की प्रमुख समस्याओं को रेखांकित किया गया है।

वित्तीय स्थिति

2026-27 में मंत्रालय को 3,09,875 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं, जो 2025-26 के संशोधित अनुमानों से 8% अधिक है।[1]  यह 2026-27 में सरकार के कुल अनुमानित व्यय (53,47,314 करोड़ रुपए) का 6% है।1 प्रमुख आवंटन एनएचएआई और सड़कों एवं पुलों पर व्यय के लिए हैं (तालिका 1)।

तालिका 1: सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के लिए आवंटन (करोड़ रुपए में)

 

2024-25

2025-26 संअ

2026-27 बअ

% परिवर्तन

कुल

2,99,460

2,87,142

3,09,875

8%

इसमें:

 

 

 

 

एनएचएआई

1,68,602

1,70,266

1,87,293

10%

सड़क एवं पुल

1,30,965

1,16,337

1,21,999

5%

सड़क परिवहन एवं सुरक्षा

254

360

400

11%

नोट: संअ संशोधित अनुमान है, बअ बजट अनुमान है, 2025-26 संअ से 2026-27 बअ में प्रतिशत परिवर्तन। एनएचएआई भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण है।
स्रोत: केंद्रीय बजट दस्तावेज 2026-27; पीआरएस।

मंत्रालय द्वारा पूंजीगत व्यय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो 2012-13 में 5,471 करोड़ रुपए से बढ़कर 2026-27 में 2,94,167 करोड़ रुपए हो गया है। 2012-2026 के बीच, पूंजीगत व्यय में लगभग 33% की वार्षिक सीएजीआर से वृद्धि हुई है। इसी अवधि में, राजस्व व्यय औसतन लगभग 13,307 करोड़ रुपए रहा है (रेखाचित्र 1)।

केंद्रीय बजट घोषणा 2026-27

केंद्र सरकार ने माल ढुलाई को सुगम बनाने के लिए पश्चिम बंगाल के दानकुनी से गुजरात के सूरत तक एक नए माल ढुलाई गलियारे के विकास की घोषणा की है। इसके अलावा, दुर्गापुर में एक सुव्यवस्थित केंद्र के साथ एक नया पूर्वी तट औद्योगिक गलियारा भी विकसित किया जाएगा।

रेखाचित्र 1: राजस्व बनाम पूंजीगत व्यय (करोड़ रुपए में)

 

नोट: वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमानों को वास्तविक आंकड़े माना गया है।
स्रोत: सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की विभिन्न वर्षों की अनुदान मांग; पीआरएस।

उपयोग की प्रवृत्तियां

पिछले कुछ वर्षों में मंत्रालय लगातार बजट अनुमानों से अधिक खर्च कर रहा है (रेखाचित्र 2)।

रेखाचित्र 2: पिछले कुछ वर्षों में मंत्रालय द्वारा धनराशि का 100% उपयोग (करोड़ रुपए में)

 

नोट: वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमानों को वास्तविक आंकड़े माना गया है।
स्रोत: सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की विभिन्न वर्षों की अनुदान मांग; पीआरएस।

एनएचएआई को आवंटन

राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास और रखरखाव की जिम्मेदारी एनएचएआई की है।[2] 2026-27 के लिए, एनएचएआई को 1,87,293 करोड़ रुपए (मंत्रालय के बजट का 60%) आवंटित किए गए हैं।1  यह 2025-26 के संशोधित अनुमानों से 10% अधिक है। एनएचएआई को दी जाने वाली बजटीय सहायता का उपयोग भारतमाला परियोजना के तहत राजमार्ग नेटवर्क को अपग्रेड करने के लिए किया जाता है।[3]  केंद्र सरकार ने 2017 में भारतमाला परियोजना को मंजूरी दी थी, जो 34,800 किलोमीटर लंबी सड़कों को कवर करने वाला एक व्यापक कार्यक्रम है, जिसमें से एनएचएआई 30,464 किलोमीटर सड़कों के विकास के लिए जिम्मेदार है।17 इसका लक्ष्य लॉजिस्टिक्स की लागत को कम करना और देश में कनेक्टिविटी में सुधार करना है।[4]

रेखाचित्र 3: एनएचएआई का धनराशि उपयोग (करोड़ रुपए में)

नोट: वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमानों को वास्तविक आंकड़े माना गया है।
स्रोत: सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की विभिन्न वर्षों की अनुदान मांग; पीआरएस।

सड़कों और पुलों के लिए आवंटन

2026-27 में सड़कों और पुलों के लिए 1,21,999 करोड़ रुपए आवंटित किए गए।1 यह 2025-26 के संशोधित अनुमानों से 5% अधिक है। सड़कों और पुलों के अंतर्गत व्यय में निम्नलिखित शामिल हैं: (i) राष्ट्रीय राजमार्गों का विकास, (ii) एक्सप्रेसवे से संबंधित परियोजनाएं, (iii) विभिन्न परियोजनाओं के अंतर्गत लेन की संख्या में वृद्धि, और (iv) वामपंथी अतिवाद प्रभावित क्षेत्रों में सड़क संपर्क का विकास।

रेखाचित्र 4: सड़कों और पुलों के लिए आवंटन (करोड़ रुपए में)

 

नोट: वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमानों को वास्तविक आंकड़े माना गया है।
स्रोत: सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की विभिन्न वर्षों की अनुदान मांग; पीआरएस।

सड़क परिवहन और सुरक्षा के लिए आवंटन

2026-27 में सड़क परिवहन और सुरक्षा के लिए 400 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं, जो 2025-26 के संशोधित अनुमानों की तुलना में 11% अधिक है।1  2017-26 के दौरान उपयोग औसतन लगभग 63% रहा है।

रेखाचित्र 5: सड़क परिवहन और सुरक्षा के लिए आवंटन (करोड़ रुपए में)

 

नोट: वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमानों को वास्तविक आंकड़े माना गया है।
स्रोत: सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की विभिन्न वर्षों की अनुदान मांग; पीआरएस।

मंत्रालय द्वारा प्रबंधित कोष

मंत्रालय सड़क अवसंरचना परियोजनाओं के वित्तपोषण के लिए विभिन्न कोषों का प्रबंधन करता है। ये निम्नलिखित हैं: (i) केंद्रीय सड़क और अवसंरचना कोष (सीआरआईएफ), (ii) स्थायी पुल शुल्क कोष (पीबीएफएफ), (iii) राष्ट्रीय राजमार्ग मुद्रीकरण कोष (एनएचएमएफ), और (iv) राष्ट्रीय निवेश कोष (एनआईएफ)।

इन कोषों का वित्तपोषण निम्नलिखित तरीकों से किया जाता है: (i) विशिष्ट उपकर लगाना, (ii) टोल वसूलना, (iii) राजमार्गों का मुद्रीकरण और (iv) सार्वजनिक कंपनियों के विनिवेश से प्राप्त आय। इन कोषों से मंत्रालय को आवंटित धनराशि का उपयोग राजमार्ग विकास, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सड़क अवसंरचना निर्माण, सुरक्षा और रखरखाव व्यय, अन्य सड़कों और पुलों के निर्माण और ऋण चुकौती के लिए किया जाता है।

केंद्रीय सड़क और अवसंरचना कोष (सीआरआईएफ)

सीआरआईएफ एक नॉन-लैप्सेबल कोष है जिसकी रचना अवसंरचना परियोजनाओं की जरूरतों को पूरा करने के लिए की गई है।[5] सीआरआईएफ का वित्त पोषण पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले उपकर से किया जाता है जिसे सड़क एवं अवसंरचना विकास उपकर कहा जाता है। यह धनराशि अंततः एनएचएआई और राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकारों को अवसंरचना क्षेत्रों के विकास के लिए जारी की जाती है, जैसे परिवहन, ऊर्जा, जल, स्वच्छता आदि।5 वर्ष 2026-27 में सड़क और अवसंरचना उपकर के रूप में 46,930 करोड़ रुपए एकत्र होने का अनुमान है, जो 2025-26 के संशोधित अनुमानों (45,780 करोड़ रुपए) से 3% अधिक है।[6]  2024-25 में 44,675 करोड़ रुपए जमा किए गए थे।

सीआरआईएफ से एनएचएआई को आवंटन

एनएचएआई ने भारतमाला परियोजना को वित्तपोषित करने के लिए 2017-18 से बाजार से ऋण लेना बढ़ा दिया था।[7],[8] बढ़ते ऋण दायित्वों के कारण, केंद्र सरकार ने 2022-23 से एनएचएआई के बाजार से उधार लेने पर रोक लगा दी और बजटीय सहयोग बढ़ा दिया (रेखाचित्र 6)।8  एनएचएआई का कर्ज 2021-22 में अपने चरम पर पहुंच गया, जो 3.48 लाख करोड़ रुपए था।[9] नवंबर 2025 तक, एनएचएआई का कुल बकाया ऋण 2,39,818 करोड़ रुपए था।[10]  2026-27 में सीआरआईएफ से एनएचएआई को कोई आवंटन नहीं किया जा रहा है।1  2023-24 से सीआरआईएफ से हस्तांतरण का हिस्सा कम हो गया है (रेखाचित्र 7)। सीआरआईएफ से हस्तांतरण में कमी की भरपाई सकल बजटीय सहायता से की जा रही है।

रेखाचित्र 6: एनएचएआई द्वारा 2022-23 से उधार लेना बंद हो गया है (करोड़ रुपए में)

नोट: IEBR का अर्थ है आंतरिक एवं अतिरिक्त बजटीय संसाधन।
स्रोत: सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की विभिन्न वर्षों की अनुदान मांग; पीआरएस।

रेखाचित्र 7: सीआरआईएफ से एनएचएआई को हस्तांतरित राशि का हिस्सा (करोड़ रुपए में)

 

स्रोत: सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की विभिन्न वर्षों की अनुदान मांग; पीआरएस।

राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की सीआरआईएफ से वित्तपोषित योजनाएं

2026-27 में सीआरआईएफ से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 10,430 करोड़ रुपए का उपयोग किए जाने का अनुमान है।1  यह 2025-26 के लिए संशोधित अनुमानों से 5% अधिक है। 

रेखाचित्र 8: राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए सीआरआईएफ आवंटन (करोड़ रुपए में)

 

स्रोत: सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की विभिन्न वर्षों की अनुदान मांग; पीआरएस।

स्थायी पुल शुल्क कोष (पीबीएफएफ)

पीबीएफएफ को सरकार द्वारा एकत्रित राजस्व से वित्त पोषित किया जाता है, जिसमें निम्नलिखित स्रोत शामिल हैं: (i) राष्ट्रीय राजमार्गों पर कुछ स्थायी पुलों के उपयोग के लिए मोटर वाहनों से लिया जाने वाला शुल्क, (ii) राष्ट्रीय राजमार्गों पर टोल, और (iii) कुछ सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) परियोजनाओं से प्राप्त सरकारी राजस्व का हिस्सा। यह धनराशि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को उसके अधीन राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास के लिए जारी की जाती है। वर्ष 2026-27 में पीबीएफएफ से 35,027 करोड़ रुपए आवंटित किए गए हैं।1  यह 2025-26 के संशोधित अनुमानों से 6% अधिक हैं।

रेखाचित्र 9: पीबीएफएफ से एनएचएआई को आवंटित राशि (करोड़ रुपए में)

 

स्रोत: सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की विभिन्न वर्षों की अनुदान मांग; पीआरएस।

राष्ट्रीय निवेश कोष (एनआईएफ) 

एनआईएफ की स्थापना 2005 में हुई थी और इसमें सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों के विनिवेश से मिलने वाली धनराशि जमा होती है।[11]  इस कोष का उपयोग पूर्वोत्तर में विशेष त्वरित सड़क विकास कार्यक्रम (एसएआरडीपी-एनई) के वित्तपोषण के लिए भी किया जाता है।11  2026-27 में एनआईएफ से 18,361 करोड़ रुपए हस्तांतरित करने का बजट निर्धारित किया गया है।1  यह 2025-26 के संशोधित अनुमानों से 84% अधिक है। पूरी राशि एसएआरडीपी-एनई पर खर्च की जाएगी।

मंत्रालय एसएआरडीपी-एनई कार्यक्रम के तहत उत्तर-पूर्वी राज्यों में सड़क नेटवर्क विकसित करता है।[12]  इस कार्यक्रम का उद्देश्य पिछड़े और दूरदराज के क्षेत्रों को कनेक्टिविटी प्रदान करना और यह सुनिश्चित करना है कि पूर्वोत्तर क्षेत्र में स्थित मुख्यालय कम से कम दो लेन वाले राजमार्ग मानकों से जुड़े हों।12  कार्यक्रम की शुरुआत 2005 में हुई थी। परिवहन से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (2022) ने पाया था कि परियोजना का चरण-ए, जिसे मार्च 2014 तक पूरा किया जाना था, निम्नलिखित कारणों से 2023-24 तक विलंबित हो गया: (i) भूमि अधिग्रहण, (ii) काम करने का कम  समय, (iii) स्थानीय एजेंसियों की अनुपलब्धता, (iv) अच्छी गुणवत्ता वाली खदान सामग्री की कमी, और (v) ठेकेदारों का खराब प्रदर्शन।[13]  एसएआरडीपी-एनई के तहत स्वीकृत कार्यों की कुल लंबाई 5,998 किमी थी (मूल रूप से 6,418 किमी)।[14]  इसमें से 5,714 किमी लंबाई (स्वीकृत लंबाई का 95%) दिसंबर 2024 तक पूरी हो चुकी थी।14

रेखाचित्र 10: सड़कों और पुलों के लिए एनआईएफ द्वारा आवंटित राशि (करोड़ रुपए में)

 

स्रोत: सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की विभिन्न वर्षों की अनुदान मांग; पीआरएस।

राष्ट्रीय राजमार्ग मुद्रीकरण कोष (एनएचएफ)

एनएचएफ के लिए पूंजी कुछ सार्वजनिक रूप से वित्तपोषित राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के मुद्रीकरण से जुटाई जाती है।[15]  इसमें कुछ खंडों के रखरखाव का कार्य दीर्घकालिक आधार पर निजी ठेकेदारों को हस्तांतरित किया जाता है।15 इस कोष का उपयोग एनएचएआई के ऋण दायित्वों के पुनर्भुगतान के लिए किया जा रहा है। 2026-27 में एनएचएफ से 30,000 करोड़ रुपए का उपयोग होने की उम्मीद है, जो 2025-26 के संशोधित अनुमानों से 11% कम है।

रेखाचित्र 11: एनएचएआई के लिए एनएचएफ का आवंटन (करोड़ रुपए में)

 

स्रोत: सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की विभिन्न वर्षों की अनुदान मांग; पीआरएस।

मुद्दे और विश्लेषण

सड़क नेटवर्क

भारत में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सड़क नेटवर्क है, जिसकी लंबाई लगभग 64 लाख किलोमीटर है।[16]  इसमें राष्ट्रीय राजमार्ग, एक्सप्रेसवे, राज्य राजमार्ग, जिला सड़कें और ग्रामीण सड़कें शामिल हैं (तालिका 2)। राष्ट्रीय राजमार्ग सड़क नेटवर्क का 2% हिस्सा हैं, लेकिन 40% यातायात इन्हीं पर चलता है। [17]

तालिका 2: भारत में सड़क नेटवर्क (किलोमीटर में)

सड़क की श्रेणी

लंबाई

% हिस्सा

राष्ट्रीय राजमार्ग

1,32,995

2.1%

राज्य राजमार्ग

1,78,749

2.8%

जिला सड़क

6,16,964

9.7%

ग्रामीण सड़कें *

44,95,948

70.7%

शहरी सड़कें

5,48,394

8.6%

परियोजना सड़कें

3,86,954

6.1%

कुल

63,60,004

100%

नोट: आंकड़े 31 मार्च, 2020 तक के हैं। *ग्रामीण सड़कों में जवाहर रोजगार योजना के तहत निर्मित नौ लाख किलोमीटर सड़कें शामिल हैं।
स्रोत: वार्षिक रिपोर्ट, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, 2024-25; पीआरएस।

कुल सड़क की लंबाई 1951 में चार लाख किमी से बढ़कर 2020 में 64 लाख किमी हो गई।16  सड़क की लंबाई में 2010-20 के बीच 3.3% की सीएजीआर दर्ज की गई।16 हाई-स्पीड कॉरिडोर की लंबाई 2014 में 93 किमी से बढ़कर 2024 में 2,474 किमी हो गई।16 चार लेन और उससे अधिक के राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई 2014 में 18,278 किमी से बढ़कर 2024 में 45,947 किमी हो गई।16

रेखाचित्र 12: राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क (किलोमीटर में)

 

स्रोत: वार्षिक रिपोर्ट, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, 2024-25; पीआरएस।

2021-23 को छोड़कर, 2014 के बाद से लक्ष्य पूरा करने की गति में सुधार हुआ है, जो 2024-25 में 150% से अधिक हो गया है।

रेखाचित्र 13: राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना का आवंटन बनाम पूर्ण परियोजना (किमी में)

 

स्रोत: रिपोर्ट संख्या 367, परिवहन से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी, राज्यसभा, 2024; पीआरएस।

निर्माण की गति में 2014-15 में 12 किमी/दिन से बढ़कर 2024-25 में 29 किमी/दिन की वृद्धि दर्ज की गई है (रेखाचित्र 14)।

रेखाचित्र 14: निर्माण की गति (किमी/दिन)

 

स्रोत: तारांकित प्रश्न 75, लोकसभा, 24 जुलाई, 2025; पीआरएस।

सड़क घनत्व का अर्थ है, सड़क की प्रति वर्ग किलोमीटर औसत लंबाई। यह सड़क की गुणवत्ता और कनेक्टिविटी का एक माप है। कुल सड़क घनत्व 2011-12 में 1.42 किमी प्रति वर्ग किलोमीटर से बढ़कर 2018-19 में 1.92 किमी प्रति वर्ग किलोमीटर हो गया।[18] 2018-19 तक, ग्रामीण सड़क घनत्व 1.46 किमी प्रति वर्ग किलोमीटर और शहरी सड़क घनत्व 5.3 किमी प्रति वर्ग किलोमीटर है।

भारतमाला परियोजना के अंतर्गत, दिसंबर 2025 तक स्वीकृत परियोजनाओं का 82% (21,783 किमी) हिस्सा पूरा हो चुका था (तालिका 3)।4  कार्यक्रम की समय सीमा 2022 से संशोधित करके 2027-28 कर दी गई है।

तालिका 3: दिसंबर 2024 तक भारतमाला परियोजना के तहत प्रगति (किमी में)

घटक

आवंटित

(किमी)

पूर्ण (किमी)

कार्यपूर्णता का %

आर्थिक गलियारे

8,737

6,896

79%

अंतर-गलियारों वाली सड़कें

2,889

2,397

83%

फीडर सड़कें

973

702

72%

राष्ट्रीय गलियारे

1,777

1,516

85%

राष्ट्रीय गलियारों की दक्षता में सुधार

824

767

93%

एक्सप्रेसवे

2,422

1,994

82%

सीमावर्ती सड़कें और अंतर्राष्ट्रीय संपर्क मार्ग

1,619

1,466

91%

तटीय सड़कें

77

72

94%

बंदरगाह संपर्क मार्ग

348

154

44%

एनएचडीपी के अंतर्गत शेष सड़क निर्माण कार्य

6,758

5,633

83%

कुल

26,425

21,597

82%

नोट: 31 दिसंबर, 2024 तक की स्थिति के अनुसार। स्रोत: वर्ष के अंत की समीक्षा, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, प्रेस सूचना ब्यूरो, दिसंबर 2025; पीआरएस।

कार्य पूर्णता में विलंब

भूमि अधिग्रहण को अक्सर सड़क निर्माण परियोजनाओं में देरी का एक प्रमुख कारण बताया जाता है। इससे परियोजनाओं की कार्यान्वयन अवधि लंबी हो जाती है और लागत में भी वृद्धि होती है। एनएचएआई के अनुसार, परियोजनाओं के आवंटन की घोषणा के लिए कोई निश्चित समयसीमा न होने के कारण देरी होती है।17  एस्टिमेट्स कमिटी (2024) ने निम्नलिखित  कारणों से हो रही देरी पर गौर किया था: (i) भूमि अधिग्रहण संबंधी समस्याओं के कारण 189 परियोजनाओं में देरी और (ii) पर्यावरण मंजूरी संबंधी समस्याओं के कारण 64 परियोजनाओं में देरी।[19] 

भूमि अधिग्रहण में विलंब

भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुनर्स्थापन में उचित मुआवजे और पारदर्शिता के अधिकार एक्ट (आरएफसीटीएलएआरआर), 2013 के लागू होने से एनएचएआई के लिए भूमि अधिग्रहण की औसत लागत में वृद्धि हुई है।[20],[21] मंत्रालय (2018) ने पाया था कि भूमि अधिग्रहण की लागत 2015 से पहले लगभग 80 लाख रुपए प्रति हेक्टेयर थी जो उसके बाद बढ़कर लगभग 3.6 करोड़ रुपए प्रति हेक्टेयर हो गई थी।20  राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास के लिए, एनएचएआई ने 2018-23 के बीच 23 राज्यों में भूमि अधिग्रहण पर लगभग 1.7 लाख करोड़ रुपए खर्च किए।[22]

तालिका 4: एनएचएआई द्वारा भूमि अधिग्रहण पर किया गया व्यय (करोड़ रुपए में)

वर्ष

भूमि का कब्ज़ा (हेक्टेयर)

अधिग्रहण पर व्यय

व्यय प्रति हेक्टेयर

2011-12

9,802

4,507

0.46

2012-13

6,762

5,404

0.80

2013-14

8,465

7,794

0.92

2014-15

6,733

9,098

1.35

2015-16

9,285

21,934

2.36

2016-17

7,491

17,823

2.38

2017-18

9,494

32,143

3.39

2018-19

18,850

36,048

1.91

2019-20

12,092

29,226

2.42

2020-21

20,038

35,858

1.79

2021-22

14,844

35,885

2.42

2022-23

17,568

39,836

2.27

स्रोत: एनएचएआई की विभिन्न वर्षों की वार्षिक रिपोर्टें; पीआरएस।

कैग (2024) की एक ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, पटना-बक्सर खंड के 124 किलोमीटर के चार लेन वाले प्रोजेक्ट को अंततः (i) भूमि अधिग्रहण में समस्याओं और (ii) भूमि मुआवजे की लागत में लगभग तीन गुना वृद्धि के कारण रद्द कर दिया गया था।[23]  इसके अतिरिक्त, ऑडिट रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि एनएचएआई ने बिहार सरकार को भूमि मुआवजे और आकस्मिक खर्चों के रूप में जो 533 करोड़ रुपए दिए थे, वह उसे वापस हासिल नहीं कर पाई।

वन एवं पर्यावरण मंजूरी

कैग ने अन्य परियोजनाओं में राइट ऑफ वे संबंधी मुद्दों पर गौर किया। भारतमाला परियोजना के प्रथम चरण के अंतर्गत कई परियोजनाएं आवश्यक पर्यावरणीय मंजूरी प्राप्त किए बिना ही शुरू कर दी गईं।[24]  जनवरी 2018 में आवंटित बिहार-झारखंड सीमा (चोरदाहा)-गोरहर छह-लेन परियोजना की मार्च 2023 तक केवल 62% प्रगति हुई।24  झारखंड में 2018 में आवंटित बरही-कोडरमा खंड की मार्च 2023 तक 76% प्रगति हुई।24 इसी प्रकार मार्च 2018 में आवंटित पुरुलिया-बलरामपुर-चांडिल (पश्चिम बंगाल-झारखंड सीमा) परियोजना की मार्च 2023 तक लगभग 70% प्रगति हुई।24

टोल संग्रह

मंत्रालय के अनुसार, 2022-25 के बीच राष्ट्रीय राजमार्ग टोल प्लाजा पर एकत्रित उपयोगकर्ता शुल्क की कुल राशि 1.6 लाख करोड़ रुपए थी।[25] तीनों वर्षों में महाराष्ट्र, राजस्थान और उत्तर प्रदेश का हिस्सा सबसे अधिक रहा (परिशिष्ट में तालिका 11)।

तालिका 5: टोल वसूली (करोड़ रुपए में)

वर्ष

उपयोगकर्ता शुल्क संग्रह

2019-20

27,504

2020-21

27,927

2021-22

33,929

2022-23

48,032

2023-24

55,882

स्रोत: अतारांकित प्रश्न 1061, राज्यसभा, 4 दिसंबर 2024; पीआरएस।

एस्टिमेट्स कमिटी (2025) ने टोल वसूली और क्रियान्वयन में कई समस्याओं पर गौर किया, जैसे: (i) रखरखाव का काम जारी रहने के बावजूद टोल वसूला जा रहा है, (ii) यह मूल्यांकन करने के लिए किसी तंत्र का अभाव है कि क्या टोल शुल्क क्रियान्वयन और रखरखाव की लागत के अनुरूप उचित है, और (iii) FASTag स्कैनर की संख्या अपर्याप्त है जिसके कारण वाहनों की लंबी कतारें लग जाती हैं।[26]  कमिटी ने मंत्रालय से अनुरोध किया कि: (i) टोल शुल्क ढांचे में संशोधन किया जाए जिसमें आधार दर और मुद्रास्फीति शामिल हों, (ii) अधूरी और उपयोग के अयोग्य सड़कों के मामले में टोल रीफंड तंत्र बनाया जाए, और (iii) यातायात के प्रवाह को बेहतर बनाने और कतारों की लंबाई कम करने के लिए FASTag प्रणाली में सुधार किया जाए।

एनएचएआई ने फरवरी 2021 में FASTag का उपयोग करके टोल भुगतान अनिवार्य कर दिया।23 अमान्य FASTag वाले उपयोगकर्ताओं पर जुर्माना लगाया जाता है, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें दोहरा टोल देना पड़ता है। एनएचएआई और कनसेशनेयर सामान्य टोल दर वसूलते हैं, और दोहरे टोल की राशि को भारत की संचित निधि में जमा किया जाता है। कैग ऑडिट (2024) में पाया गया कि एनएचएआई कनसेशनेयर्स से दोहरा टोल नहीं वसूल पाया जिसके परिणामस्वरूप भारत की संचित निधि को 21 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ।23 इसमें इस बात पर भी गौर किया गया कि अन्य टोल संग्रह ठेकेदारों से 63 करोड़ रुपए बकाया हैं (तालिका 6)।

तालिका 6: नवंबर 2022 तक क्षेत्रवार बकाया राशि का विवरण (करोड़ रुपए में)

क्षेत्रीय कार्यालय

कुल देय

कनसेशनेयर से बकाया

गांधीनगर

31

16

मुंबई

37

5

नागपुर

16

0

कुल

84

21

स्रोत: रिपोर्ट संख्या 12 वर्ष 2024, कैग; पीआरएस।

परिसंपत्ति मुद्रीकरण

सरकार ने 2021-22 के केंद्रीय बजट में राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन (एनएमपी) की घोषणा की।[27]  इस कार्यक्रम के तहत, परिचालन राजमार्गों, रेलवे स्टेशनों और हवाई अड्डों जैसी प्रमुख ब्राउनफील्ड संपत्तियों का 2021-22 और 2024-25 के बीच छह लाख करोड़ रुपए तक के मूल्य तक मुद्रीकरण किया जाएगा।27 यह प्रक्रिया परिसंपत्तियों के रखरखाव की जिम्मेदारी निजी क्षेत्र को सौंप कर पूरी की जाती है, जिसके बदले में उन्हें शुल्क वसूलने का अधिकार दिया जाता है।27  सड़क क्षेत्र में परिसंपत्तियों का मुद्रीकरण निम्नलिखित माध्यमों से किया जा रहा है: (i) टोल ऑपरेट ट्रांसफर (टीओटी) मॉडल, (ii) इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (इनविट), और (iii) एसपीवी के माध्यम से प्रतिभूतिकरण। नवंबर 2025 तक, मंत्रालय ने 1.5 लाख करोड़ रुपए मूल्य की परिसंपत्तियों का मुद्रीकरण किया था।[28] यह 2024-25 तक प्रस्तावित 1.6 लाख करोड़ रुपए के मुद्रीकरण लक्ष्य का 95% है।[29]

तालिका 7: 24 जुलाई, 2025 तक मुद्रीकरण के हासिल किए गए लक्ष्य (करोड़ रुपए में)

मोड

मुद्रीकरण

टोल ऑपरेट ट्रांसफर

58,265

इनविट

43,638

एसपीवी मॉडल

50,125

कुल

1,52,028

स्रोत: अतारांकित प्रश्न 720, लोकसभा, 24 जुलाई, 2025; पीआरएस।

निजी क्षेत्र की भागीदारी से संबंधित चुनौतियां

सड़क परियोजनाओं को क्रियान्वित करने के विभिन्न तरीके हैं। ये इस प्रकार हैं: (i) इंजीनियरिंग प्रोक्योरमेंट कंस्ट्रक्शन (ईपीसी), (ii) बिल्ड ऑपरेट ट्रांसफर (टोल), (iii) बिल्ड ऑपरेट ट्रांसफर (एन्युटी) और (iv) हाइब्रिड एन्युटी मॉडल।[30] (परिशिष्ट देखें)

रेखाचित्र 15: भारतमाला परियोजनाओं में से 56% परियोजनाएं ईपीसी के माध्यम से आवंटित की जाती हैं (किमी में)

 

स्रोत: वार्षिक रिपोर्ट 2024-25, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय; पीआरएस।

सरकार द्वारा वित्त पोषित सड़क परियोजनाओं का काम इंजीनियरिंग प्रोक्योरमेंट कंस्ट्रक्शन (ईपीसी) ठेकों के जरिए किया जाता है।30 निजी डेवलपर्स से जुड़ी परियोजनाओं का काम पीपीपी मॉडल के माध्यम से किया जाता है। पीपीपी परियोजना में जोखिम सरकार और निजी डेवलपर के बीच साझा किया जाता है।30 इनमें निम्नलिखित शामिल हो सकते हैं: (i) सड़क के निर्माण से संबंधित वित्तीय जोखिम, (ii) पर्याप्त टोल वसूली सुनिश्चित करने के लिए यातायात सृजन का जोखिम और (iii) निर्माण के बाद सड़क रखरखाव की जिम्मेदारी।30

तालिका 8: विभिन्न निर्माण मॉडलों में सरकार और निजी डेवलपर द्वारा उठाए गए जोखिम

मॉडल

वित्तपोषण

यातायात

रखरखाव

ईपीसी/आइटम रेट

सरकार

सरकार

सरकार

बोट (टोल)

निजी

निजी

निजी

बोटन (इन्युटी)

निजी

सरकार

निजी

एचएएम

दोनों

सरकार

निजी

स्रोत: रिपोर्ट संख्या 296, राष्ट्र निर्माण में राजमार्गों की भूमिका, परिवहन से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी, राज्यसभा, 2021; पीआरएस।

निजी क्षेत्र अतिरिक्त धनराशि ला सकता है और पूंजीगत व्यय बढ़ाने में योगदान दे सकता है। हालांकि राष्ट्रीय राजमार्ग विकास परियोजनाओं में निजी क्षेत्र के निवेश की हिस्सेदारी में गिरावट देखी गई है। 2014-15 में, वित्तपोषण में निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी 51% थी और 40% वित्तपोषण सरकार द्वारा बजटीय सहायता के माध्यम से किया गया था।[31]  कुल वित्त राशि का 9% हिस्सा बाजार से उधार लेकर जुटाया गया।31  2023-24 तक वित्तपोषण का 75% बजटीय सहायता के माध्यम से, 15% निजी क्षेत्र के निवेश के माध्यम से और 10% राष्ट्रीय राजमार्गों के मुद्रीकरण के माध्यम से किया गया था।31 बाजार से उधार लेकर कोई भी राशि वित्तपोषित नहीं की गई।31 

रेखाचित्र 16: सड़कों के लिए बजटीय सहायता, उधार और निजी निवेश (करोड़ रुपए में)

 

स्रोत: वार्षिक रिपोर्ट 2023-24, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय; पीआरएस।

आरबीआई के सकल बैंक ऋण के उद्योगवार वितरण के आंकड़ों के अनुसार, 2019-25 के बीच अवसंरचना में सड़कों की हिस्सेदारी लगभग 22% रही है (तालिका 9)। श्रृंखला के पुराने प्रारूप के अनुसार, मार्च 2008 में सड़कों को दिया जाने वाला बैंक ऋण लगभग 17% था (विवरण के लिए परिशिष्ट में तालिका 12 देखें)। यह मार्च 2025 में बढ़कर लगभग 24% हो गया है।

तालिका 9: सकल बैंक ऋण का उद्योगवार उपयोग- अवसंरचना में सड़कों का प्रतिशत (करोड़ रुपए में)

मार्च के आखिरी शुक्रवार तक उत्कृष्ट प्रदर्शन

अवसंरचना

सड़कों के हिस्से का %

2019

10,44,199

17%

2020

10,83,656

17%

2021

11,11,675

21%

2022

12,12,648

23%

2023

12,23,105

25%

2024

13,26,852

24%

2025

13,64,369

24%

नोट: आरबीआई श्रृंखला का नया प्रारूप: सकल बैंक ऋण का उद्योगवार वितरण। स्रोत: भारतीय अर्थव्यवस्था डेटाबेस, भारतीय रिज़र्व बैंक, 18 फरवरी, 2026 को प्राप्त जानकारी के अनुसार; पीआरएस।

नीति आयोग की पिछली रिपोर्ट्स में 2012-13 से निजी निवेश में मंदी का उल्लेख किया गया था।[32]  निवेश में मंदी नई परियोजनाओं और पहले से स्वीकृत परियोजनाओं, दोनों में देखी गई। आर्थिक सर्वेक्षण (2014-15) में पीपीपी ठेकों में कुछ कमियों को चिन्हित किया गया, जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) कुशल सेवाएं प्रदान करने की बजाय लागत को कम करने पर अधिक ध्यान देना, (ii) जोखिमों को उस पक्ष को आवंटित न करना जो उन्हें बेहतर ढंग से प्रबंधित कर सके, और (iii) समस्या उत्पन्न होने पर ठेकों को संशोधित करने के लिए कोई स्पष्ट नियम न होना।[33] हाल के आर्थिक सर्वेक्षणों (2024-25 और 2025-26) ने अवसंरचना के विकास के लिए निजी निवेश को अनिवार्य बताया है।[34],[35]  सर्वेक्षणों में अवसंरचना क्षेत्र के वित्त पोषण और परियोजनाओं को पूरा करने के लिए पीपीपी में निजी भागीदारी की भूमिका को दोहराया गया है।

रखरखाव के लिए कम आवंटन

परिवहन से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (2023) ने कहा कि 2015-22 के बीच 'राष्ट्रीय राजमार्गों के रखरखाव - सीआरआईएफ से वित्तपोषित' के लिए मंत्रालय की मांग की तुलना में लगातार कम आवंटन किया गया।[36] राष्ट्रीय राजमार्गों के रखरखाव के लिए आवंटित बजट में कमी आई है, लेकिन राष्ट्रीय राजमार्गों के रखरखाव पर वास्तविक व्यय, जिसमें एनएचएआई और एनएचआईडीसीएल द्वारा किया गया व्यय भी शामिल है, में वृद्धि हुई है (रेखाचित्र 17)। इसके अलावा, कमिटी ने पाया कि 2023 में 25,000 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्गों के रखरखाव पर खर्च किया गया 4,490 करोड़ रुपए अपर्याप्त था। यह भारत के राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क का लगभग 17% था। उसने मंत्रालय को आगामी वर्षों में अधिक आवंटन का अनुरोध करने का सुझाव दिया।

रेखाचित्र 17: राष्ट्रीय राजमार्गों पर आवंटन और व्यय (करोड़ रुपए में)

स्रोत: रिपोर्ट संख्या 342, अनुदान मांग, परिवहन से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी, राज्यसभा, 2023; पीआरएस।

ईपीसी परियोजनाओं में दोष दायित्व अवधि (डीएलपी) के दौरान राष्ट्रीय राजमार्ग खंडों के रखरखाव की जिम्मेदारी ठेकेदारों की होती है।[37] कनसेशन मॉडल (जिसमें परिसंपत्ति मुद्रीकरण भी शामिल है) के तहत आने वाले सड़कों के हिस्सों का रखरखाव कनसेशनेयर्स करते हैं। 2025 तक 1.46 लाख किलोमीटर के राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क का केवल लगभग 38% (55,448 किलोमीटर) हिस्सा डीएलपी या कनसेशन अवधि के अंतर्गत था।37  शेष नेटवर्क का रखरखाव मंत्रालय द्वारा प्रदर्शन-आधारित रखरखाव ठेकों (पीबीएमसी) और अल्पकालिक रखरखाव ठेकों (एसटीएमसी) के माध्यम से किया जाता है।

सड़क दुर्घटनाएं और मौतें

2012 और 2022 के बीच सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में सालाना औसतन 2% की दर से वृद्धि हुई है।[38] विश्वभर में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में से लगभग 10% मौतें भारत में होती हैं, जबकि भारत में दुनिया के कुल वाहनों का केवल 1% हिस्सा है।[39],[40]  देश के कुल सड़क नेटवर्क में राष्ट्रीय राजमार्गों की हिस्सेदारी 2.1% है, लेकिन वर्ष 2023 में कुल मौतों में से 36.5% मौतें इन्हीं राजमार्गों पर हुईं। परिवहन से संबंधित स्टैंडिंग कमिटी (2023) ने मंत्रालय से अनुरोध किया कि वह वर्तमान दशक में सड़क दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों में एक मापने योग्य कमी लाने का लक्ष्य रखे। यानी मंत्रालय सिर्फ यह न कहे कि मौतें कम करेंगे, बल्कि एक निश्चित संख्या या प्रतिशत तय करे।40

पब्लिक एकाउंट्स कमिटी (2025) ने विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने के दौरान जनता और हितधारकों के परामर्श की कमी पर गौर किया।26 स्थल-विशिष्ट इनपुट को शामिल न करने के कारण राजमार्ग के कई हिस्से ढह गए। कमिटी ने राजमार्ग निर्माण में डिजाइन संबंधी खामियों को भी उल्लेख किया, जिसके परिणामस्वरूप बार-बार ढलान का ढहना, फुटपाथ में दरारें पड़ना और जलभराव जैसी समस्याएं उत्पन्न हुईं।

कमिटी ने पाया कि तेज़ गति वाले और दूरस्थ राजमार्गों पर आपातकालीन तंत्र का अभाव है। वर्ष 2024 में सभी राज्यों में 4.8 लाख सड़क दुर्घटनाएं दर्ज की गईं (परिशिष्ट में तालिका 15)।[41]  कमिटी ने मंत्रालय से एक आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली स्थापित करने का भी अनुरोध किया जिसमें जीपीएस-युक्त एम्बुलेंस, हाईवे पेट्रोल, और रिकवरी वाहनों को एक साथ जोड़ा गया हो ताकि दुर्घटना के समय तुरंत सहायता मिल सके।

पर्यावरण अनुकूल यातायात

भारत के लिए 2023-24 में कुल लॉजिस्टिक्स लागत 24 लाख करोड़ रुपए थी।[42] इसमें से परिवहन की लागत 10 लाख करोड़ रुपए (कुल लॉजिस्टिक्स लागत का 42%) थी।42

भारत का अधिकांश लॉजिस्टिक्स सड़क परिवहन के माध्यम से संचालित होता है, जो 2022 में घरेलू माल ढुलाई की मांग का लगभग 70% है।[43],44 नीति आयोग के अनुसार, 2050 तक सड़क माल ढुलाई की मांग बढ़कर 9.6 ट्रिलियन टन होने का अनुमान है।[44]  माल ढुलाई की इस मांग को पूरा करने के लिए भारतीय सड़कों पर ट्रकों की संख्या 2022 के 40 लाख से बढ़कर 2050 तक लगभग 17 मिलियन करोड़ होने की उम्मीद है।44  वर्तमान में भारत के 92% माल ढुलाई वाहन डीजल से चलते हैं।[45] इसके बाद सीएनजी और पेट्रोल वाहनों की हिस्सेदारी क्रमशः 4% और 2% है।45 इलेक्ट्रिक माल ढुलाई वाहनों की हिस्सेदारी लगभग 0.1% है।45

अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (2022) ने अनुमान लगाया कि भारत के ऊर्जा संबंधी उत्सर्जन में सड़क क्षेत्र का हिस्सा लगभग 12% है।43 नीति आयोग (2022) ने यह सुझाव दिया था कि अगर आने वाले समय में इलेक्ट्रिक ट्रकों का ज्यादा इस्तेमाल हो तो वह आर्थिक और पर्यावरणीय, दोनों दृष्टिकोणों से फायदेमंद हो सकता है।44  ऐसा निम्नलिखित के कारण है: (i) इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) का कम टेलपाइप उत्सर्जन और (ii) डीजल की तुलना में बिजली की कम लागत। नीति आयोग के अनुसार, इलेक्ट्रिक ट्रकों में ट्रांज़िशन से ईंधन की लागत में 46% की कमी हो सकती है, जिससे परिवहन लागत में कमी आएगी। इनमें लॉजिस्टिक्स की कुल लागत को करीब 17% कम करने की अनुमानित क्षमता है।44

पर्यावरणीय कारणों से भी इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग का सुझाव दिया गया है। हालांकि इलेक्ट्रिक वाहनों का कुल उत्सर्जन उसकी बैटरी को चार्ज करने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली बिजली के स्रोत पर निर्भर करता है। 2023 तक कुल बिजली उत्पादन का 74% कोयले से उत्पन्न होता था।[46]  सौर और पवन ऊर्जा जैसे स्वच्छ ईंधन स्रोतों के उपयोग से इस समस्या का समाधान हो सकता है।

इलेक्ट्रिक ट्रकों को अपनाने के लिए एक सहायक नीतिगत माहौल की आवश्यकता होगी।43  सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने स्वच्छ मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए कुछ उपाय किए हैं। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं: (i) इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए रोड टैक्स और पंजीकरण शुल्क में छूट, (ii) परमिट छूट के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए ग्रीन लाइसेंस प्लेट जारी करना, (iii) राजमार्गों के किनारे सुविधाओं के माध्यम से इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर की स्थापना, और (iv) वाहन उत्सर्जन मानदंडों को मजबूत करना।43,[47],[48],[49]  मंत्रालय 2022 से वाहन स्क्रैपिंग नीति भी लागू कर रहा है।43,[50]  इस नीति का उद्देश्य प्रदूषण फैलाने वाले पुराने और अनुपयुक्त वाहनों को चरणबद्ध तरीके से हटाना है।50 जुलाई 2024 तक भारत में 60 पंजीकृत वाहन स्क्रैपिंग केंद्र और 75 स्वचालित परीक्षण केंद्र चालू हैं।50  15 जुलाई, 2024 तक कुल 96,980 अनुपयुक्त वाहनों को स्क्रैप किया जा चुका है।50

अनुलग्नक

पीपीपी परियोजनाओं को लागू करने के विभिन्न मॉडल

  • बिल्ड ऑपरेट ट्रांसफर (टोल): डेवलपर परियोजना को डिजाइन और विकसित करने और कन्सेशन की पूरी अवधि के दौरान संचालन और रखरखाव (ओएंडएम) के लिए जिम्मेदार होता है। डेवलपर को निर्दिष्ट अवधि के दौरान टोल वसूलने का भी अधिकार होता है। कन्सेशन की अवधि आमतौर पर 25 से 30 वर्ष की होती है।

  • बिल्ड ऑपरेट ट्रांसफर (एन्युइटी): यह मॉडल बीओटी (टोल) के समान है, सिवाय इसके कि डेवलपर को सड़क के विकास और रखरखाव के बदले वार्षिक आधार पर भुगतान प्राप्त होता है (सरकार द्वारा)। वाणिज्यिक संचालन के लिए एक खंड खुलने के बाद सरकार को टोल जमा करने का अधिकार होता है।

  • हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल (एचएएम): इस मॉडल के तहत सरकार या उसकी कार्यकारी एजेंसी निजी डेवलपर को अनुदान के रूप में परियोजना लागत का 40% भुगतान करती है। निजी डेवलपर शेष 60% निवेश के लिए ऋण और इक्विटी के रूप मे बोलियां आमंत्रित करता है। निजी डेवलपर को 15 वर्षों की अवधि में अर्ध-वार्षिक वार्षिकी, ब्याज और संचालन एवं रखरखाव (ओ एंड एम) भुगतान के रूप में 60% राशि का भुगतान किया जाता है। इस अवधि के दौरान रखरखाव और संचालन के लिए कन्सेशनर जिम्मेदार होता है, जबकि यातायात जोखिम सरकार द्वारा वहन किया जाता है। विकसित खंड के वाणिज्यिक संचालन की घोषणा के बाद सरकार द्वारा टोल जमा किया जाता है।

  • टोल ऑपरेट ट्रांसफर (टीओटी): इस मॉडल के तहत सार्वजनिक वित्त पोषित राजमार्गों को संचालन और रखरखाव के लिए एक निजी कन्सेशनेयर को सौंप दिया जाता है। कन्सेशनेयर सरकार को एकमुश्त राशि का भुगतान करता है। यह राशि एक पूर्व-निर्धारित अवधि के लिए टोल जमा के अधिकार के माध्यम से वसूल की जाती है।

तालिका 10: जून 2025 तक राज्यवार स्वीकृत, आवंटित, पूर्ण की गई परियोजनाएं और निर्मित सड़कें (किलोमीटर में)

राज्य

कुल लंबाई (किमी)

आवंटित लंबाई (किमी)

जून 2025 तक निर्मित होने वाली अवधि (किमी)

आंध्र प्रदेश

2,525

1,936

1,234

असम

433

431

349

बिहार

1,572

1,159

698

छत्तीसगढ़

571

471

344

दिल्ली

203

203

187

गोवा

26

26

26

गुजरात

1,577

1,194

1,023

हरियाणा

1,058

1,058

977

हिमाचल प्रदेश

167

167

115

जम्मू एवं कश्मीर

433

251

145

झारखंड

1,000

801

508

कर्नाटक

2,059

1,603

1,156

केरल

1,126

708

506

मध्य प्रदेश

3,063

2,017

1,674

महाराष्ट्र

3,029

2,174

1,944

मणिपुर

635

635

443

मेघालय

170

170

118

मिजोरम

593

593

493

नागालैंड

208

208

153

ओड़िशा

1,586

967

928

पंजाब

1,764

1,553

714

राजस्थान

2,503

2,360

2,257

तमिलनाडु

2,414

1,476

1,265

तेलंगाना

1,719

1,026

874

त्रिपुरा

94

94

64

उत्तर प्रदेश

3,126

2,495

2,061

उत्तराखंड

273

264

174

पश्चिम बंगाल

874

385

339

कुल

34,800

26,425

20,770

स्रोत: अतारांकित प्रश्न संख्या 3124, लोकसभा, 7 अगस्त 2025; पीआरएस।

तालिका 11: उपयोगकर्ता शुल्क संग्रह (करोड़ रुपए में)

राज्य

2022-23

2023-24

2024-25

आंध्र प्रदेश

3,274

3,502

3,719

असम

466

486

548

बिहार

1,566

1,721

2,037

छत्तीसगढ़

866

1,010

1,147

दिल्ली

1,786

2,558

3,017

गुजरात

4,519

4,851

5,450

हरियाणा

1,519

2,072

1,956

हिमाचल प्रदेश

56

114

171

जम्मू एवं कश्मीर

410

437

508

झारखंड

607

818

895

कर्नाटक

3,517

4,086

4,320

केरल

461

563

579

मध्य प्रदेश

3,185

3,858

4,188

महाराष्ट्र

4,660

5,353

6,103

मेघालय

94

96

84

ओड़िशा

1,274

1,745

1,856

पंजाब

1,188

1,492

1,574

राजस्थान

5,054

5,697

6,289

तमिलनाडु

3,817

4,222

4,459

तेलंगाना

1,826

2,098

2,311

उत्तर प्रदेश

4,811

5,774

6,574

उत्तराखंड

458

534

582

पश्चिम बंगाल

2,619

2,795

3,043

कुल

48,033

55,882

61,410

स्रोत: तारांकित प्रश्न संख्या 54, राज्यसभा, 4 फरवरी, 2026; पीआरएस।

तालिका 12: सकल बैंक ऋण का उद्योगवार उपयोग-अवसंरचना में सड़कों का प्रतिशत (करोड़ रुपए में)

इस तिथि तक बकाया

अवसंरचना

सड़कें

28 मार्च, 2008

2,05,336

17%

27 मार्च, 2009

2,69,972

17%

26 मार्च, 2010

3,79,887

19%

25 मार्च, 2011

5,21,393

17%

23 मार्च, 2012

6,29,991

18%

22 मार्च, 2013

7,29,721

18%

21 मार्च, 2014

8,36,356

19%

20 मार्च, 2015

9,24,531

18%

18 मार्च, 2016

9,64,811

18%

31 मार्च, 2017

9,06,394

20%

30 मार्च, 2018

8,90,935

19%

29 मार्च, 2019

10,55,921

18%

27 मार्च, 2020

10,53,913

18%

नोट: आरबीआई श्रृंखला का पुराना प्रारूप: सकल बैंक ऋण का उद्योगवार वितरण

स्रोत: भारतीय अर्थव्यवस्था डेटाबेस, भारतीय रिज़र्व बैंक, 18 फरवरी, 2026 को प्राप्त जानकारी के अनुसार; पीआरएस।

तालिका 13: राष्ट्रीय राजमार्गों पर मृत्यु दर के मामले में शीर्ष 10 राज्य

राज्य

2019

2020

2021

2022

2023

उत्तर प्रदेश

8,830

7,859

8,506

8,479

8,446

तमिलनाडु

6,661

5,454

5,263

5,978

6,258

महाराष्ट्र

3,799

3,528

4,080

4,923

5,780

मध्य प्रदेश

2,904

3,022

3,389

4,025

4,476

कर्नाटक

3,842

3,330

3,487

4,164

4,383

राजस्थान

3,870

3,320

3,829

4,156

4,172

बिहार

3,436

3,285

3,517

3,953

4,078

आंध्र प्रदेश

3,114

2,858

3,602

3,793

3,806

तेलंगाना

2,491

2,620

2,735

3,010

3,058

गुजरात

1,898

1,797

2,077

2,109

2,233

स्रोत: भारत में सड़क दुर्घटनाएं, 2023, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय; पीआरएस।

तालिका 14: वर्ष 2022 में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में दुर्घटनाओं के प्रकार

राज्य/यूटी

घातक दुर्घटनाएं

चोटिल करने वाली गंभीर दुर्घटनाएं

चोटिल करने वाली मामूली दुर्घटनाएं

चोटिल न करने वाली दुर्घटनाएं

कुल दुर्घटनाएं

आंध्र प्रदेश

7,688

4,306

8,010

1,245

21,249

अरुणाचल प्रदेश

123

81

11

12

227

असम

2,837

3,559

385

242

7,023

बिहार

8,242

2,065

127

367

10,801

छत्तीसगढ़

5,446

1,345

4,955

1,533

13,279

गोवा

253

206

528

2,024

3,011

गुजरात

6,999

5,373

2,356

1,023

15,751

हरियाणा

4,593

1,799

3,659

378

10,429

हिमाचल प्रदेश

864

809

772

152

2,597

झारखंड

3,570

1,322

106

177

5,175

कर्नाटक

10,854

17,149

8,714

3,045

39,762

केरल

4,104

31,584

6,674

1,548

43,910

मध्य प्रदेश

12,183

4,928

32,214

5,107

54,432

महाराष्ट्र

14,058

12,250

4,442

2,633

33,383

मणिपुर

109

114

277

8

508

मेघालय

147

71

12

16

246

मिजोरम

94

24

4

11

133

नागालैंड

67

51

138

233

489

ओड़िशा

5,140

4,310

1,771

442

11,663

पंजाब

4,418

1,208

445

67

6,138

राजस्थान

10,061

3,741

9,065

747

23,614

सिक्किम

58

81

57

15

211

तमिलनाडु

17,080

20,752

24,825

1,448

64,105

तेलंगाना

7,057

2,581

9,744

2,237

21,619

त्रिपुरा

232

325

5

13

575

उत्तराखंड

851

627

124

72

1,674

उत्तर प्रदेश

20,524

13,052

7,257

913

41,746

पश्चिम बंगाल

5,626

6,944

874

242

13,686

अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह

19

54

43

25

141

चंडीगढ़

79

14

113

31

237

दादरा-नगर हवेली

88

91

8

9

196

दमन-दीव

NA

NA

NA

NA

NA

दिल्ली

1,428

211

3,921

92

5,652

जम्मू एवं कश्मीर

654

1,723

3,109

606

6,092

लद्दाख

60

21

245

48

374

लक्षद्वीप

-

3

-

-

3

पुद्दूचेरी

175

600

370

36

1,181

कुल

1,55,781

1,43,374

1,35,360

26,797

4,61,312

स्रोत: भारत में सड़क दुर्घटनाएं, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, 2022; पीआरएस।

तालिका 15: राज्यवार सड़क दुर्घटनाएं

राज्य/यूटी

2020

2021

2022

2023

2024

आंध्र प्रदेश

19,509

21,556

21,249

19,949

19557

अरुणाचल प्रदेश

134

283

227

287

277

असम

6,595

7,411

7,023

7,421

7848

बिहार

8,639

9,553

10,801

11,014

11610

छत्तीसगढ़

11,656

12,375

13,279

13,468

14857

गोवा

2,375

2,849

3,011

2,846

2682

गुजरात

13,398

15,186

15,751

16,349

15588

हरियाणा

9,431

9,933

10,429

10,463

9806

हिमाचल प्रदेश

2,239

2,404

2,597

2,253

2156

झारखंड

4,405

4,728

5,175

5,315

5196

कर्नाटक

34,178

34,647

39,762

43,440

43062

केरल

27,877

33,296

43,910

48,091

48834

मध्य प्रदेश

45,266

48,877

54,432

55,327

56669

महाराष्ट्र

24,971

29,477

33,383

35,243

36118

मणिपुर

432

366

508

398

299

मेघालय

214

245

246

223

269

मिजोरम

53

69

133

106

118

नागालैंड

500

746

489

303

129

ओड़िशा

9,817

10,983

11,663

11,992

12375

पंजाब

5,203

5,871

6,138

6,269

6063

राजस्थान

19,114

20,951

23,614

24,694

24838

सिक्किम

138

155

211

182

149

तमिलनाडु

49,844

55,682

64,105

67,213

67526

तेलंगाना

19,172

21,315

21,619

22,903

25986

त्रिपुरा

466

479

575

577

578

उत्तराखंड

1,041

1,405

1,674

1,691

1747

उत्तर प्रदेश

34,243

37,729

41,746

44,534

46052

पश्चिम बंगाल

10,863

11,937

13,686

13,795

13,700

अंडमान और निकोबार द्वीप समूह

141

115

141

143

135

चंडीगढ़

159

208

237

182

169

दादरा नगर हवेली और दमन दीव

100

140

196

182

152

दिल्ली

4,178

4,720

5,652

5,834

5657

जम्मू एवं कश्मीर

4,860

5,452

6,092

6,298

5808

लद्दाख

NA

236

374

289

264

लक्षद्वीप

1

4

3

1

0

पुद्दूचेरी

969

1,049

1,181

1,308

1431

कुल

3,72,181

4,12,432

4,61,312

4,80,583

4,87,705

स्रोत: भारत में सड़क दुर्घटनाएं, 2023, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय; पीआरएस


[1] Demand no. 86, Ministry of Road Transport and Highways, Expenditure Budget 2026-27, Ministry of Finance, https://www.indiabudget.gov.in/doc/eb/allsbe.pdf.

[2] Website of National Highways Authority of India, as accessed on February 19, 2026, https://nhai.gov.in/#/about-nhai.

[3] Annual Report, Ministry of Road Transport and Highways, 2023-24, https://morth.nic.in/sites/default/files/AR-MoRTH_Annual%20Report_2023-24_English.pdf.

[4] Unstarred question no. 24, Lok Sabha, January 29, 2026, https://sansad.in/getFile/loksabhaquestions/annex/187/AU24_qXzUoY.pdf?source=pqals.

[5] Central Road and Infrastructure Fund, Press Information Bureau, Ministry of Road Transport and Highways, November 21, 2019, https://pib.gov.in/Pressreleaseshare.aspx?PRID=1592674.

[7] Report No 342, Demands for Grants, Standing Committee on Transport, Tourism and Culture, March 13, 2023, https://sansad.in/getFile/rsnew/Committee_site/Committee_File/ReportFile/20/173/342_2023_3_15.pdf?source=rajyasabha.

[8] NHAI Debt, Press Information Bureau, Ministry of Road Transport and Highways, July 25, 2024, https://pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=2036675.

[9] NHAI debt, Press Information Bureau, Ministry of Road Transport and Highways, July 25, 2024, https://www.pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=2036675&reg=3&lang=2.

[10] Unstarred question No. 1216, answered on December 10, 2025, Rajya Sabha, Ministry of Road Transport and Highways, https://sansad.in/getFile/annex/269/AU1216_e4JvNB.pdf?source=pqars.

[11] National Investment Fund, Press Information Bureau, Ministry of Road Transport and Highways, May 13, 2005, https://pib.gov.in/newsite/erelcontent.aspx?relid=9255#:~:text=The%20NIF%20would%20be%20professionally,Government%20without%.

[12] ‘Special Accelerated Road Development Programme for Development of Road Network in the North Eastern States’, Press Information Bureau, Ministry of Road Transport and Highways, February 5, 2013, https://pib.gov.in/newsite/PrintRelease.aspx?relid=92040.

[13] Report No. 317, Standing Committee on Transport, Tourism and Culture, Rajya Sabha, March 14, 2022, https://sansad.in/getFile/rsnew/Committee_site/Committee_File/ReportFile/20/166/317_2022_9_11.pdf?source=rajyasabha.

[14] Year End Review 2024: Ministry of Road Transport and Highways, Press Information Bureau, Ministry of Road Transport and Highways, January 9, 2025, https://pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2091508.

[15] Background Note on Road Transport and Highways, Lok Sabha Secretariat, March, 2022, https://loksabhadocs.nic.in/Refinput/New_Reference_Notes/English/10032022_111318_102120463.pdf.

[16] Annual report, Ministry of Road Transport and Highway, 2024-25, https://morth.nic.in/sites/default/files/Annual-Report-English-with-Cover.pdf.

[17] Annual Report, National Highways Authority of India, 2023-24, https://nhai.gov.in/nhai/sites/default/files/2025-09/NHAI-Annual_Report_2023-24_English.pdf.

[18] Basic Road Statistics, Ministry of Road Transport and Highways, 2018-19, https://morth.nic.in/sites/default/files/Basic%20Road%20Statistics%20in%20India-2018-19.pdf.

[19] Report no. 33, ‘Assessment of various projects including green highways under national highways development project (NHDP),’ Committee on Estimates, Ministry of Road Transport and Highways, Lok Sabha, December 2, 2024, https://eparlib.sansad.in/bitstream/123456789/2975823/1/17_Estimates_33.pdf.

[20] ‘A Manual of Guidelines on Land Acquisition for National Highways under The National Highways Act, 1956,’ Ministry of Road Transport and Highways, December 2018, https://morth.nic.in/sites/default/files/A_Manual_of_Guidelines_on_Land_Acquisition_for_National_Highways_File3449.pdf.

[21] ‘The Right to Fair Compensation and Transparency in Land Acquisition, Rehabilitation and Resettlement Act, 2013,’ Ministry of Law and Justice, September 2013, https://bhoomirashi.gov.in/auth/revamp/la_act.pdf.

[22] Unstarred question No. 2008, answered on December 20, 2023, Rajya Sabha, Ministry of Road Transport and Highways, https://sansad.in/getFile/annex/262/AU2008.pdf?source=pqars.

[25] Unstarred question No. 54, answered on February 4, 2026, Rajya Sabha, Ministry of Road Transport and Highways, https://sansad.in/getFile/annex/270/AS54_Uf1RFL.pdf?source=pqars.

[26] Report no 33, ‘Levy and Regulation of Fees, Tariffs, User Charges etc. on Public Infrastructure and Other Public Utilities,’ Public Accounts Committee, Ministry of Road Transport and Highways, August 12, 2025, https://sansad.in/getFile/lsscommittee/Public%20Accounts/18_Public_Accounts_33.pdf?source=loksabhadocs

[27] National Monetization Pipeline, 2021, Volume I, NITI Aayog, https://www.niti.gov.in/sites/default/files/2023-03/Asset%20Monetization%20Pipeline.pdf.

[28] Unstarred question No. 720, Lok Sabha, Ministry of Road Transport and Highways, July 24, 2025, https://sansad.in/getFile/loksabhaquestions/annex/185/AU720_fHjVoF.pdf?source=pqals.

[29] National Monetization Pipeline, 2021, Volume II, NITI Aayog, https://www.niti.gov.in/sites/default/files/2023-02/NATIONALMONETISATIONPIPELINEVol2.pdf.

[30] Report No. 296, ‘Role of Highways in Nation Building’, Standing Committee on Transport, Tourism and Culture, Rajya Sabha, July 28, 2021, https://rajyasabha.nic.in/rsnew/Committee_site/Committee_File/ReportFile/20/148/296_2021_10_17.pdf.

[31] Annual report, Ministry of Road Transport and Highway, 2023-24, https://morth.nic.in/sites/default/files/AR-MoRTH_Annual%20Report_2023-24_English.pdf

[32] Infrastructure and PPP Division, NITI Aayog brief, 2019, https://www.niti.gov.in/sites/default/files/2019-07/NITI%20Brief5.pdf.

[36] Report no. 342, ‘Demand for Grants (2023-24),’ Standing Committee on Transport, Tourism and Culture, Rajya Sabha, March 13, 2023, https://sansad.in/getFile/rsnew/Committee_site/Committee_File/ReportFile/20/173/342_2024_9_11.pdf?source=rajyasabha.

[37] ‘Year End Review 2025,’ Press Information Bureau, Ministry of Road Transport and Highways, December 30, 2025, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2209837&reg=3&lang=2.

[38] ‘Road Accident in India 2023,’ Ministry of Road Transport and Highways, July 30, 2025, https://morth.nic.in/sites/default/files/Road-Accident-in-India-2023-Publications.pdf.

[39] Report No 342, Demands for Grants, Standing Committee on Transport, Tourism and Culture, March 13, 2023, https://sansad.in/getFile/rsnew/Committee_site/Committee_File/ReportFile/20/173/342_2023_3_15.pdf?source=rajyasabha.

[40] Unstarred Question No. 1855, Rajya Sabha, Ministry of Road Transport and Highways, December 11, 2024, https://sansad.in/getFile/annex/266/AU1855_Zi1J3A.pdf?source=pqars.

[41] Unstarred question No. 1991, Lok Sabha, Ministry of Road Transport and Highways, December 11, 2025, https://sansad.in/getFile/loksabhaquestions/annex/186/AU1991_DJky03.pdf?source=pqals.

[42] “Assessment of logistics cost of India,” Department for Promotion of Industry and Internal Trade, 2025, https://master-dpiit.digifootprint.gov.in/static/uploads/2025/09/7d467e0f4aee2362e4bf90b84b7a5332.pdf.

[43] “Transitioning India’s Road Transport Sector”, International Energy Agency, 2023, https://iea.blob.core.windows.net/assets/06ad8de6-52c6-4be3-96fc-2bdc3510617d/TransitioningIndiasRoadTransportSector.pdf.

[44] “Transforming Trucking in India”, NITI Aayog, September 2022, https://www.niti.gov.in/sites/default/files/2023-02/ZETReport09092022.pdf.

[45] Vahan Dashboard, as accessed on February 12, 2026, https://vahan.parivahan.gov.in/vahan4dashboard/vahan/view/reportview.xhtml.

[46] “India”, website of the IEA, as accessed on February 20, 2025, https://www.iea.org/countries/india/electricity.

[47] “Test Method, Testing Equipment and Related Procedures for Type Approval and Conformity of Production (CoP) Testing of M & N Category Vehicles having GVW exceeding 3500 kg for Bharat Stage VI (BS-VI) Emission Norms as per CMV Rules 115, 116 and 126”, Ministry of Road Transport and Highways, February 2019, https://morth.nic.in/sites/default/files/ASI/53201963840PMAIS_137_Part_4_F.pdf.

[48] Unstarred Question No. 318, Lok Sabha, Ministry of Heavy Industries, December 5, 2023, https://heavyindustries.gov.in/sites/default/files/2024-01/_loksabhaquestions_annex_1714_au318.pdf.

[49] “Electric vehicle charging stations on national highways”, Press Information Bureau, Ministry of Road Transport and Highways, July 24, 2024, https://www.pib.gov.in/PressReleasePage.aspx?PRID=2036276.

[50] “Vehicle Scrapping Policy”, Press Information Bureau, Ministry of Road Transport and Highways, July 25, 2024, https://pib.gov.in/PressReleaseIframePage.aspx?PRID=2036674.

 

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